साल 2026 में मिडिल ईस्ट में हुए संघर्ष के बाद से अब तक इस इलाके में 10 नाविकों समेत 16 भारतीय नागरिकों की मौत हो चुकी. सरकार ने इस आंकड़े के बारे में संसद को बताया. विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में CPI(M) सांसद जॉन ब्रिटास के सवाल के जवाब में ये जानकारी दी. विदेश मंत्रालय ने मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के कारण मारे गए, घायल हुए, फंसे हुए या सुरक्षित निकाले गए भारतीय नाविकों और अन्य भारतीय नागरिकों की संख्या के बारे में पूछा गया था.
मंत्री कीर्ति वर्धन ने कहा, “2026 में मिडिल ईस्ट में संघर्ष शुरू होने के बाद से 10 नाविकों सहित 16 भारतीय नागरिकों की वहां मौत हो गई है. (एक सऊदी अरब, दो कुवैत, आठ ओमान, एक इराक और चार UAE में) और 75 भारतीय घायल हुए हैं (32 UAE, 24 ओमान, चार कतर, 13 कुवैत, एक सऊदी अरब और एक इजराइल).” उन्होंने बताया कि हमलों से अलग एक दूसरी घटना में, कतर के रास लाफान गैस प्लांट में 12 भारतीय नागरिकों की मौत हो गई.
‘अब तक टीवी
सरकार ने की हर संभव मदद’
विदेश मंत्रालय ने कहा कि सरकार ने मेजबान देशों की सरकारों के साथ मिलकर, मारे गए भारतीय नागरिकों के शवों को जल्द से जल्द भारत वापस लाने के लिए उनके परिवारों को हर संभव मदद दी. घायल भारतीय नागरिकों का इलाज स्थानीय हॉस्पिटल्स में हुआ. राज्य मंत्री ने बताया कि भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास ने स्थानीय अधिकारियों और अस्पतालों के साथ मिलकर उनकी सेहत के बारे में नियमित जानकारी ली और हर जरूरी मदद दी. जैसे कि परिवार के सदस्यों से संपर्क करना, यात्रा के उपलब्ध विकल्पों और उनकी सुरक्षित भारत वापसी के बारे में जानकारी देना आदि.
मुआवजा कितना?
“युद्ध-क्षेत्र की घटनाओं से जुड़े सभी मामलों में, DGMA वेलफेयर स्कीम (सीफेयर्स वेलफेयर फंड सोसाइटी – SWFS) के तहत 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाता है. जरूरी जांच-पड़ताल और पुष्टि के बाद, सरकार प्रभावित नाविकों के निकटतम परिजनों को यह राशि जल्द से जल्द जारी करती है.”
उन्होंने ने कहा कि सरकार का अनुमान है कि ईरान में लगभग 7,000 भारतीय नागरिक हो सकते हैं, जिनमें धार्मिक शिक्षण संस्थानों के छात्र, मेडिकल छात्र, कामगार, समुद्री कर्मी और मछुआरे शामिल हैं.
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