हाथों में किताबे होनी चाहिए वह बच्चे भुखमरी के कारण मजबूर होकर रस्सी पर करतब दिखाते हुए नजर आते हैं


यह है भारत का विकास क्यों कभी-कभी सड़कों पर दिख जाता है जिन हाथों में किताबे होनी चाहिए वह बच्चे भुखमरी के कारण मजबूर होकर रस्सी पर करतब दिखाते हुए नजर आते हैं l यदि ऐसे अभिभावकों के पास भी विकास की गंगा होती तो फिर उन्हें अपने बच्चों से यह करते नहीं कराना पड़ता l हर अभिभावक यह चाहता है कि उसके पार्ले पढ़ लिख कर अच्छे नागरिक बन सकें लेकिन यदि उन्हें भूख रूपी राक्षस बता रहा है तो फिर वह अपने बच्चों को स्कूल न भेजकर ऐसे ही कार्य करने को विवश हो जाते हैं l यह इतनी छोटी बालिका रस्सी और रिम के सहारे अपना करतब दिखा रही है  और इसकी मां दुकानदारों से उसके करतब के एवज में पैसे मांग रही हैl यदि शासन और प्रशासन ऐसे परिवारों को चिन्हित करके इनकी मदद कर दे तो इन अभिभावकों के बच्चे भी पढ़ लिख कर एक अच्छे इंसान बन सकते हैं जिससे इनके परिवार वालों को आगे ऐसे करते नहीं करने पड़ेंगे l अब तक टीवी न्यूज़ चैनल सीतापुर से लक्ष्मीकांत वाजपेई की खास रिपोर्ट

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