इलाहाबाद उच्च न्यायालय : केवल अंतरिम आदेश (Interlocutory Order) के विरुद्ध लंबित राजस्व पुनरीक्षण (Revenue Revision) को अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखा जा सकता


⚖️ इलाहाबाद उच्च न्यायालय : केवल अंतरिम आदेश (Interlocutory Order) के विरुद्ध लंबित राजस्व पुनरीक्षण (Revenue Revision) को अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखा जा सकता। न्यायालय ने राजस्व बोर्ड को निर्देश दिया कि पक्षकारों को सुनवाई का अवसर देकर पुनरीक्षण का विधि अनुसार यथाशीघ्र, अधिमानतः दो माह के भीतर, निस्तारण किया जाए।

????️ न्यायालय: माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय

????‍⚖️ पीठ: माननीय न्यायमूर्ति चन्द्र कुमार राय

???? प्रकरण: Virendra Singh v. State of U.P. & 4 Others

???? निर्णय दिनांक: 21 जनवरी 2026

???? प्रकरण संख्या: WRIT–B No. 227 of 2026 

???? संक्षिप्त पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय का दरवाजा इस शिकायत के साथ खटखटाया कि उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 34 की कार्यवाही के दौरान तहसीलदार द्वारा पारित एक अंतरिम आदेश के विरुद्ध दायर पुनरीक्षण वर्ष 2025 से राजस्व बोर्ड, आगरा के समक्ष लंबित है और उसका शीघ्र निस्तारण नहीं किया जा रहा है। इसलिए न्यायालय से पुनरीक्षण का समयबद्ध निस्तारण कराने का अनुरोध किया गया। 

????️ उच्च न्यायालय के प्रमुख अवलोकन

1. न्यायालय ने पाया कि पुनरीक्षण काफी समय से लंबित है और उसका त्वरित निस्तारण आवश्यक है। 

2. न्यायालय ने कहा कि मामले के गुण-दोष (Merits) पर कोई टिप्पणी किए बिना, सक्षम प्राधिकारी को लंबित पुनरीक्षण का शीघ्र निस्तारण करना चाहिए। 

3. न्यायालय ने निर्देश दिया कि सभी संबंधित पक्षों को उचित सुनवाई का अवसर (Proper Opportunity of Hearing) प्रदान करते हुए कानून के अनुसार निर्णय किया जाए। 

4. न्यायालय ने स्पष्ट किया कि न्यायिक एवं अर्द्ध-न्यायिक प्राधिकारियों के समक्ष लंबित मामलों का अनावश्यक विलंब न्याय के उद्देश्य के विपरीत है और ऐसे मामलों का समयबद्ध निस्तारण किया जाना चाहिए। 

⚖️ निर्णय

उच्च न्यायालय ने रिट याचिका का निस्तारण करते हुए राजस्व बोर्ड, सर्किट कोर्ट–2, आगरा को निर्देश दिया कि प्रमाणित प्रति प्रस्तुत किए जाने की तिथि से अधिमानतः दो माह के भीतर, सभी पक्षकारों को सुनवाई का अवसर देकर लंबित पुनरीक्षण का विधि के अनुसार यथाशीघ्र निस्तारण किया जाए। 

???? Ratio Decidendi

✅ लंबित पुनरीक्षण याचिकाओं का अनावश्यक विलंब न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।

✅ उच्च न्यायालय उपयुक्त मामलों में सक्षम प्राधिकारी को समयबद्ध अवधि में लंबित कार्यवाही के निस्तारण का निर्देश दे सकता है।

✅ किसी भी लंबित पुनरीक्षण का निर्णय सभी पक्षकारों को उचित सुनवाई का अवसर देकर तथा विधि के अनुसार किया जाना चाहिए। 

????‍⚖️ व्यावहारिक महत्व

यह निर्णय उन मामलों में महत्वपूर्ण है जहाँ राजस्व बोर्ड, अपीलीय अथवा पुनरीक्षण प्राधिकारी के समक्ष प्रकरण लंबे समय से लंबित हैं। यदि किसी मामले का अनावश्यक रूप से निस्तारण नहीं किया जा रहा हो, तो उच्च न्यायालय संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत हस्तक्षेप कर संबंधित प्राधिकारी को समयबद्ध निस्तारण का निर्देश दे सकता है। 

⚠️ Disclaimer

यह सारांश केवल विधिक जागरूकता एवं शैक्षणिक उद्देश्य से तैयार किया गया है। किसी भी न्यायिक कार्यवाही में इस निर्णय पर निर्भर करने से पूर्व मूल निर्णय, संबंधित वैधानिक प्रावधानों तथा नवीनतम न्यायिक दृष्टांतों का सावधानीपूर्वक अध्ययन किया जाना चाहिए। प्रत्येक मामले का निर्णय उसके अपने तथ्यों, साक्ष्यों एवं लागू विधि के आधार पर किया जाता है।

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Bhanu Pratap Dixit

अब तक टीवी न्यूज़ चैनल

भानु प्रताप दीक्षित अबतक टीवी के ऑफिस में कार्यरत हैं। उन्हें पत्रकारिता में 6 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे सीनियर को-एडिटर के पद पर अपनी जिम्मेदारियाँ निभा रहे हैं।

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