बांदा में स्कूल आधारित टीकाकरण अभियान शुरू, कालीखांसी, गलघोंटू और टिटनेस से बचाव के लिए बच्चों को लगेंगे टीके
आमोद कुमार
आमोद कुमार
आमोद कुमार
बांदा। बच्चों की तस्करी केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि समाज की संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भी कसौटी है। जब गरीबी, अशिक्षा और मजबूरी का लाभ उठाकर मासूमों का बचपन छीना जाता है, तब यह पूरे समाज के लिए चेतावनी बन जाता है। इसी चुनौती से मुकाबला करने के लिए ग्रामीण परम्परा विकास संस्थान ने बच्चों की तस्करी के खिलाफ व्यापक अभियान चलाने का एलान किया है।
विश्व मानव दुर्व्यापार विरोधी दिवस के अवसर पर नई दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित राष्ट्रीय परामर्श के दौरान नेशनल कैंपेन अगेंस्ट चाइल्ड ट्रैफिकिंग की शुरुआत की गई। इस अभियान के तहत संस्था ने बांदा जनपद में जागरूकता, रोकथाम, कानूनी कार्रवाई और पुनर्वास को केंद्र में रखकर कार्य करने की प्रतिबद्धता जताई। संस्था का कहना है कि सरकार, प्रशासन और आम नागरिकों के सहयोग से बाल तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाने का प्रयास किया जाएगा।
संस्था के अनुसार जिले में जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे, संदिग्ध तस्करों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए प्रशासन को सहयोग दिया जाएगा तथा आर्थिक रूप से कमजोर और हाशिये पर रहने वाले परिवारों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने का प्रयास होगा। उद्देश्य यह है कि बच्चे शिक्षा से जुड़े रहें और रोजगार या बेहतर जीवन के झूठे लालच में तस्करी गिरोहों का शिकार न बनें।नई दिल्ली में आयोजित चार दिवसीय राष्ट्रीय परामर्श में देश के 782 जिलों से 250 से अधिक नागरिक समाज संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान वर्ष 2030 तक देशव्यापी अभियान चलाने का निर्णय लिया गया। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) के सहयोगी संगठनों के प्रयासों से अप्रैल 2023 से दिसंबर 2025 के बीच देशभर में 1.22 लाख से अधिक बच्चों को तस्करी से मुक्त कराए जाने की जानकारी भी साझा की गई।ग्रामीण परम्परा विकास संस्थान के निदेशक श्रवण कुमार ने कहा कि बच्चों की तस्करी आज भी एक गंभीर सामाजिक चुनौती बनी हुई है। उन्होंने कहा कि मानव तस्करी हथियारों और मादक पदार्थों के अवैध कारोबार के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा संगठित अपराध माना जाता है। इसका सबसे अधिक शिकार महिलाएं और बच्चे होते हैं। तस्कर अक्सर गरीब परिवारों के बच्चों को नौकरी, अच्छी शिक्षा या बेहतर भविष्य का लालच देकर अपने साथ ले जाते हैं और बाद में उन्हें बंधुआ मजदूरी, भीख मंगवाने या यौन शोषण जैसे अपराधों में धकेल देते हैं।
उन्होंने कहा कि संस्था का लक्ष्य केवल बच्चों को तस्करी से बचाना ही नहीं, बल्कि उन्हें सम्मानजनक पुनर्वास दिलाकर शिक्षा और समाज की मुख्यधारा से जोड़ना भी है। इसके लिए प्रशासन, समाज और स्वयंसेवी संगठनों के बीच समन्वय बढ़ाया जाएगा, ताकि कोई भी बच्चा मजबूरी का नहीं, बल्कि अपने सपनों का जीवन जी सके।
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