रिपोर्ट सुधीर वर्मा अब तक न्याय


* विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) व अभिभावकों की सहमति से शुरू हुई अनूठी पहल
* शुरुआती दौर में ही 26 नौनिहालों के खुले खाते, ₹578 की बचत राशि हुई जमा
* कम उम्र में बच्चों को बचत, वित्तीय अनुशासन और व्यावहारिक ज्ञान सिखाने की कवायद
महमूदाबाद (सीतापुर)।
बचपन से ही वित्तीय अनुशासन और बचत की आदत को जीवनशैली का हिस्सा बनाने के उद्देश्य से विकास खंड महमूदाबाद अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय नीबा डेहरा में एक बेहद प्रेरक और अभिनव प्रयोग किया गया है। विद्यालय में बच्चों के सर्वांगीण विकास और आर्थिक व्यवहार की समझ विकसित करने के लिए ‘नीबा डेहरा बाल बैंक’ की विधिवत शुरुआत की गई है। इस पहल की सबसे खास बात यह है कि बैंक का पूरा संचालन स्वयं नन्हें छात्र-छात्राओं के हाथों में सौंपा गया है।
कक्षा-5 के अविनाश बने मैनेजर, फातिमा निभा रहीं कैशियर का दायित्व
विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) के अनुमोदन और अभिभावकों की सहर्ष सहमति के उपरांत शुरू किए गए इस बाल बैंक में जिम्मेदारियों का भी पेशेवर तरीके से बंटवारा किया गया है। कक्षा-5 के होनहार छात्र अविनाश वर्मा को बैंक मैनेजर की जिम्मेदारी सौंपी गई है, वहीं कक्षा-5 की छात्रा फातिमा बानो कैशियर के रूप में वित्तीय लेन-देन का जिम्मा संभाल रही हैं। इसके माध्यम से छात्रों को किताबी ज्ञान से इतर वास्तविक बैंकिंग प्रणाली, पासबुक संधारण, टोकन व्यवस्था और धन के सुनियोजित प्रबंधन का व्यावहारिक अनुभव मिल रहा है।
अब तक 26 खाते खुले, ₹578 की बचत जमा
बाल बैंक के प्रति नौनिहालों में गजब का उत्साह देखा जा रहा है। शुरुआत होते ही अब तक 26 छात्र-छात्राओं ने अपने खाते खुलवा लिए हैं। बच्चों ने अपनी जेबखर्च से बचाकर अब तक कुल ₹578 की बचत राशि बैंक में जमा भी कर दी है। विद्यालय में प्रतिदिन बच्चों को अपनी छोटी-छोटी फिजूलखर्ची रोककर बचत करने और लक्ष्य निर्धारण के लिए निरंतर प्रेरित किया जा रहा है। बच्चों द्वारा जमा की गई पाई-पाई का विधिवत हिसाब और रजिस्टर में व्यवस्थित अंकन किया जा रहा है।
भविष्य के जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में मजबूत कदम: प्रधानाध्यापक
पहल के संदर्भ में जानकारी देते हुए विद्यालय के प्रधानाध्यापक अनुज कुमार वर्मा ने बताया कि बाल बैंक स्थापित करने का मुख्य ध्येय बच्चों में कम उम्र से ही आर्थिक अनुशासन, उत्तरदायित्व और सही आर्थिक व्यवहार की समझ पैदा करना है। उन्होंने कहा, "जब बच्चे खुद पाई-पाई जोड़ते हैं और अपने बैंक का प्रबंधन संभालते हैं, तो उनमें आत्मविश्वास के साथ-साथ धन के सदुपयोग का व्यावहारिक ज्ञान विकसित होता है। अभिभावकों के सहयोग से सभी खातों का सुरक्षित व पारदर्शी रिकॉर्ड रखा जा रहा है।"
अभिभावकों व ग्रामीणों ने की पहल की सराहना
विद्यालय परिवार की इस नवाचारी सोच का विद्यालय प्रबंधन समिति और अभिभावकों ने खुले दिल से स्वागत किया है। ग्रामीणों व अभिभावकों का मानना है कि प्राथमिक स्तर पर इस प्रकार के व्यावहारिक प्रयोग बच्चों को भविष्य में आत्मनिर्भर, आर्थिक रूप से जागरूक और एक जिम्मेदार नागरिक बनाने में मील का पत्थर साबित होंगे। वर्तमान में यह अनूठी पहल क्षेत्र में चर्चा और सराहना का केंद्र बनी हुई है।

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