मानवाधिकार हनन का मामला उठाया, स्वतंत्र जांच की मांग


 मानवाधिकार हनन का मामला उठाया, स्वतंत्र जांच की मांग  

गोरखपुर/आरा /बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बिलौटी में 28-30 वर्षीय भरत भूषण तिवारी उर्फ भरत तिवारी की मौत को लेकर विवाद गहरा गया है। इस मामले में महराजगंज, यूपी के अधिवक्ता एवं बॉर्डर लॉयर्स ट्रस्ट के सह-संस्थापक विनय कुमार पांडेय ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, नई दिल्ली को औपचारिक शिकायत भेजी है।  
शिकायत के अनुसार भरत तिवारी, पुत्र काशीनाथ तिवारी, की मौत 17 से 20 जून 2026 के बीच शाहपुर थाना पुलिस की कार्रवाई के दौरान पटना PMCH में इलाज के दौरान हुई। शिकायतकर्ता का दावा है कि सोशल मीडिया पर उपलब्ध फेसबुक लाइव वीडियो में भरत तिवारी ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। इसके बावजूद पुलिस ने पैर में करीब से 4 गोलियां मारीं। शिकायत में इसे ‘हिरासत में हत्या’ और फर्जी मुठभेड़ बताया गया है।  
घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों और परिजनों ने आरा-बक्सर NH-84 पर चक्का जाम कर विरोध प्रदर्शन किया। जन-आक्रोश के बाद प्रशासन ने शाहपुर थाना प्रभारी को निलंबित कर दिया।  
अधिवक्ता विनय पांडेय ने शिकायत में संविधान के अनुच्छेद 21 यानी जीवन के अधिकार के हनन, न्यायपालिका के क्षेत्राधिकार के उल्लंघन और सुप्रीम कोर्ट के PUCL बनाम महाराष्ट्र राज्य मामले की गाइडलाइंस की अवहेलना का जिक्र किया है। गाइडलाइंस के अनुसार हर मुठभेड़ के बाद स्वतंत्र एजेंसी से जांच और मजिस्ट्रेट जांच अनिवार्य होती हैं । 
NHRC से प्रार्थना की गई है कि:  
मामले का स्वतः संज्ञान लिया जाए।  
बिहार के मुख्य सचिव और DGP से केस डायरी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट व वीडियो साक्ष्य मंगाए जाएं।  
पूरे प्रकरण की जांच CBI या CID जैसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए।  
दोषी पाए जाने पर शामिल पुलिसकर्मियों पर BNS की धारा 103 के तहत मुकदमा दर्ज हो और सेवा से बर्खास्तगी हो।  
पीड़ित परिवार को मानवाधिकार हन के एवज में उचित मुआवजा दिया जाए।
शिकायत के साथ समाचार पत्रों की कतरनें और सोशल मीडिया वीडियो के लिंक भी संलग्न किए गए हैं। पुलिस प्रशासन की ओर से अभी घटना के विस्तृत पक्ष पर आधिकारिक बयान नहीं आया है। NHRC द्वारा संज्ञान लेने के बाद ही मामले की दिशा तय होगी।

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