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कन्नौज।
आमोद कुमार
बाँदा। चिकित्सा जगत में बाँदा के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि सामने आई है। रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने एक ऐसे गंभीर रूप से घायल मरीज की सफल सर्जरी कर उसकी जान बचा ली, जिसकी चोटों को देखकर बचने की संभावना बेहद कम मानी जा रही थी। डॉक्टरों के अनुसार यह उनके लंबे कार्यकाल की सबसे जटिल और बड़ी सर्जरी रही।
बबेरू थाना क्षेत्र के भदेदु गांव निवासी 49 वर्षीय कल्लू प्रजापति मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। 2 जून को वह हैंड आरा मशीन लेकर पेड़ काटने का काम कर रहे थे। इसी दौरान पेड़ की एक भारी डाल उनके ऊपर गिर गई। संतुलन बिगड़ने से वह मशीन समेत नीचे गिर पड़े और आरा मशीन का ब्लेड उनके सीने और पेट में गहराई तक धंस गया।
हादसे में मरीज का सीना बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। तीन पसलियां कट गईं, चेस्ट कैविटी खुल गई, खाने की नली (फूड पाइप) दो स्थानों से कट गई, तिल्ली और बड़ी आंत गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गईं। पेट के अंगों को सुरक्षित रखने वाली ओमेंटम झिल्ली तथा बायां डायाफ्राम भी कट गया। इतनी गंभीर स्थिति में मरीज को तत्काल रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज लाया गया।मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ सर्जन डॉ. आर.सी. अरुण के नेतृत्व में चिकित्सकों की टीम ने करीब तीन से चार घंटे तक चले ऑपरेशन में एक-एक अंग को सावधानीपूर्वक ठीक किया। कठिन परिस्थितियों और जटिल चोटों के बावजूद सर्जरी सफल रही और मरीज की जान बच गई।पिछले आठ दिनों से मरीज आईसीयू में भर्ती रहा। चिकित्सकीय निगरानी और उपचार के बाद अब उसकी हालत में उल्लेखनीय सुधार है और वह खाने-पीने की स्थिति में पहुंच गया है।डॉ. आर.सी. अरुण ने बताया कि बाँदा जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में लगभग 17-18 वर्षों की सेवा के दौरान उन्होंने अनेक जटिल ऑपरेशन किए हैं, लेकिन इतनी व्यापक और गंभीर चोटों वाले मरीज की यह पहली सफल सर्जरी है। उनके अनुसार यदि यही उपचार किसी निजी अस्पताल में कराया जाता तो मरीज के परिजनों को लाखों रुपये खर्च करने पड़ते, जबकि मेडिकल कॉलेज में सरकारी शुल्क पर ही पूरा उपचार संभव हो सका।
मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. एस.के. कौशल ने इस उपलब्धि को न केवल बाँदा बल्कि पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए गौरव का विषय बताया। उन्होंने कहा कि इतनी जटिल सर्जरी का सफल होना मेडिकल कॉलेज की चिकित्सकीय क्षमता और टीमवर्क का प्रमाण है।इस ऐतिहासिक ऑपरेशन में डॉ. आर.सी. अरुण के साथ डॉ. तन्मय अग्रवाल, डॉ. यशराज छिल्लर, डॉ. पुष्पम तथा एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. पंकज, डॉ. विनीत और डॉ. अजीत सहित पैरामेडिकल और ओटी स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही।यह केवल एक सफल ऑपरेशन नहीं, बल्कि आधुनिक चिकित्सा, चिकित्सकों की दक्षता और समय पर मिले सरकारी स्वास्थ्य उपचार की ऐसी मिसाल है, जिसने मौत के मुहाने पर खड़े एक व्यक्ति को नया जीवन दे दिया।
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