बहराइच: नेपाल सीमा से सटे जंगली क्षेत्र में झोलाछापों का बोलबाला, शासनादेश के बावजूद मानक विहीन नर्सिंग होम धड़ल्ले से चल रहे
बहराइच। जनपद बहराइच की भौगोलिक स्थिति ही इसकी सबसे बड़ी चुनौती है। एक तरफ नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा, दूसरी तरफ घना जंगल और दुर्गम क्षेत्र। इसी भौगोलिक मजबूरी का फायदा उठाकर झोलाछाप डॉक्टर और मानक विहीन नर्सिंग होम ग्रामीणों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं।
शासन का स्पष्ट आदेश है कि बिना पंजीकरण, बिना मानक के कोई भी नर्सिंग होम, क्लीनिक या अस्पताल संचालित नहीं होगा। मानक के अनुसार ही डॉक्टर, स्टाफ, दवाएं, उपकरण और साफ-सफाई होनी चाहिए। लेकिन जमीनी हकीकत इसके उल्टा है।
सीमा और जंगल में फैला जाल
नेपाल सीमा से सटे रुपईडीहा, मिहींपुरवा, नानपारा, मोतीपुर और जंगली क्षेत्र के गांवों में जगह-जगह बिना बोर्ड और बिना पंजीकरण के क्लीनिक खुले हैं। न कोई डिग्री, न कोई लाइसेंस, फिर भी धड़ल्ले से इलाज, इंजेक्शन, ग्लूकोज और ऑपरेशन तक किए जा रहे हैं।
सरकारी दवा और एक्सपायरी दवा का खेल
कई जगहों पर सरकारी दवाएं बेचने, एक्सपायरी दवाएं देने और एमआरपी काटकर दोगुने दाम वसूलने की शिकायतें सामने आ रही हैं। नानपारा में अनाया नर्सिंग होम और साहिन क्लीनिक जैसे मामलों ने इस पूरे खेल की पोल खोल दी है।
CMO ने दिए सख्त निर्देश
सीएमओ बहराइच डॉ. संजय कुमार के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने शासनादेश के अनुसार अभियान चलाकर कार्रवाई शुरू की है। जनपद में पहले भी कई अवैध नर्सिंग होम और झोलाछापों पर कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन चेतावनी के बावजूद फिर से यह धंधा पनप रहा है।
अब स्वास्थ्य विभाग ने फिर से अभियान चलाकर अवैध नर्सिंग होम, दलालों और झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही है।
सवाल बरकरार
जब शासन का आदेश साफ है, तो फिर नेपाल सीमा और जंगली इलाकों में मानक विहीन अस्पताल कैसे चल रहे हैं? गरीब ग्रामीणों की जान की कीमत पर यह धंधा कब बंद होगा?
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