बच्चों की सुरक्षा पर पुलिस सख्त, चार माह से लापता बालिकाओं की तलाश के लिए विशेष निर्देश
आमोद कुमार
बांदा। बच्चों का बचपन सुरक्षित रखना किसी व्यवस्था की मेहरबानी नहीं, बल्कि उसकी बुनियादी जिम्मेदारी है। बाल विवाह, बाल श्रम, किशोर अपराध और महिला हिंसा जैसी सामाजिक बुराइयां केवल कानून से नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और प्रभावी कार्रवाई से थमती हैं। इसी उद्देश्य से पुलिस लाइन में विशेष किशोर पुलिस इकाई (एसजेपीयू) की मासिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई।अपर पुलिस अधीक्षक शिवराज की अध्यक्षता में हुई बैठक में लापता बच्चों की बरामदगी, बालिकाओं की सुरक्षा और अपराधों की विवेचना को लेकर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए। चार माह से अधिक समय से लापता बालिकाओं के मामलों में एएचटीयू को विशेष कार्रवाई के निर्देश दिए गए।बाल विवाह और बाल श्रम की रोकथाम के लिए जागरूकता अभियान चलाने तथा दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई पर जोर दिया गया। साथ ही गुमशुदा बच्चों की सूचनाएं पोर्टल पर अपडेट करने, पीड़ित बालिकाओं के बयान महिला पुलिस अधिकारी से दर्ज कराने और पर्याप्त साक्ष्य जुटाने के निर्देश दिए गए।
बैठक में पीड़ित बच्चों की पहचान गोपनीय रखने, बाल कल्याण समिति के माध्यम से संरक्षण एवं पुनर्वास सुनिश्चित करने तथा किशोर न्याय बोर्ड के नियमों का पालन करने पर भी जोर दिया गया।पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, चाइल्ड हेल्पलाइन, वन स्टॉप सेंटर, जीआरपी, आरपीएफ और सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में हुई इस बैठक ने बच्चों की सुरक्षा के प्रति प्रशासनिक प्रतिबद्धता दोहराई।
हालांकि, बाल सुरक्षा की असली परीक्षा बैठकों में दिए गए निर्देश नहीं, बल्कि उन बच्चों की जिंदगी में आने वाला बदलाव है, जिनका बचपन अपराध, शोषण और असुरक्षा के साये में गुजर रहा है। व्यवस्था की सफलता तभी मानी जाएगी, जब हर लापता बच्चा घर लौटे और हर पीड़ित को संरक्षण के साथ न्याय मिले।
नवीनतम न्यूज़ अपडेट्स के लिए Facebook, Instagram, Twitter पर हमें फॉलो करें और लेटेस्ट वीडियोज़ के लिए हमारे YouTube चैनल को भी सब्सक्राइब करें।

Leave a Comment: