भारत और रूस के बीच लंबे समय से चली आ रही रक्षा साझेदारी को BRICS समिट के दौरान नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है. इसी कड़ी में भारतीय वायुसेना के Su-30MKI लड़ाकू विमानों को रूसी RVV-BD लॉन्ग रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल से लैस करने का प्रस्ताव अहम बन गया है. दिल्ली में पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच मुलाकात पर सभी की नजर रहेगी.
करीब 300 किलोमीटर तक मार करने वाली RVV-BD को Su-30MKI के साथ इंटीग्रेट करने के लिए जरूरी तकनीकी बदलावों पर विचार किया जा रहा है. अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो भारतीय वायुसेना की लंबी दूरी की BVR यानी Beyond Visual Range एयर कॉम्बैट क्षमता में बड़ा इजाफा हो सकता है.
दिल्ली में मोदी-पुतिन की मुलाकात पर नजर
BRICS समिट इस बार दिल्ली में हो रहा है. यह समिट भारत और रूस दोनों के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम है. समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच द्विपक्षीय मुलाकात में रक्षा सहयोग भी प्रमुख मुद्दों में शामिल हो सकता है. दिल्ली में यह मुलाकात 11 सितंबर को होने की बात कही गई है.
सूत्रों के मुताबिक ऐसे में Su-30MKI के लिए RVV-BD का प्रस्ताव भारत-रूस रक्षा सहयोग के एजेंडे में अहम जगह बना सकता है. इसे लेकर दोनों देशों के शीर्ष नेताओं और अधिकारियों के बीच चर्चा संभव है. हालांकि, अभी इसे संभावित डील के तौर पर देखा जा रहा है और अंतिम मंजूरी या करार होना अभी बाकी है.
AWACS-टैंकर विमान हो सकते हैं निशाने पर
RVV-BD को रूस की R-37M मिसाइल का एक्सपोर्ट वर्जन माना जाता है. इसकी रेंज करीब 300 किलोमीटर तक बताई जाती है और इसकी अधिकतम गति करीब Mach 6 होने का दावा किया जाता है.
इस तरह की लंबी दूरी की मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह दुश्मन के सामान्य लड़ाकू विमानों के अलावा AWACS, AEW&C, एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग टैंकर और निगरानी विमानों जैसे हाई-वैल्यू एयरक्राफ्ट को भी निशाना बनाने की क्षमता देती है.
Su-30MKI बनेगा और ज्यादा खतरनाक
260 से ज्यादा विमानों के साथ Su-30MKI भारतीय वायुसेना के लड़ाकू बेड़े की रीढ़ है. भारत इन विमानों को नए रडार, एवियोनिक्स और सेंसर से अपग्रेड करने पर भी काम कर रहा है. RVV-BD को शामिल करने से इन अपग्रेडेड Su-30MKI की दूर से दुश्मन के एयरक्राफ्ट को पहचानने और निशाना बनाने की क्षमता का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकेगा.
रूस से डील, स्वदेशी अस्त्र पर भी फोकस
जहां भारत रूस से लंबी दूरी की मिसाइल लेने की संभावना पर विचार कर रहा है, तो साथ ही स्वदेशी विकल्पों पर भी तेजी से काम चल रहा है. DRDO की अस्त्र मिसाइल सीरीज को लगातार विकसित किया जा रहा है और भविष्य में ज्यादा लंबी दूरी के एयर-टू-एयर हथियार भारत की अपनी जरूरत पूरी कर सकते हैं.
तो क्या BRICS के बाद डील आगे बढ़ेगी?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या BRICS समिट के दौरान मोदी-पुतिन मुलाकात के बाद Su-30MKI के लिए RVV-BD डील आगे बढ़ेगी? अगर भारत इस प्रस्ताव को मंजूरी देता है और रूस के साथ कीमत, तकनीकी इंटीग्रेशन और सप्लाई से जुड़े मुद्दों पर सहमति बनती है, तो Su-30MKI को लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइल से लैस करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा सकता है.
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