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अमेठी के सरुवांवा ग्राम के एक गरीब परिवार की स्थिति इन योजनाओं की जमीनी हकीकत पर सवाल उठा रही है। बारिश में कच्चा मकान ढहने के बाद राम अक्षयवर मौर्य का परिवार अब टिन और फूस के अस्थायी छप्पर के नीचे रहने को मजबूर है राम अक्षयवर मौर्य मजदूरी कर अपनी पत्नी गुड़िया और चार बच्चों पिहू (8) अर्पिता  6.5  कार्तिक (4) और सात माह की काव्या का गुजारा करते हैं। परिवार के मुताबिक करीब आठ साल पहले पारिवारिक बंटवारे में उन्हें एक कच्चा कमरा मिला था करीब सात दिन पहले बारिश में वह कमरा ढह गया। इसके बाद परिवार ने कच्ची दीवारों के सहारे टिन और घास फूस का अस्थायी छप्पर बना लिया है परिवार का कहना है कि कुल पैतृक संपत्ति करीब आठ बिस्वा है लेकिन इसमें माता और छोटे भाई का भी हिस्सा है। ऐसे में परिवार के पास रहने के लिए पक्का मकान नहीं है। परिवार को राशन और उज्ज्वला गैस कनेक्शन भी नहीं मिला है ग्राम पंचायत सचिव जया पटेल ने बताया कि गुड़िया का नाम प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की लिस्ट में है। ऐसे में सवाल है कि परिवार को पक्के मकान का लाभ कब मिलेगा परिवार ने लेखपाल विजय पाल को मकान गिरने की जानकारी दी है। लेखपाल ने मौके पर जाकर जांच करने और रिपोर्ट बड़े अधिकारियों को भेजने का भरोसा दिया है ग्रामीण जितेंद्र मौर्य घेरराऊ कोरी रामबली मौर्य और लाल बहादुर सिंह ने प्रशासन से मौके पर जांच कर परिवार को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की मांग की है जीरो पावर्टी अभियान का मकसद सबसे गरीब और जरूरतमंद परिवारों को सरकारी योजनाओं से जोड़ना है ग्रामीणों का कहना है कि इस परिवार की वास्तविक स्थिति का भी गंभीरता से आकलन होना चाहिए ताकि उन्हें समय पर मदद मिल सके

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