खामोशी की भाषा समझेगी खाकी, सांकेतिक भाषा से पुलिस और बधिर नागरिकों के बीच घटेगा संवाद का फासला।           
बांदा। अंतर्राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस पर पुलिस लाइन में आयोजित कार्यशाला ने पुलिसिंग के उस पहलू को सामने रखा, जहां आवाज नहीं, इशारे संवाद का माध्यम बनते हैं। अपर पुलिस अधीक्षक शिवराज की अध्यक्षता में अखिल उत्तर प्रदेश बधिर संस्था (AUPAD) के सहयोग से आयोजित प्रशिक्षण में पुलिसकर्मियों को सांकेतिक भाषा का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया, ताकि श्रवणबाधित नागरिक अपनी शिकायत और समस्या बिना किसी संवाद की दीवार के पुलिस तक पहुंचा सकें।नेहरू ग्राम भारती विश्वविद्यालय, प्रयागराज से आईं सांकेतिक भाषा अनुवादक अपराजिता पाण्डेय ने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को सांकेतिक भाषा की बुनियादी जानकारी के साथ व्यावहारिक अभ्यास कराया। कार्यशाला का मकसद सिर्फ कुछ संकेत सिखाना नहीं, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली को अधिक समावेशी और संवेदनशील बनाना रहा, ताकि जरूरत के समय बधिर नागरिक को अपनी बात समझाने के लिए किसी दूसरे व्यक्ति पर निर्भर न रहना पड़े।अपर पुलिस अधीक्षक शिवराज ने कहा कि समाज के प्रत्येक वर्ग तक न्याय और सुरक्षा पहुंचाना पुलिस का दायित्व है। कार्यशाला के समापन पर क्षेत्राधिकारी सदर प्रतिज्ञा सिंह ने पुलिस अधीक्षक की ओर से प्रशिक्षक अपराजिता पाण्डेय को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। साथ ही प्रशिक्षण में शामिल पुलिसकर्मियों को भी उनके सक्रिय प्रतिभाग के लिए प्रोत्साहित किया गया। इस दौरान प्रतिसार निरीक्षक पुलिस लाइन वेलास यादव सहित विभिन्न थानों के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।

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