रिपोर्ट मंगल धुर्वे /लोकेशन खंडवा





ये मामला खंडवा धनगाव थाने के एक किसान का अपनी जमीन के हक के लिए आवाज उठाना गुनाह है? खंडवा जिले के सुलगांव क्षेत्र से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है।
​आज माँ पेट्रोलियम, घोसली के पास उस समय हड़कंप मच गया जब पुलिस ने एक अकेली विधवा महिला किसान, तुलशबाई को पुलिस की गाड़ी में बैठा लिया। तुलशबाई वही महिला हैं, जो लंबे समय से अपने खेत में लगने वाली हाइटेंशन लाइन के टावर और अधिग्रहित की जा रही अपनी जमीन के खिलाफ संघर्ष कर रही हैं।"

​ एक अकेली विधवा महिला, जो केवल अपने अधिकारों और जीविका की रक्षा के लिए लड़ रही है, उसे इस तरह पुलिस वाहन में बैठाने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
​संवाद बनाम दबाव: किसानों की समस्याओं का समाधान टेबल पर बैठकर, संवाद के जरिए निकाला जाना चाहिए। लेकिन, यहां प्रशासन द्वारा डराने और धमकाने का जो माहौल बनाया जा रहा है, वह बेहद निंदनीय है।
​निमाड़ का संघर्ष: निमाड़ की धरती पर किसान अपनी अस्मिता के लिए लड़ रहा है। इस संघर्ष में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी यह दर्शाती है कि यह लड़ाई केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे किसान समाज की है।
​प्रशासन से अपील: प्रशासन को यह समझना होगा कि वर्दी का रौब दिखाकर किसानों की आवाज को कुचला नहीं जा सकता। उन्हें सुनने की जरूरत है, न कि उन्हें प्रताड़ित करने की।

"किसान सम्मान की बात करता है, लेकिन आज उसे अपमानित किया जा रहा है। तुलशबाई का संघर्ष केवल एक जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि उनकी आजीविका और अस्तित्व का प्रश्न है। हम उम्मीद करते हैं कि प्रशासन अपनी कार्यशैली में सुधार करेगा और एक निष्पक्ष व मानवीय दृष्टिकोण अपनाएगा।
​किसान की आवाज को दबाना बंद करें, क्योंकि उनकी चुप्पी ही आने वाले बड़े जन-आंदोलन का संकेत हो सकती

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