भूखे मवेशी गौशाला में तड़प तड़प कर तोड़ रहे दम_कोई नहीं ले रहा सुध
भूखे मवेशी गौशाला में तड़प तड़प कर तोड़ रहे दम_कोई नहीं ले रहा सुध
डॉक्टर की उदासीनता का सबब बनती जा रही थानगांव गौशाला
कोथावां/हरदोई_उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार आने के बाद गौ हत्या पर रोक लगाई गई थी।लेकिन ग्राम पंचायतों में बनी गौशालाओ में हरा चारा न मिलने के कारण गौवंश की मौतें हो रही है।करोड़ों खर्च करने के बाद भी ग्राम पंचायतों में गायों की रक्षा नहीं हो पा रही है जिसके चलते ग्राम पंचायत में सूखा भूसा मिलने के कारण गौवंश तड़प तड़प कर मरने को मजबूर हैं।विस्तार पूर्वक बता दें कि कोथावां की ग्राम पंचायत थानगांव इस्थित गौशाला में मौजूद 165 गौवंशो में तीन गौवंश मृत पाए गए।सूखा भूसा खाकर गौवंश की हालत खराब हो रही है,तथा गौशाला में करीब आधा दर्जन गाय भूखी ही तड़प रही है। गौशाला में गायों को हरा चारा नहीं मिल रहा है।जिससे गाय सूखा भूसा खाने को मजबूर है।वही इस मामले में गौशाला के कर्मचारी मिंजा पुत्र हेमनाथ से बात की गई तो उसने बताया कि गौशाला में पिछले कई महीनों से हरा चारा नहीं आया है।जिस कारण सभी गायों को सूखा भूसा खिलाया जा रहा है।जिससे उनकी हालत खराब हो रही है।गौशाला में बनी चन्नी पूरी तरह से साफ नजर आई जिनमें कहीं भी भूसा दिखाई नहीं दिया।भूखे गौवंश गोशाला परिश्रम में घूम-घूम कर जमीन पर पड़े भूसे की जगह पर मिट्टी को चाटने पर मजबूर है।ग्राम प्रधान दिनेश कुमार द्वारा बताया गया कि गौशाला में 130 गोवंश है जिनके चारे पानी के लिए सरकार द्वारा केवल प्रतिदिन 30 रूपए दिए जाते हैं जिसमें उनका खाना पीना पूरी तरह से नहीं हो पाता है।जबकि 12 रूपए प्रति किलो भूसा ही मिलता है।हरे चारे की बुवाई करा दी गई है।गौशाला में पशु चिकित्सकों के आवागमन संबंधी वार्ता पर उनके द्वारा बताया गया कि पशु चिकित्सक बराबर आते रहते हैं इस बार ट्रांसफर पोस्टिंग के चलते जल्दी नहीं आ पाए हैं।फोन वार्ता के दौरान पशु चिकित्सक विजय जायसवाल द्वारा कहा गया कि मैं मीटिंग में हूं मेरे पैरावेट संदीप कुमार बराबर गौशाला में राउंड करते हैं।जबकि गाैशाला की देखरेख करने वाले के अनुसार कोई भी चिकित्सक बीते दो हफ्तों से गौशाला में आया ही नहीं।ग्राम पंचायत अधिकारी राजा राम के अनुसार वह गौशाला गए थे तब उन्हें कोई भी गौवंश मृत अवस्था में नहीं मिले।अगर स्थितियां खराब है तो उन्हें जल्द सुधारा जाएगा।एक तरफ तो योगी सरकार बेसहारा गोवंश को हर संभव मदद दिलाने की पुरजोर कोशिश कर रही है,लेकिन सरकार के कर्मचारी ही सरकार की योजनाओं को पलीता लगाते नजर आ रहे हैं।सरकार द्वारा गौवंश की मदद के लिए दी जा रही धनराशि का सही इस्तेमाल नहीं होने से सरकारी कर्मचारी ही सरकार की फजीहत कराने पर तुले हैं।योगी सरकार में गौशाला को मिलता फंड कहां जा रहा है?योगी सरकार में गायों की देखरेख के लिए सरकार द्वारा अलग ही नियम बनाए गए हैं।जिसमें प्रत्येक गौवंश को सरकार की ओर से करीब 30 रु प्रत्येक दिन धनराशि दी जाती है।लेकिन गौशाला में पशुओं को केवल सूखा भूसा ही मिल रहा है।जिससे उनकी हालत खराब हो रही है।अब देखना यह होगा कि ग्राम पंचायत थान गांव वा विकासखंड कोथावां के अधिकारियों की गोवंशों के प्रति हीला हवाली कब तक चलती है।और यह भी देखना होगा योगी सरकार कर्मचारी व अधिकारियों पर किस तरह की कार्यवाही करते है।गौ माता के नाम पर बनी सरकार और सरकार के नुमाइंदे गौशाला में बीमार वह भूखी मर रही गायों के प्रति कितना सजग हैं।
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