वोटर लिस्ट के SIR में लापरवाही को लेकर EC सख्त है. पीलीभीत में दो PCS अधिकारियों के सस्पेंशन से लेकर नोएडा में BLO पर FIR और पश्चिम बंगाल में सात अधिकारियों पर कार्रवाई तक कई मामले सामने आए हैं.


वोटर लिस्ट को सही करने के लिए शुरू किया गया स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR अब देश के कई राज्यों में प्रशासनिक कार्रवाई की वजह बनता जा रहा है. कहीं वोटर्स के नामों का वरैफिकेशन में लापरवाही सामने आ रही है, तो कहीं बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) पर तय जिम्मेदारी पूरी नहीं करने के आरोप लग रहे हैं. चुनाव आयोग ने इस काम को गंभीरता से लेते हुए साफ कर दिया है कि वोटर लिस्ट तैयार करने में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

 

इसी का असर है कि उत्तर प्रदेश से लेकर पश्चिम बंगाल और ओडिशा तक अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई हो रही है. कहीं कर्मचारियों को सस्पेंड किया गया है तो कहीं उनके खिलाफ FIR तक दर्ज कराई गई है. इस कार्रवाई का दायरा केवल बूथ लेवल के कर्मचारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि जिम्मेदारी निभाने में चूक करने वाले वरिष्ठ अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो रही है.

उत्तर प्रदेश के दो PCS अधिकारी सस्पेंड

ताजा मामला उत्तर प्रदेश के पीलीभीत का है, जहां वोटर लिस्ट में गड़बड़ी और SIR से जुड़े काम में अनियमितताओं को लेकर PCS रैंक के दो अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है. इस कार्रवाई ने एक बार फिर पूरे देश में चल रहे SIR अभियान और उसकी निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. इससे पहले नोएडा में 60 से ज्यादा BLO और सात पर्यवेक्षकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने से लेकर पश्चिम बंगाल में सात अधिकारियों के सस्पेंशन तक, अलग-अलग राज्यों में कार्रवाई के कई मामले सामने आए हैं.

 

अब तक कहां-कहां हुई कार्रवाई-

पीलीभीत : दो पीसीएस अधिकारी सस्पेंड नोएडा : 60 BLO और सात पर्यवेक्षकों पर FIR पश्चिम बंगाल : सात AERO सस्पेंड बहराइच : दो BLO सस्पेंड प्रयागराज, बुलंदशहर और बरेली : कई कर्मचारियों पर कार्रवाई ओडिशा : फर्जी नाम जोड़ने से लेकर ड्यूटी छोड़ने तक के मामले

SIR को लेकर विवाद क्या है?

SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन का मकसद वोटर लिस्ट की नए सिरे से जांच करना है, ताकि योग्य वोटर्स के नाम लिस्ट में बने रहें और गलत या अपात्र नाम हटाए जा सकें. इस मामले में विवाद की मुख्य वजह इसी जांच के दौरान सामने आ रही गड़बड़ियां हैं. एक तरफ चुनाव आयोग का कहना है कि वोटर लिस्ट में पारदर्शिता और सही जानकारी जरूरी है, वहीं दूसरी तरफ कई जगह वोटर्स के नाम हटने की आशंका, दस्तावेजों को लेकर परेशानी और BLO के काम के दबाव जैसे सवाल उठे हैं. कुछ मामलों में अधिकारियों पर फर्जी नाम जोड़ने, बिना जरूरी डॉक्यूमेंट्स के आवेदनों को मंजूरी देने और लॉगिन जानकारी दूसरों के साथ शेयर करने के आरोप लगे हैं.

पीलीभीत में दो अधिकारियों पर गिरी गाज

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में सदर विधानसभा क्षेत्र की वोटर लिस्ट में गड़बड़ी सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने दो पीसीएस रैंक के अधिकारियों पर कार्रवाई की है. इनमें इलेक्ट्रोलर रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी शामिल हैं. आयोग ने दोनों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड करने का निर्देश दिया है. इस मामले में चुनाव आयोग ने वोटर रजिस्ट्रेशन सेंटर में तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार के खिलाफ पहले से दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 198 जोड़ने का निर्देश दिया है.

पश्चिम बंगाल में 7 अधिकारियों सस्पेंड

पश्चिम बंगाल में भी चुनाव आयोग ने फरवरी 2026 में बड़ी कार्रवाई की थी. यहां SIR के काम में गंभीर गड़बड़ी, ड्यूटी में लापरवाही और अधिकारों का गलत इस्तेमाल करने के आरोप में 7 असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (AERO) को सस्पेंड कर दिया गया. ये अधिकारी मुर्शिदाबाद, फरक्का, मयनागुड़ी, सूती, कैनिंग पूर्व और देबरा विधानसभा क्षेत्रों में तैनात थे.

आयोग की जांच में पाया गया कि इन अधिकारियों ने जरूरी दस्तावेज जमा नहीं होने के बावजूद कई मामलों को मंजूरी दे दी थी. वोटर्स के रिकॉर्ड के मिलान में भी गड़बड़ियां थीं. इसके बावजूद सुधार करने के बजाय गलत मामलों को आगे बढ़ाया गया. आयोग ने राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को इन अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया था.

पश्चिम बंगाल के अलग-अलग मामले

पश्चिम बंगाल में ही 5 सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ फर्जी वोटर्स के नाम जोड़ने के आरोप में FIR दर्ज कराने के निर्देश दिए गए थे. इनमें दो इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर, दो असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर और एक डाटा एंट्री ऑपरेटर शामिल थे. आरोप था कि बारुईपुर पूर्व और मोयना विधानसभा क्षेत्रों में SIR के दौरान फर्जी या अस्तित्व में नहीं होने वाले वोटर्स के नाम जोड़े गए.

इन कर्मचारियों में देबोत्तम दत्ता चौधरी, तथागत मंडल, बिप्लब सरकार, सुदीप्त दास और डाटा एंट्री ऑपरेटर सुरजीत हलदर के नाम शामिल हैं. चुनाव आयोग ने पहले सस्पेंशन और FIR के निर्देश दिए थे. बाद में FIR दर्ज कराने के लिए फिर से निर्देश जारी करने पड़े. ये मामला बताता है कि आयोग केवल लापरवाही ही नहीं, बल्कि वोटर लिस्ट में जानबूझकर गड़बड़ी करने के आरोपों पर भी सख्ती दिखा रहा है.

ओडिशा में भी सामने आए कई मामले

ओडिशा में SIR के दौरान वोटर लिस्ट में गड़बड़ी और कर्मचारियों की लापरवाही के अलग-अलग मामले सामने आए. अक्टूबर 2026 में धामनगर विधानसभा क्षेत्र की BLO निरुपमा त्रिपाठी ने शिकायत की थी कि उनके लॉगिन का इस्तेमाल करके उनकी जानकारी के बिना वोटर्स के नाम हटाने के लिए कम से कम 227 फॉर्म-7 आवेदन अपलोड कर दिए गए. दूसरे BLO ने भी इसी तरह की शिकायत की थी. इस मामले में एक अधिकारी को सस्पेंड किया गया.

वहीं कालाहांडी जिले में BLO के रूप में तैनात शिक्षक मधुसूदन बेहेरा को ड्यूटी में लापरवाही के आरोप में सस्पेंड किया गया. वो बोरिंगपदार अपर प्राइमरी स्कूल में शिक्षक थे. अधिकारियों के मुताबिक, उन्हें कई बार फोन करके और निर्देश देकर SIR का काम पूरा करने को कहा गया था, लेकिन उन्होंने जिम्मेदारी नहीं निभाई. इसके बाद जिला कलेक्टर सचिन पवार के निर्देश पर सस्पेंशन की कार्रवाई की गई.

भुवनेश्वर में भी सरकारी स्कूल की सहायक शिक्षिका रश्मि साहू को SIR ड्यूटी से बिना अनुमति गैरहाजिर रहने के आरोप में सस्पेंड किया गया था. वह बूथ नंबर 109 पर BLO के रूप में तैनात थीं.

हरियाणा में लापरवाही पर 3 BLO सस्पेंड

हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले में वोटर लिस्ट के SIR के काम में लापरवाही के आरोप में तीन बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को सस्पेंड कर दिया गया है. ये कार्रवाई 26 अगस्त 2026 को जारी आदेशों के आधार पर की गई. सस्पेंड BLO में नारनौल विधानसभा क्षेत्र के भाग संख्या 11 में तैनात गजराज और अटेली विधानसभा क्षेत्र के भाग संख्या 187 में तैनात प्रदीप कुमार शामिल हैं. अधिकारियों के मुताबिक, दोनों पर बार-बार निर्देश देने के बावजूद तय काम पूरा नहीं करने और ड्यूटी में रुचि नहीं दिखाने के आरोप हैं

सुल्तानपुर में 26 वोटरों के नाम हटाने की कोशिश

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में 26 मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाने के लिए फर्जी हस्ताक्षर से फॉर्म-7 जमा करने का मामला सामने आया है. ये मामला करीब आठ महीने पुराना है. समाजवादी पार्टी की शिकायत के बाद चुनाव आयोग ने जांच कराई. जांच में पता चला कि नंदलाल नाम के व्यक्ति के हस्ताक्षर से फॉर्म जमा किए गए थे, जबकि वो हस्ताक्षर करने के बजाय अंगूठा लगाते हैं. सभी 26 फॉर्म अधूरे थे और किसी मतदाता का नाम नहीं हटाया गया. मामले में गोसाईंगंज थाने में FIR भी दर्ज की गई है.

प्रयागराज से बहराइच तक BLO पर गिरी गाज

SIR में लापरवाही का बड़ा मामला नोएडा में सामने आया था. यहां जिलाधिकारी मेधा रूपम ने 60 BLO और 7 पर्यवेक्षकों के खिलाफ FIR दर्ज कराने का आदेश दिया था. अधिकारियों के मुताबिक, कर्मचारी अपने तय क्षेत्रों में नहीं पहुंचे और बार-बार निर्देश देने के बावजूद काम में सुधार नहीं किया.

उत्तर प्रदेश में पीलीभीत और नोएडा के अलावा भी कई जिलों में SIR के काम में लापरवाही को लेकर कार्रवाई की गई. रिपोर्ट के मुताबिक, प्रयागराज में 6 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए. सात BLO का मानदेय रोक दिया गया और एक BLO के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया गया.

ड्यूटी से एब्सेंट रहने की वजह से गई नौकरी

बुलंदशहर और बरेली में 8 BLO के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए. इन पर वोटर काउंट फॉर्म बांटने, वापस लेने और उनकी जानकारी डिजिटल करने में लापरवाही के आरोप थे. बहराइच में प्रधानाध्यापिका शमा नफीस और सहायक अध्यापक अनुराग को सस्पेंड कर दिया गया. शमा नफीस पर बार-बार निर्देश मिलने के बाद भी ड्यूटी पर नहीं पहुंचने का आरोप था.

वहीं, अनुराग के खिलाफ SIR का काम ठीक से नहीं करने और ड्यूटी से एब्सेंट रहने की शिकायत मिली थी. उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में SIR के काम में लापरवाही के आरोप में 13 BLO के खिलाफ FIR दर्ज की गई. इनमें सदर तहसील के सात और सिकंदराबाद क्षेत्र के छह BLO शामिल हैं. इन पर ड्यूटी में लापरवाही और तय समय पर काम पूरा नहीं करने के आरोप हैं. इसके अलावा बुलंदशहर में बीएलओ ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों का वेतन रोक दिया है.

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