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दुर्दशा पर भयभीत होते हुए बताया
शाह आलम क्रांतिकारी परंपरा के दस्तावेजी लेखक
अयोध्या। चंबल को अपनी कर्मभूमि बनाकर उसकी बेहतरी के लिए प्रयासरत चंबल परिवार के प्रमुख शाह आलम राना को उनकी दो दशक लंबी एवं प्रेरणादायक सेवाओं के लिए इंटरनेशनल ओपन यूनिवर्सिटी ऑफ ह्यूमैनिटी हेल्थ साइंस एंड पीस, कैलिफोर्निया ने डी. लिट की मानद उपाधि दी है। शाह आलम क्रांतिकारी परंपरा के दस्तावेजी लेखक है। वे चंबल की 2800 किमी से अधिक दूरी अकेले साइकिल से यात्रा करके चर्चा में आए थे।
उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के मूल निवासी शाह आलम पूरा पिरई गांव के रहने वाले हैं। शाह आलम के परबाबा पिरई खां महुआ डाबर एक्शन के महानायक थे। उन्होंने अपने गुरिल्ला साथियों के साथ मिलकर 10 जून 1857 को अंग्रेजी सेना के छह अफसरों को मार डाला था। जिसका खामियाजा भी परिवार को भुगतना पड़ा। शाह आलम ने डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या और जामिया मिल्लिया इस्लामिया केंद्रीय विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से पढ़ाई की। एक घुमंतू सरोकारी दस्तावेजी लेखक-फिल्मकार के रूप में दो दशक से अधिक समय से सक्रिय हैं। सामाजिक सरोकारों के लिए
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दुर्दशा पर भयभीत होते हुए बताया
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