???? कर्मचारियों की शिकायतों ने उठाए सवाल: सीवरेज पंपिंग स्टेशनों पर वेतन और ITI प्रमाणपत्रों की जांच की मांग
लखनऊ। राजधानी लखनऊ में सीवरेज व्यवस्था के संचालन और रखरखाव को लेकर कर्मचारियों की शिकायतों ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि सीवरेज पंपिंग स्टेशनों पर तैनात ऑपरेटरों के वेतन में अंतर है और कुछ कर्मचारियों द्वारा लगाए गए ITI प्रमाणपत्रों की प्रामाणिकता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
लखनऊ की सीवरेज व्यवस्था में निजी एजेंसी SUEZ India Pvt. Ltd. की महत्वपूर्ण भूमिका है। SUEZ के अनुसार, लखनऊ में उसे शहर के सीवर नेटवर्क और वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट से संबंधित 10 वर्ष के संचालन एवं रखरखाव का अनुबंध मिला था। � सरकारी दस्तावेज में भी लखनऊ के सीवरेज इंफ्रास्ट्रक्चर के संचालन एवं रखरखाव के लिए SUEZ India का उल्लेख मिलता है।
कर्मचारियों का आरोप—समान काम, अलग-अलग वेतन
पंपिंग स्टेशनों पर कार्यरत कुछ ऑपरेटरों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उन्हें अपेक्षाकृत कम वेतन मिल रहा है। वहीं, उनके अनुसार कुछ अन्य कर्मचारियों को अधिक वेतन दिया जा रहा है।
शिकायत करने वाले कर्मचारियों का सबसे गंभीर आरोप यह है कि कुछ कर्मचारियों द्वारा कथित रूप से फर्जी ITI प्रमाणपत्र लगाकर नौकरी हासिल की गई है, जबकि जिन कर्मचारियों के पास वास्तविक/मूल ITI प्रमाणपत्र हैं, उन्हें कम वेतन मिल रहा है।
हालांकि, इन प्रमाणपत्रों के फर्जी होने की स्वतंत्र पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है। इसलिए इस मामले में संबंधित ITI संस्थानों, प्रमाणपत्र जारी करने वाली संस्था तथा कंपनी के नियुक्ति रिकॉर्ड से जांच कराना आवश्यक है।
मैनेजर के जवाब से भी उठे सवाल
कर्मचारियों के मुताबिक जब इस संबंध में कंपनी के मैनेजर नदीम मिर्जा से सवाल किया गया तो उनका कथित जवाब था कि जिन कर्मचारियों को अधिक वेतन मिल रहा है, उनके कंपनी में पांच वर्ष पूरे हो चुके हैं, जबकि कम वेतन पाने वाले कर्मचारियों के पांच वर्ष अभी पूरे नहीं हुए हैं।
अब कर्मचारियों का सवाल है कि यदि वेतन में अंतर का आधार केवल सेवा अवधि है तो कंपनी की वेतन नीति, नियुक्ति पत्र, सर्विस रिकॉर्ड और वेतन संरचना सभी कर्मचारियों के लिए स्पष्ट रूप से सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती? साथ ही, यदि किसी कर्मचारी ने गलत या फर्जी शैक्षिक/तकनीकी प्रमाणपत्र लगाया है तो उसकी जांच क्यों नहीं कराई जा रही?
और संबंधित एजेंसी की भूमिका पर जांच की मांग
मामले में कर्मचारियों ने जलकल विभाग, नगर निगम लखनऊ और संबंधित उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। कर्मचारियों की मांग है कि—
सभी ऑपरेटरों के ITI प्रमाणपत्रों का संबंधित संस्थानों से सत्यापन कराया जाए।
नियुक्ति के समय जमा किए गए दस्तावेजों की जांच हो।
प्रत्येक कर्मचारी की नियुक्ति तिथि और सेवा अवधि की जांच की जाए।
समान पद पर कार्यरत कर्मचारियों की वेतन संरचना की समीक्षा हो।
वेतन में अंतर का आधार लिखित रूप में स्पष्ट किया जाए।
यदि किसी कर्मचारी का प्रमाणपत्र फर्जी पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
कंपनी और संबंधित एजेंसी के मानव संसाधन रिकॉर्ड का ऑडिट कराया जाए।
कर्मचारियों की शिकायतों पर जलकल विभाग द्वारा रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
क्या 32 पंपिंग स्टेशन और Marvtech की जिम्मेदारी की भी जांच होगी?
कर्मचारियों द्वारा यह भी दावा किया गया है कि लखनऊ में 32 सीवरेज पंपिंग स्टेशनों की जिम्मेदारी Marvtech Integrated LLP को दी गई है। सार्वजनिक स्रोतों से Marvtech Integrated LLP के अस्तित्व और उसके सक्रिय LLP होने की जानकारी मिलती है, लेकिन मुझे उपलब्ध विश्वसनीय सार्वजनिक स्रोत में लखनऊ के 32 पंपिंग स्टेशनों का संचालन इसी कंपनी को दिए जाने की पुष्टि नहीं मिली। इसलिए इस बिंदु की पुष्टि संबंधित अनुबंध/वर्क ऑर्डर से किया जाना जरूरी है।
सबसे बड़ा सवाल
यदि कर्मचारियों के आरोप सही पाए जाते हैं तो सवाल उठता है कि एक ही प्रकार का कार्य करने वाले कर्मचारियों के वेतन में अंतर का वास्तविक आधार क्या है और नियुक्ति के दौरान जमा किए गए ITI प्रमाणपत्रों का सत्यापन किस स्तर पर किया गया?
मामले में SUEZ India Pvt. Ltd., Marvtech Integrated LLP, जलकल विभाग एवं नगर निगम लखनऊ का पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा। संबंधित कंपनियों और अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष मिलने के बाद खबर को और संतुलित एवं तथ्यात्मक रूप से अपडेट किया जा सकता है।
अब तक टीवी के लिए — विशेष रिपोर्ट, लखनऊ।
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