बांदा में जुए का साम्राज्य! युवाओं की जिंदगी दांव पर, जुआ माफिया की चांदी : शालिनी सिंह पटेल
आमोद कुमार
बांदा में जुए का कथित कारोबार अब शहर की गलियों से निकलकर कस्बों और गांवों तक अपनी जड़ें फैलाने के आरोपों से घिरा है। बबेरू, कमासिन, पैलानी, तिंदवारी और नरैनी तक जुए के अड्डे संचालित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। सवाल यह है कि आखिर कानून के लंबे हाथ इन कथित जुआ कारोबारियों तक पहुंचने में इतने छोटे क्यों पड़ रहे हैं?
जनता दल यूनाइटेड की प्रदेश उपाध्यक्ष एवं बुंदेलखंड संगठन प्रभारी शालिनी सिंह पटेल ने पुलिस प्रशासन को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि जुए का यह अवैध कारोबार युवाओं की मेहनत, परिवारों की जमा-पूंजी और घरों की खुशियां निगल रहा है। जुए में पहले पैसा हारता है, फिर इंसान कर्ज में डूबता है और अंततः कई परिवार अपनी जमीन-जायदाद तक गंवाने की नौबत में पहुंच जाते हैं।उन्होंने आरोप लगाया कि इस कथित कारोबार में कुछ राजनीतिक रसूखदारों की भूमिका की भी शिकायतें हैं। जुआ खिलाने के साथ ब्याज पर पैसा उपलब्ध कराने और फिर कर्ज वसूली के नाम पर जमीनों पर कब्जे तथा रजिस्ट्री कराने जैसे गंभीर आरोप भी सामने आए हैं। यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है तो यह महज जुआ नहीं, बल्कि गरीबों की मजबूरी का सुनियोजित आर्थिक शोषण है।विडंबना देखिए, एक तरफ कथित जुआ कारोबार से परिवारों के चूल्हे ठंडे पड़ रहे हैं, दूसरी तरफ भंडारों और धार्मिक आयोजनों से समाजसेवी होने का तमगा हासिल करने की कोशिश हो रही है। *वाह रे दोहरी तस्वीर! पहले किसी का घर उजाड़ो, फिर भंडारा कर पुण्य कमाने का प्रदर्शन करो।*शालिनी सिंह पटेल ने पुलिस अधीक्षक और जिला प्रशासन से पूरे जनपद में विशेष अभियान चलाकर जुआ माफिया के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि कार्रवाई में राजनीतिक प्रभाव और रसूख आड़े नहीं आने चाहिए।
*सबसे बड़ा सवाल यही है कि बांदा में कानून का राज चलेगा या जुए के कथित कारोबार का?* युवाओं का भविष्य दांव पर लगा है, परिवार कर्ज में डूब रहे हैं और प्रशासन के सामने चुनौती खड़ी है। अब जरूरत केवल आश्वासन की नहीं, बल्कि ऐसी ठोस कार्रवाई की है जो जुए के इस कथित साम्राज्य की जड़ों तक पहुंचे।
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