डॉ. अनवर का अस्थायी क्लिनिक पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के रावलाकोट शहर में मुख्य विरोध प्रदर्शन स्थल से कुछ ही दूरी पर स्थित है.
एक अतिरिक्त बेडरूम चिकित्सा सामग्री रखने के लिए अलमारी के रूप में इस्तेमाल होता है, और बाहर लाल तिरपाल से ढका एक बिस्तर है.
बिस्तर पर शफ़क़त हुसैन लेटे हुए हैं. हुसैन के सीने में गोली लगी है. जिस चादर पर वह लेटे हैं, वह पहले से ही घायल हुए लोगों के ख़ून से सनी हुई है. वह मरणासन्न हैं.
पिछले दो महीनों में, सुरक्षा अधिकारियों और जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के बीच झड़पों में पूरे इलाके में दर्जनों लोग मारे गए हैं.
40 वर्ष से अधिक आयु के बहुत कम मरीज़ देखे
45 लाख की आबादी वाले इस इलाक़े में इस समय चुनाव हो रहे हैं.
बीबीसी रावलाकोट में प्रवेश पाने वाला और विरोध प्रदर्शनों के केंद्र में मौजूद लोगों से बात करने वाला पहला मीडिया संगठन है.
डॉ. अनवर समेत जिन लोगों से इस रिपोर्ट के लिए हमने बात की, उनकी पहचान सुरक्षित रखने के लिए उनका नाम बदल दिया है.
उन्होंने बीबीसी को बताया, "हमारे पास प्राथमिक इलाज देने लायक सामान है. हम ख़ून बहना रोक सकते हैं, घाव साफ करके पट्टी कर सकते हैं और शरीर में कम गहराई तक गई गोली निकाल सकते हैं. लेकिन जिन लोगों के सीने, पेट, सिर या शरीर के दूसरे अहम अंगों में गंभीर चोट है, उन्हें बड़े अस्पताल में इलाज की ज़रूरत होती है."
अनवर आगे कहते हैं, "अगर एक ही समय में इतने सारे मरीज़ आ जाएं तो बड़े-बड़े अस्पतालों को भी परेशानी होगी."
डॉक्टर का कहना है कि 27 जुलाई से क्लिनिक में लगभग 50 से 60 गंभीर रूप से घायल मरीज़ों का इलाज किया गया है, और उन्होंने ख़ुद से गोली लगने से घायल 15 से 20 लोगों का इलाज किया है.
प्रदर्शनकारी मुख्य अस्पताल जाने से डर रहे हैं क्योंकि उन्हें डर है कि उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा या गोली मार दी जाएगी. अधिकारियों ने इस दावे को गलत बताया है.
डॉक्टर अनवर कहते हैं, "जिन लोगों की मृत्यु हुई है या जो गंभीर रूप से घायल हुए हैं, उनमें से अधिकांश 15-16 वर्ष से लेकर 32-35 वर्ष की आयु के युवा हैं. मैंने 40 वर्ष से अधिक आयु के बहुत कम मरीज़ देखे हैं."अनवर आगे कहते हैं, "अगर एक ही समय में इतने सारे मरीज़ आ जाएं तो बड़े-बड़े अस्पतालों को भी परेशानी होगी."
डॉक्टर का कहना है कि 27 जुलाई से क्लिनिक में लगभग 50 से 60 गंभीर रूप से घायल मरीज़ों का इलाज किया गया है, और उन्होंने ख़ुद से गोली लगने से घायल 15 से 20 लोगों का इलाज किया है.
प्रदर्शनकारी मुख्य अस्पताल जाने से डर रहे हैं क्योंकि उन्हें डर है कि उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा या गोली मार दी जाएगी. अधिकारियों ने इस दावे को गलत बताया है.
डॉक्टर अनवर कहते हैं, "जिन लोगों की मृत्यु हुई है या जो गंभीर रूप से घायल हुए हैं, उनमें से अधिकांश 15-16 वर्ष से लेकर 32-35 वर्ष की आयु के युवा हैं. मैंने 40 वर्ष से अधिक आयु के बहुत कम मरीज़ देखे हैं."
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