सुप्रीम कोर्ट अक्टूबर में मैरिटल रेप को अपराध माने जाने की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई करेगा. चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जे. बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने बुधवार को इस संबंध में निर्देश दिए. बेंच ने कहा कि केंद्र सरकार ने हलफनामा दाखिल कर दिया है. हम इसे सभी पक्षों को दे देंगे. इसके बाद इस पर विचार करेंगे.
कोर्ट ने कहा कि वह मौजूदा रेप कानून के दो पहलुओं पर विचार करेगा. पहला, क्या मौजूदा कानून के तहत भी किसी खास मामले में पति के खिलाफ रेप का केस चलाया जा सकता है? दूसरा, क्या ऐसा कानून, जो पति को बलात्कार के आरोप से छूट देता है, संविधान के खिलाफ है?
केंद्र का हलफनामा- वर्तमान कानून सही है
बार एंड बेंच के मुताबिक केंद्र सरकार ने मैरिटल रेप मामले में हलफनामा दाखिल किया है. इसमें कहा गया है कि रेप को लेकर जो अभी कानून है, वो सही है. इसे बदलना ठीक नहीं होगा. मैरिटल रेप के नजरिए से देखा जाए तो केंद्र का कहना है कि इसे अपराध नहीं माना जा सकता है.
रेप को आईपीएस की धारा 375 और बीएनएस की धारा 63 में इसे परिभाषित किया गया है. इसके मुताबिक किसी पुरुष को बलात्कार का दोषी तब कहा जाता है, जब वह-
1. किसी महिला के साथ वह जबरन शारीरिक संबंध बनाता है या उसे बनाने के लिए मजबूर करता है.
2. किसी महिला के इच्छा विरूद्ध उसके अंतरंग हिस्सों में कोई वस्तु डालता या डालने का प्रयास करता है.
इस कानून में 2 अपवाद है. पहला, मेडिकल प्रोसेस में अगर ऐसा जरूरी है, तो इसे रेप नहीं माना जा सकता है. दूसरा अपवाद पति को लेकर है. पति अगर 18 साल से ज्यादा उम्र की अपनी पत्नी के साथ ऐसा करता है तो उसे रेप नहीं माना जाएगा.
मैरिटल रेप का पूरा बवाल बीएनएस की धारा-63 के अपवाद नंबर-2 को लेकर है. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इसे खत्म करने की जरूरत है. क्योंकि, शादी के बाद कोई महिला अपनी व्यक्तिगत स्वतंत्रता नहीं खो देती है.
कोर्ट ने कहा- सिर्फ रेप कानून में पति को छूट मिली
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रेप कानून में हम सिर्फ 2 पहलुओं पर विचार करेंगे. साथ ही यह भी देखेंगे कि क्या कोर्ट कानून को बदल सकता है. क्या अपवाद को खत्म करने के लिए कोई और व्यवस्था की जा सकती है?
कोर्ट ने कहा कि सिर्फ बलात्कार के मामले में छूट मिलती है. अगर कोई पति अपने पत्नी के साथ घरेलू हिंसा को अंजाम देते हैं तो उन पर कार्रवाई होती है. हम इसे भी देखेंगे.
भारत में मैरिटल रेप पर बहस क्यों हो रही है?
2022 में हाई कोर्ट ने मैरिटल रेप मामले में विभाजित फैसला दिया. इसके बाद मामले को सुप्रीम कोर्ट भेजा गया. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि शादी के बाद पत्नी व्यक्तिगत स्वतंत्रता नहीं खोती है. उसके साथ रेप की जो घटना होती है, उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है.
नेशनल हेल्थ फैमिली सर्वे में शामिल हर 16 में से एक महिला का कहना था कि उसके पति ने उसके साथ यौन हिंसा की. अगर बड़े परिदृश्य में देखा जाए तो यह आंकड़ा काफी बड़ा है
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