व्यूरो रिपोर्ट क्रांति मिश्र /अब तक न्याय


  • व्यूरो रिपोर्ट क्रांति मिश्र /अब तक न्याय
  • बहराइच। कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के कारीकोट क्षेत्र में तेंदुआ प्रभावित इलाकों में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने और ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। 22 से 24 सितंबर तक चल रहे प्रशिक्षण कार्यक्रम में वन्यजीवों के व्यवहार, तेंदुए की गतिविधियों की पहचान, निगरानी व्यवस्था तथा प्रभावित क्षेत्रों में बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा रही है।
  • प्रशिक्षण के दौरान डिजिटल माध्यम से प्रतिभागियों को तेंदुए की मौजूदगी के संकेतों और उसकी गतिविधियों की पहचान करने के विभिन्न तरीकों की जानकारी दी गई। पगचिह्न की पहचान, वन्यजीवों के आवागमन के संकेत, उनके पदचिह्नों में अंतर, क्षेत्र में गतिविधियों के निशान तथा तेंदुए की मौजूदगी का अनुमान लगाने से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां भी साझा की गईं। इसके साथ ही निगरानी के दौरान किन बातों का ध्यान रखा जाए और किसी वन्यजीव की गतिविधि सामने आने पर किस प्रकार सूचना का आदान-प्रदान किया जाए, इस पर भी प्रशिक्षण दिया गया।
    प्रशिक्षण के दौरान निधि, कंसल्टेंट ने मानव-वन्यजीव संघर्ष की परिस्थितियों में अपनाए जाने वाले सुरक्षा उपायों और ग्रामीणों को जागरूक करने के तरीकों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तेंदुआ दिखाई देने की स्थिति में घबराने या उसके करीब जाने के बजाय सुरक्षित दूरी बनाए रखना चाहिए और तत्काल वन विभाग को सूचना देनी चाहिए। ग्रामीणों को बच्चों और बुजुर्गों की विशेष निगरानी रखने तथा रात के समय अनावश्यक रूप से अकेले बाहर न निकलने के लिए जागरूक करने पर भी जोर दिया गया।
  • कार्यक्रम में वन्यजीव संरक्षण के साथ ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर सामुदायिक सहभागिता को महत्वपूर्ण बताया गया। तेंदुआ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी, ग्रामीणों के साथ बेहतर समन्वय तथा वन्यजीवों की गतिविधियों की समय पर सूचना मिलने से मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को कम करने के उपायों पर चर्चा की गई।
    प्रशिक्षण में डिजिटल माध्यम से विभिन्न परिस्थितियों को उदाहरण के साथ समझाया गया। वन्यजीव के पगचिह्न और अन्य संकेतों को पहचानने, क्षेत्र में उसकी गतिविधियों का आकलन करने तथा निगरानी के दौरान प्राप्त जानकारी को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने की प्रक्रिया के बारे में भी प्रतिभागियों को जानकारी दी गई।
    कार्यक्रम के माध्यम से तेंदुआ प्रभावित क्षेत्रों में कार्य करने वाले कर्मचारियों एवं संबंधित लोगों को मानव-वन्यजीव संघर्ष की परिस्थितियों से निपटने, वन्यजीवों की गतिविधियों की पहचान करने, ग्रामीणों को जागरूक करने और सुरक्षा उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने के संबंध में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
  • प्रशिक्षण कार्यक्रम में दबीर हसन, परियोजना अधिकारी डब्ल्यूडब्ल्यूएफ, मंसूर अली, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ, मयंक पाण्डेय, उप वन क्षेत्राधिकारी, सचिन गौड़, सहायक परियोजना अधिकारी, निधि कंसल्टेंट, राहुल कुमार, फील्ड असिस्टेंट तथा शिव कुमार, आरओ निशानगाड़ा व काफी संख्या में स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे।

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