चीनी टिप्पणीकारों ने बीते दिनों भारत में युवाओं के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के सबसे बड़े राजनीतिक झटकों में से एक बताया.


उन्होंने इन प्रदर्शनों को भारत की शिक्षा व्यवस्था में युवाओं का घटता भरोसा बताया है.

इस मामले में चीन के प्रमुख सरकारी मीडिया ने ख़ुद को काफ़ी हद तक तथ्यात्मक रिपोर्टिंग तक सीमित रखा. लेकिन फुदान यूनिवर्सिटी के एक स्कॉलर ने तर्क दिया कि पीएम मोदी की आर्थिक नीतियां भारत के शिक्षित युवाओं के लिए अवसर पैदा करने में नाकाम रही हैं.

चीन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वीबो पर यूजर्स ने भी इन विरोध प्रदर्शनों को भारत की शिक्षा व्यवस्था और शासन की कमजोरियों को उजागर करने वाला बताया.

चीन के कुछ लोगों ने इसे एक भारतीय आलोचक के वीडियो पोस्ट करने के अवसर के रूप में भी इस्तेमाल किया.

नीट यूजी की प्रवेश परीक्षा का प्रश्न पत्र लीक होने के विरोध में और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में युवा दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जून से प्रदर्शन कर रहे थे.

इसके अलावा देशभर में भी कई जगह युवाओं ने प्रदर्शन किया था.

बाद में 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े के बाद सीजेपी का विरोध प्रदर्शन खत्म हुआ था.

चीनी टिप्पणीकारों ने भारत में हाल ही में देशभर में युवाओं के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों के पीछे युवाओं में बेरोज़गारी को लेकर व्यापक चिंताओं को वजह बताया.

इन प्रदर्शनों की वजह से धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा.

चीनी कमेंटेटर्स ने इसेके कार्यकाल का "सबसे बड़ा राजनीतिक झटका" कहा.

पीएम मोदी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका

नरेंद्र मोदी

भारत में विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने किया. इसकी शुरुआत नीट-यूजी की प्रवेश परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने के बाद शिक्षा मंत्री के इस्तीफ़े और अन्य शिक्षा सुधारों की मांग को लेकर हुई थी.

एक ऑनलाइन व्यंग्य के तौर पर बनी थी.

इस आंदोलन पर विस्तृत टिप्पणी में, दक्षिण एशियाई अध्ययन में विशेषज्ञता रखने वाले फुदान यूनिवर्सिटी की शोधकर्ताने 27 जुलाई को राष्ट्रवादी ख़बरों और कमेंट्स से जुड़ी वेबसाइट  पर की.

उन्होंने कहा कि यह "सत्ता में 12 वर्षों के दौरान भारत के प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) के लिए सबसे गंभीर राजनीतिक झटकों में से एक" बन गया है, जो उन्हें झेलना पड़ा है."

उनके मुताबिक़, "एक मजबूत राजनीतिक नेता का अधिकार अडिग रुख़ पर आधारित होता है. मोदी को झुकने के लिए मजबूर होना इस बात का संकेत है कि स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई है, जिससे यह विरोध प्रदर्शन उनके कार्यकाल के सबसे बड़े राजनीतिक झटकों में से एक बन गया है."

टिप्पणी में कहा गया कि यह संकट "सबसे पहले दिखाता है कि मोदी की आर्थिक विकास की नीतियां बड़ी संख्या में शिक्षित भारतीय युवाओं को अवसर देने में सक्षम नहीं हैं."

23 जुलाई को गुआनचा.सीएन की एक अन्य टिप्पणी में कहा गया, "भारत सरकार कॉकरोचों की भारी मौजूदगी का सामना कर 

इसमें कहा गया कि भारत ने सीजेपी के लगा दी और एक मंत्री ने उस पर "पाकिस्तान और भारत विरोधी समूहों का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश" करने का आरोप लगाया.

यह दिलचस्प है कि स्कॉलर ने एक्स पर लगाए गए प्रतिबंधों का ज़िक्र किया, जबकि चीन में एक्स उपलब्ध नहीं है.

इस बीच, सरकारी मान्यता प्राप्त समाचार वेबसाइट द पेपर के एक पॉडकास्ट में कहा गया कि  लाखों परीक्षा अभ्यर्थियों के लिए "व्यवस्थागत और धीमा ज़हर" है.

द पेपर के मुताबिक़ कॉकरोच का संकेत सीमित अवसरों का सामना कर रहे शिक्षित युवाओं की "अंतिम कोशिश और जीवित रहने की आवाज़" का प्रतिनिधित्व करता है.

समसामयिक मामलों की पत्रिका नानफेंगचुआंग (साउथ रिव्यूज़) ने भी 27 जुलाई को प्रकाशित, "जेन ज़ी का असंतोष केवल परीक्षा प्रश्नपत्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने मोदी सरकार के प्रति भारतीय समाज के सभी स्तरों पर व्यापक असंतोष को जन्म दिया."

 

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