जम्मू-कश्मीर में सरकार का कामकाज शुरू होते ही नेशनल कॉन्फ्रेंस में सियासी हलचल तेज हो गई है. कैबिनेट विस्तार और चुनाव वादे पूरे न होने से पार्टी में असंतोष चरम पर है.


जम्मू-कश्मीर में आज से सरकार का दरबार जम्मू में सज गया है. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जम्मू सचिवालय पहुंचकर शीतकालीन राजधानी से सरकारी कामकाज की औपचारिक शुरुआत कर दी है. लेकिन एक तरफ जम्मू में सचिवालय का कामकाज शुरू हो रहा है, तो दूसरी तरफ सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर सियासी हलचल लगातार तेज होती जा रही है.

 

कैबिनेट विस्तार के बाद शुरू हुई नाराजगी अब खुलकर सामने आने लगी है। सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह ने पार्टी संसदीय सीट से इस्तीफा देने का मन बना लिया है और 3 तारीख को सुबह अपना इस्तीफा दे सकते हैं वहीं, करीब 25 नाराज विधायक भी अपनी मांगों को लेकर लगातार दबाव बना रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला अपनी ही पार्टी के भीतर उठ रहे विरोध को कैसे संभालेंगे?

सरकार बनने के बाद नहीं पूरे किए वादे

दरअसल, नेशनल कॉन्फ्रेंस विधानसभा चुनाव के दौरान अनुच्छेद 370 और 35A की बहाली, मुफ्त बिजली, मुफ्त गैस सिलेंडर समेत कई बड़े वादे लेकर जनता के बीच पहुंची थी. पार्टी को इन वादों के आधार पर जनादेश भी मिला. लेकिन सरकार बनने के बाद इन वादों को पूरा करने को लेकर सवाल उठने लगे हैं.

 

 

 

 

सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह का आरोप है कि सरकार चुनाव के दौरान जनता से किए गए वादों को पूरा करने में नाकाम रही है. वहीं अब कैबिनेट विस्तार के बाद नाराज 25 विधायकों ने 14 दिन के भीतर मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में पार्टी छोड़ने की चेतावनी दी है. तो आगे सैयद राहुल ने 3 नवंबर को नेशनल कॉन्फ्रेंस और अपनी संसदीय सदस्यता से इस्तीफा देने के ऐलान ने पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं.

उधर, नेशनल कॉन्फ्रेंस के करीब 18 नाराज विधायकों की बैठक ने भी पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है. इन विधायकों ने कैबिनेट विस्तार को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की है. उनकी मांग है कि मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी को हटाया जाए और जिन मंत्रियों को दो साल का कार्यकाल पूरा हो चुका है, उनकी जगह नए विधायकों को मंत्री बनने का मौका दिया जाए. यही नहीं जहां मीटिंग में 18 विधायक मौजूद थे जो अब यह दावा कर रहे हैं कि उनके साथ 25 विधायकों का समर्थन मौजूद है.

वरिष्ठ नेताओं को उचित प्रतिनिधित्व मिलने पर सवाल

विधायकों का कहना है कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और निर्वाचित प्रतिनिधियों को सरकार में उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए. इस पूरे घटनाक्रम के बीच वरिष्ठ विधायक मुबारक गुल ने भी 4 नवंबर को अपना रुख स्पष्ट करने की बात कही है. पार्टी ने उन्हें मनाने के लिए पहले पार्टी के जनरल सेक्रेटरी का पद ऑफर किया था, लेकिन बाद में उन्हें उसे पद से हटकर दोबारा अली मोहम्मद सागर को बतौर जनरल सेक्रेटरी काम जारी रखने के आदेश दिए हैं.

यानी आने वाले दो दिन नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए बेहद अहम रहने वाले हैं. एक तरफ आगा सैयद रुहुल्लाह के इस्तीफे का ऐलान है, तो दूसरी तरफ नाराज विधायकों की मांगें हैं. ऐसे में उमर अब्दुल्ला के सामने दोहरी चुनौती है. उन्हें न सिर्फ सरकार का कामकाज सुचारू रूप से चलाना है, बल्कि पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी को भी दूर करना है.

अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला नाराज नेताओं को मनाने के लिए क्या कदम उठाते हैं? क्या कैबिनेट में एक बार फिर फेरबदल होगा? क्या विधायकों की मांगों पर पार्टी नेतृत्व कोई फैसला लेगा या फिर नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर यह सियासी खींचतान और बढ़ेगी?

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