ईको गार्डन में अभ्यर्थियों ने बुलंद की नियुक्ति की आवाज, कहा—आदेशों का अनुपालन कर वंचित अभ्यर्थियों को तत्काल दिया जाए न्याय


ईको गार्डन में अभ्यर्थियों ने बुलंद की नियुक्ति की आवाज, कहा—आदेशों का अनुपालन कर वंचित अभ्यर्थियों को तत्काल दिया जाए न्याय

 

लखनऊ। 68500 शिक्षक भर्ती में आरक्षण संबंधी अनियमितताओं के आरोपों को लेकर अभ्यर्थियों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। आरक्षण बचाओ मोर्चा के बैनर तले राजधानी लखनऊ के ईको गार्डन में चल रहा महाआंदोलन सोमवार को सातवें दिन भी जारी रहा। बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने धरना-प्रदर्शन कर सरकार से भर्ती प्रक्रिया में वंचित अभ्यर्थियों को न्याय देने और लंबित मांगों का शीघ्र समाधान किए जाने की मांग उठाई।

आंदोलनकारियों का कहना है कि 68500 शिक्षक भर्ती में आरक्षण से जुड़े मुद्दे को लेकर अभ्यर्थी वर्ष 2018 से लगातार संघर्ष कर रहे हैं। अभ्यर्थियों ने दावा किया कि भर्ती में अभी भी बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं और इनमें करीब 9 हजार पद ओबीसी वर्ग के रिक्त होने की बात कही गई है। उनका आरोप है कि यदि सरकार सकारात्मक निर्णय लेते हुए संबंधित आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करे तो लंबे समय से संघर्षरत अभ्यर्थियों को न्याय मिल सकता है।

5 प्रतिशत उत्तीर्णांक छूट की मांग
आरक्षण बचाओ मोर्चा ने अपनी प्रमुख मांगों में 68500 शिक्षक भर्ती में उत्तीर्णांक में पांच प्रतिशत की छूट दिए जाने की मांग की है। आंदोलनकारियों के अनुसार, उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के 7 जुलाई 2026 के आदेश तथा राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के आदेशों का अनुपालन करते हुए पूर्णांक 150 में से 60 अथवा उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले वंचित वर्ग के अभ्यर्थियों का परिणाम अपडेट किया जाए।

मोर्चा ने मांग की कि पात्र पाए जाने वाले ओबीसी, दिव्यांग, भूतपूर्व सैनिक तथा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित वर्ग के अभ्यर्थियों को परिणाम संशोधन के बाद अविलंब नियुक्ति पत्र जारी किए जाएं। साथ ही विभिन्न भर्तियों में आरक्षण से संबंधित उठ रहे विवादों का स्थायी एवं सकारात्मक समाधान करने की मांग भी की गई।

नियुक्ति का शेड्यूल जारी होने तक जारी रहेगा आंदोलन
आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार की ओर से नियुक्ति के लिए ठोस कार्ययोजना और शेड्यूल जारी नहीं किया जाता, तब तक महाआंदोलन जारी रहेगा। अभ्यर्थियों ने कहा कि वे लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं और अब आश्वासन के बजाय ठोस कार्रवाई चाहते हैं।

प्रदर्शन के दौरान ध्यान तुम्हारा वोट पर—शिक्षक क्यों हैं रोड पर, आरक्षण घोटाला नहीं चलेगा और नहीं चलेगा, नहीं चलेगा जैसे नारे गूंजते रहे। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांगों पर शीघ्र निर्णय लेकर गतिरोध समाप्त करने की अपील की।

आरक्षण न्यायिक निगरानी आयोग के गठन की मांग
मोर्चा ने भविष्य में विभिन्न सरकारी भर्तियों में आरक्षण से जुड़े विवादों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आरक्षण न्यायिक निगरानी आयोग के तत्काल गठन की भी मांग उठाई। आंदोलनकारियों का कहना है कि पारदर्शी और निष्पक्ष भर्ती व्यवस्था के लिए आरक्षण संबंधी मामलों की प्रभावी निगरानी आवश्यक है, ताकि किसी भी वर्ग के अभ्यर्थियों के अधिकार प्रभावित न हों।

सरकार पर अधिकारियों के माध्यम से गुमराह किए जाने का आरोप
आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि 68500 शिक्षक भर्ती के मामले में अधिकारियों की ओर से सरकार को सही स्थिति से अवगत नहीं कराया जा रहा है, जिसके कारण समस्या का समाधान लंबित है। अभ्यर्थियों ने कहा कि सरकार यदि इच्छाशक्ति के साथ मामले में हस्तक्षेप करे तो सकारात्मक समाधान निकाला जा सकता है।

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि शीघ्र न्याय नहीं मिला तो आंदोलन को प्रदेश के अन्य हिस्सों तक ले जाकर जन-जन तक पहुंचाया जाएगा। अभ्यर्थियों का कहना है कि उनका संघर्ष किसी एक व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और आरक्षण के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए है।

सामाजिक संगठनों ने दिया समर्थन
महाआंदोलन के सातवें दिन विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भी आंदोलन को समर्थन दिया। प्रदर्शन में युवाओं और अभ्यर्थियों ने एकजुट होकर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की। आंदोलनकारियों ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर समय रहते सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।

आंदोलन का नेतृत्व आशुतोष वर्मा, तूफान सिंह, अखिल कुमार और नवीन चौधरी ने किया। इस दौरान भूपेंद्र बालियान, उत्कर्ष सिंह, नसीम फरीदी, रंजना जायसवाल, रिपुदमन पटेल, राजेंद्र प्रसाद वर्मा सहित बड़ी संख्या में अभ्यर्थी मौजूद रहे।

आंदोलनकारियों ने सरकार से मांग की कि 68500 शिक्षक भर्ती से जुड़े आरक्षण के मुद्दे पर शीघ्र निर्णय लेते हुए पात्र वंचित अभ्यर्थियों को नियुक्ति का अवसर दिया जाए और भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो, इसके लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था लागू की जाए। अभ्यर्थियों ने दोहराया कि न्याय मिलने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

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