*रेत से भरे ट्रैक्टर से युवक की मौत, पत्नी गंभीर रूप से घायल*
*लांजी थानांतर्गत मोहारा गांव में दर्दनाक हादसा, सिर पर इतनी भीषण चोट कि सड़क पर बिखर गया भेजा*
लांजी। अवैध रेत परिवहन का खूनी खेल एक और परिवार को जिंदगीभर का दर्द दे गया। ग्राम मोहारा के भुआ रोड पर 15 मई शुक्रवार की देर रात लगभग 10:30 बजे हुए दर्दनाक सड़क हादसे में भानेगांव निवासी 35 वर्षीय दुर्गाप्रसाद पिता कन्हैयालाल ठाकरे की दर्दनाक मौत हो गई। हादसा इतना भयावह था कि मृतक के सिर में जबरदस्त चोट लगने से उसका भेजा बाहर निकलकर सड़क पर बिखर गया। इस हृदयविदारक दृश्य को जिसने भी देखा उसकी रूह कांप उठी। बताया जा रहा है कि दुर्गाप्रसाद अपनी पत्नी पुस्तकला ठाकरे उम्र 30 वर्ष, पुत्र उज्जवल उम्र 12 वर्ष एवं पुत्री सुहानी उम्र 14 वर्ष के साथ भुआ से रिश्तेदारी की शादी में शामिल होकर मोटर साइकिल से वापस अपने गांव भानेगांव लौट रहा था। इसी दौरान मोहारा गांव के भुआ रोड पर कथित रूप से रेत से भरे तेज रफ्तार अज्ञात ट्रैक्टर ने उनकी मोटर साइकिल को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे के बाद ट्रैक्टर चालक वाहन सहित फरार हो गया। दुर्गाप्रसाद आंध्रप्रदेश में अपने रिश्तेदारों के साथ रहकर मिस्त्री का काम करता था। वह लगभग पंद्रह दिन पहले ही गांव आया था ताकि रिश्तेदारी की शादी में शामिल हो सके, मगर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। एक पल में बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया और पत्नी की मांग का सिंदूर उजड़ गया।हादसे में पत्नी पुस्तकला ठाकरे का हाथ टूट गया, जिसे बेहतर इलाज के भानेगांव के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से बालाघाट रिफर किया गया है, जबकि दोनों बच्चों को मामूली चोटें आई हैं। घटना के बाद मासूम बेटे उज्जवल ने फोन पर अपने मामा अखिल को हादसे की जानकारी दी, जिसके बाद परिजन घटनास्थल पहुंचे। सूचना मिलते ही 112 डायल और 108 एंबुलेंस मौके पर पहुंची तथा घायलों और मृतक को सिविल अस्पताल लांजी लाया गया। अस्पताल में शव को मर्चुरी में रखा गया है। देर रात पुलिस अमला भी अस्पताल पहुंचा और मामले की जानकारी जुटाई। मृतक का ससुराल नंदोरा घोटी में बताया जा रहा है। परिवार में दो भाई और एक बहन हैं, जिनमें दुर्गाप्रसाद सबसे बड़ा था। उसकी मौत के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। घटना के बाद भानेगांव सहित आसपास के ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में रातभर अवैध रूप से रेत से भरे ट्रैक्टर बेखौफ दौड़ते हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंख मूंदकर बैठे हैं। लोगों का कहना है कि प्रशासन की कार्रवाई केवल चालान काटने तक सीमित है, जिसके कारण रेत माफियाओं के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं। लोगों का कहना था कि क्या प्रशासन फिर केवल औपचारिक कार्यवाही कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल देगा या इन अवैध रेत परिवहन करने वालों पर ऐसी कठोर कार्रवाई होगी जिससे भविष्य में किसी और मासूम बच्चे के सिर से पिता का साया न उठे। क्षेत्र में लगातार बढ़ती सड़क दुर्घटनाएं और अवैध रेत परिवहन का आतंक अब आम लोगों के लिए जानलेवा बनता जा रहा है, मगर जिम्मेदारों की खामोशी लोगों के गुस्से को और बढ़ा रही है। मृतक का पोस्टमार्टम 16 मई की सुबह किया जाएगा।
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