दिल्ली में लाल किला ब्लास्ट की चार्जशीट में बड़े खुलासे हुए हैं, जिसमें 13 आरोपियों के नाम हैं. ब्लास्ट के मास्टरमाइंड डॉक्टर उमर नबी ने खुद को बम से उड़ाया था. वो सुसाइड बॉम्बर था. चार्जशीट में पहली बार सभी आतंकियों की तस्वीरें सामने आई हैं. वहीं, शाहीन सईद के पास मिली पेन ड्राइव से 87 तस्वीरें मिली हैं, जिनमें आतंकी डॉक्टर मुज्जमिल शकील और शाहीन सईद के AK-47, पिस्टल और मैगजीन के साथ देखा जा सकता है.
सभी आतंकी संगठन अंसार गजवात-उल-हिन्द यानी AGuH और AQIS से जुड़े हुए थे. ब्लास्ट के लिए TATP और अमोनियम नाइट्रेट का इस्तेमाल हुआ. इस ब्लास्ट में 11 लोगों की मौत और 29 लोग घायल हुए थे. उमर नबी कार में बैठा था. उसी ने IED का कमांड सिस्टम दबाया था. NIA की चार्जशीट में धमाके को लेकर कई अहम बातें सामने आई हैं.
जांच एजेंसी के मुताबिक, धमाके में इस्तेमाल हुई Hyundai i20 कार वास्तव में एक Vehicle-Borne Improvised Explosive Device (VBIED) थी. यानी कार को ही विस्फोटक से लदे बम के तौर पर इस्तेमाल किया गया था. फॉरेंसिक जांच में कार के मलबे और धमाके वाली जगह से मिले सामान में TATP, अमोनियम नाइट्रेट और पोटैशियम नाइट्रेट जैसे विस्फोटक पदार्थों के निशान मिले हैं.
कार के अंदर कौन था?
चार्जशीट के मुताबिक, घटनास्थल से मिले जैविक नमूनों की DNA जांच में अहम सुराग मिला. शरीर के हिस्सों और नाक से लिए गए स्वैब की जांच में TATP और अमोनियम नाइट्रेट के अंश मिले. NIA का दावा है कि इन नमूनों की DNA फिंगरप्रिंटिंग से उनकी पहचान उमर नबी के तौर पर हुई. जांच एजेंसी के मुताबिक, इसका मतलब यह है कि धमाके के वक्त उमर नबी उसी कार के अंदर मौजूद था.
रेड टेप और मेटल पीस ने खोला राज
चार्जशीट में एक और अहम सबूत का जिक्र है. जांच के दौरान लाल रंग के टेप वाले एक कमांड मैकेनिज्म को बरामद किया गया. इस पर विस्फोटक पदार्थों के निशान मिले. NIA के मुताबिक, यह डिवाइस IED को दूर से या कमांड के जरिए सक्रिय करने के लिए इस्तेमाल किया गया था. एजेंसी का दावा है कि यही कमांड सिस्टम धमाके वाली कार के पास से बरामद हुआ. यानी जांच का निष्कर्ष यह है कि कार में विस्फोटक लगाया गया था. उसे एक खास कमांड मैकेनिज्म के जरिए सक्रिय किया गया.

लाल किला ब्लास्ट के आरोपी आतंकी.
नौगाम थाने में विस्फोट ने भी खोले कई राज
चार्जशीट में नौगाम पुलिस स्टेशन केस नंबर 162/2025 का भी जिक्र है. जांच के दौरान आरोपी मुजम्मिल उर्फ A-4 के किराए के ठिकाने से विस्फोटक बनाने में इस्तेमाल होने वाली कई चीजें बरामद की गई थीं. इनमें विस्फोटक और उसके लिए इस्तेमाल होने वाली सामग्री, केमिकल, लैब उपकरण, टाइमर, बैटरियां और दूसरे सामान शामिल थे. यह सामान फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी के बाहर किराए की जगह से बरामद किए जाने की बात चार्जशीट में कही गई है.
इन बरामद सामान की जांच के लिए उन्हें नौगाम पुलिस स्टेशन लाया गया था. इसी दौरान 14 नवंबर 2025 को नौगाम थाने के परिसर में अचानक धमाका हो गया. इस हादसे में 9 पुलिसकर्मियों की मौत और 29 लोगों के घायल होने की बात चार्जशीट में दर्ज है. धमाका इतना शक्तिशाली था कि मृतकों के शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचा और आसपास की इमारतों को भी काफी नुकसान हुआ.
पूरी कहानी का सबसे अहम हिस्सा
NIA की जांच के मुताबिक, इस पूरे मामले में तीन बातें बेहद महत्वपूर्ण हैं.
Hyundai i20 को VBIED यानी कार बम के तौर पर इस्तेमाल किया गया. कार में मौजूद व्यक्ति की पहचान DNA के जरिए उमर के रूप में हुई. कार के पास से मिला कमांड मैकेनिज्म इस बात का अहम सबूत है कि IED को नियंत्रित तरीके से सक्रिय किया गया था.
यानी चार्जशीट में जांच एजेंसी ने सिर्फ यह नहीं कहा है कि कार में विस्फोटक था, बल्कि फॉरेंसिक सबूतों के आधार पर यह दावा किया है कि कार के अंदर उमर नबी मौजूद था और उसी के जरिए IED को सक्रिय किया गया.
जसीर बिलाल वानी ने यूट्यूब और चैटजीपीटी के जरिए रॉकेट बनाने के तरीके सर्च किए थे. चार्जशीट में ये भी लिखा है कि उसने रॉकेट बना भी लिया था जिसकी टेस्टिंग बाद में इन्होंने टाल दी थी. जासीर बिलाल वानी को 2 ड्रोन भी दिए गए थे ये ड्रोन उसे उमर ने दिए थे.
चार्जशीट में TATP को लेकर बड़ा खुलासा
चार्जशीट के इस हिस्से में NIA ने उस विस्फोटक को लेकर अहम फॉरेंसिक जानकारी दर्ज की है, जिसका इस्तेमाल मामले में किया गया था. जांच के दौरान घटनास्थल से मिले मलबे और अन्य साक्ष्यों की वैज्ञानिक जांच में Tri-Acetone Tri-Peroxide यानी TATP की मौजूदगी सामने आई है.
NIA के मुताबिक, ब्लास्ट के बाद कुल 73 एग्जिबिट जब्त किए गए थे. इनमें से 64 नमूनों की जांच CFSL चंडीगढ़ में कराई गई, जबकि बाकी 9 नमूने NFSU, गांधीनगर भेजे गए. दोनों प्रयोगशालाओं की जांच में TATP के साथ Ammonium Nitrate और Potassium Nitrate की मौजूदगी की पुष्टि हुई.
चार्जशीट में NIA ने इसे अहम कड़ी माना है. एजेंसी का कहना है कि बरामद विस्फोटक सामग्री की संरचना उस सामग्री से मेल खाती है, जिसका इस्तेमाल लाल किला के पास हुए VBIED (Vehicle-Borne Improvised Explosive Device) ब्लास्ट में किया गया था.
TATP को बताया गया मुख्य विस्फोटक
विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर NIA का कहना है कि इस मामले में इस्तेमाल किया गया प्राथमिक विस्फोटक TATP प्रतीत होता है. जांच में अमोनियम नाइट्रेट की मौजूदगी भी मिली है. चार्जशीट के मुताबिक, यह TATP की विस्फोटक क्षमता और संवेदनशीलता बढ़ाने के उद्देश्य से इस्तेमाल किया गया हो सकता है.
हालांकि, जांच एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया है कि पोटेशियम नाइट्रेट सामान्य तौर पर TATP का हिस्सा नहीं होता. इसके बावजूद आरोपियों के पास कृषि-ग्रेड पोटेशियम नाइट्रेट की बड़ी मात्रा मिलने को NIA ने गंभीरता से लिया है.
चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि आरोपियों के कब्जे से Acetone, Hydrogen Peroxide और Hydrochloric Acid जैसी सामग्री तथा मिश्रण और प्रयोग से संबंधित उपकरण बरामद हुए. NIA के अनुसार, इन बरामदगियों से आरोपियों द्वारा विस्फोटक सामग्री तैयार करने और रखने की गतिविधियों की जांच को महत्वपूर्ण आधार मिला.
‘Mother of Satan’ के नाम से भी जाना जाता है TATP
चार्जशीट में TATP जिसे शैतान की मां कहते हैं, उसकी प्रकृति को लेकर भी विशेषज्ञ रिपोर्ट का हवाला दिया गया है. दस्तावेज के मुताबिक, TATP को Acetone Peroxide भी कहा जाता है और इसे बेहद संवेदनशील homemade explosive के तौर पर जाना जाता है. NIA ने दर्ज किया है कि TATP अपनी संवेदनशीलता के कारण अत्यंत खतरनाक है. विशेषज्ञों के अनुसार, यह गर्मी, घर्षण और दबाव जैसी परिस्थितियों के प्रति संवेदनशील हो सकता है. इसी वजह से इसकी बरामदगी और हैंडलिंग को भी गंभीर सुरक्षा जोखिम माना जाता है.
ब्लास्ट के मलबे से लेकर आरोपियों की बरामदगी तक जुड़ती कड़ियां
- इस मामले में जांच की दिशा केवल घटनास्थल से मिले मलबे तक सीमित नहीं रही. NIA ने फॉरेंसिक जांच, बरामद सामग्री और आरोपियों से जुड़े अन्य साक्ष्यों को जोड़कर विस्फोटक की प्रकृति और उसके इस्तेमाल की कड़ी स्थापित करने की कोशिश की है.
- सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दो अलग-अलग फॉरेंसिक संस्थानों की जांच में TATP की मौजूदगी की पुष्टि हुई. इससे जांच एजेंसी के उस दावे को वैज्ञानिक आधार मिलता है कि मामले में इस्तेमाल विस्फोटक सामान्य औद्योगिक विस्फोटक नहीं था, बल्कि अत्यधिक संवेदनशील peroxide-based explosive था.
- चार्जशीट के इस हिस्से से साफ है कि NIA की जांच का एक बड़ा फोकस विस्फोटक की सोर्सिंग, उसे तैयार करने की प्रक्रिया, उसे स्टोर करने और अंतत ब्लास्ट में इस्तेमाल किए जाने की पूरी चेन को स्थापित करना है.
- चार्जशीट में NIA ने Lone Mujahid Pocket Book को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं. जांच एजेंसी के मुताबिक यह कोई सामान्य या धार्मिक किताब नहीं थी, बल्कि इसमें ऐसे ऑपरेशनल तरीकों और गतिविधियों का संकलन था, जिनका इस्तेमाल हिंसक और गैरकानूनी गतिविधियों में किया जा सकता है.
- चार्जशीट के मुताबिक यह सामग्री Inspire Magazine में प्रकाशित हुई थी. NIA का दावा है कि यह मैगजीन अल-कायदा इन द अरबियन पेनिनसुला (AQAP) के मीडिया प्लेटफॉर्म से जुड़ी थी और इसमें अकेले काम करने वाले आतंकी के लिए प्रशिक्षण जैसी सामग्री दी गई थी.
- जांच एजेंसी का आरोप है कि दस्तावेज में हथियारों के इस्तेमाल, निगरानी से बचने, छिपकर आवाजाही, पीछा करने से बचने, संचार के तरीकों और हमले की रणनीति जैसी चीजों के बारे में जानकारी दी गई थी. NIA के मुताबिक, आरोपी इन दस्तावेजों के संपर्क में थे और उनका इस्तेमाल अपनी गतिविधियों के लिए कर रहे थे.
- चार्जशीट में TATP जैसे अत्यधिक संवेदनशील विस्फोटक का भी उल्लेख है. NIA के मुताबिक बरामद सामग्री और जांच से यह सामने आया कि आरोपियों ने विस्फोटक तैयार करने और IED बनाने से जुड़ी जानकारी हासिल की थी. चार्जशीट में इसे Explosive Substances Act, 1908 के तहत गंभीर अपराध बताया गया है.
- चार्जशीट में जांच का एक अहम हिस्सा SoC यानी घटनास्थल से बरामद किए गए सामान की फॉरेंसिक और बायोलॉजिकल जांच को बनाया गया है. NIA के मुताबिक, रेड फोर्ट के पास हुए विस्फोट में कई लोगों की मौत हुई, जबकि कई आम नागरिक घायल हुए. विस्फोट से वाहनों के साथ-साथ पुलिस पोस्ट और आसपास की संरचनाओं को भी नुकसान पहुंचा. घायलों को इलाज के लिए अस्पतालों में ले जाया गया, जिनमें लोक नायक जय प्रकाश नारायण अस्पताल भी शामिल था.
- चार्जशीट में आगे बताया गया है कि घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और उनकी वैज्ञानिक जांच को आरोपी A-1 की भूमिका से जोड़ने की कोशिश की गई है. NIA का दावा है कि इन फॉरेंसिक रिपोर्टों से यह पता चलता है कि आरोपी का विस्फोट की घटना से सीधा संबंध था.
- NIA ने तीन स्तरों पर अपना केस खड़ा किया है. आरोपियों के पास मौजूद आपत्तिजनक सामग्री, विस्फोटक और IED से जुड़ी गतिविधियों के साक्ष्य तथा घटनास्थल से मिले फॉरेंसिक सबूत. एजेंसी का कहना है कि इन सभी कड़ियों को जोड़ने पर A-1 की कथित भूमिका सामने आती है.
Signal ऐप पर कोड नेम से बातचीत
चार्जशीट के मुताबिक, आरोपियों ने आपसी संपर्क के लिए Signal ऐप का इस्तेमाल किया था. जांच में A-7 की पहचान Signal पर Rauldatta नाम से किए जाने की बात सामने आई है. NIA ने जांच के दौरान कई कट्टरपंथी दस्तावेज और साहित्य भी बरामद करने का दावा किया है. इनमें Definition of Jihad, Requirements of Jihad और 21 Aims and Objectives of Jihad समेत जिहाद के समर्थन से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं.
AQAP से जुड़े मैनुअल का भी जिक्र
चार्जशीट में Lone Mujahid Pocket Book/How to Become an Assassin नाम के एक मैनुअल का भी जिक्र है. NIA के मुताबिक यह AQAP से जुड़ा मैनुअल है, जिसमें विस्फोटक, हथियार और गुप्त ऑपरेशन से संबंधित दिशा-निर्देश दिए गए हैं.
जांच एजेंसी का कहना है कि बरामद प्रचार सामग्री में मौजूदा राजनीतिक व्यवस्थाओं को शैतानी और अत्याचारी बताया गया था और उन्हें हिंसक तरीके से खत्म करने की वकालत की गई थी.
उमर नबी की मौत के चलते आरोप हुए समाप्त
चूंकि उमर उन नबी की मौत 10 नवंबर के विस्फोट में ही हो गई थी, इसलिए उसके खिलाफ UAPA, Arms Act और Explosive Substances Act के तहत लगाए गए आरोपों को कानूनी प्रक्रिया के abated कर दिया गया है.
उमर नबी की हैंडबुक फॉर जिहाद!
रेड फोर्ट ब्लास्ट मामले में NIA की चार्जशीट में Lone Mujahid Pocket Book नाम के एक कथित चरमपंथी मैनुअल का जिक्र किया गया है. जांच एजेंसी के मुताबिक, इस दस्तावेज को उमर उन नबी और दूसरे आरोपियों द्वारा कथित तौर पर फॉलो किया जा रहा था.
NIA के अनुसार, यह दस्तावेज Inspire Magazine के अंक 1 से 10 के जरिए प्रकाशित सामग्री से जुड़ा है. Inspire Magazine को अल-कायदा इन द अरबियन पेनिनसुला (AQAP) से संबद्ध बताया गया है.
लोन मुजाहिद के लिए स्टेप-बाय-स्टेप गाइड
चार्जशीट के मुताबिक, इस दस्तावेज को एक Lone Mujahid यानी अकेले आतंकी हमलावर के लिए कदम-दर-कदम गाइड के तौर पर पेश किया गया था. इसमें ऐसी गतिविधियों को Open-Source Jihad के नाम से प्रचारित किया गया था. NIA का आरोप है कि मैनुअल में विस्फोटक, हथियार, वाहनों, आगजनी और गुप्त गतिविधियों से संबंधित ऑपरेशनल जानकारी दी गई थी.
IED और विस्फोटक तैयार करने में इस्तेमाल का आरोप
जांच एजेंसी का दावा है कि आरोपी विस्फोटक तैयार करने और IED बनाने की तैयारी के दौरान इस दस्तावेज में दी गई सामग्री का अनुसरण कर रहे थे. चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि मैनुअल में TATP जैसे विस्फोटक से संबंधित विस्तृत जानकारी मौजूद थी, जिसमें बाजार में आसानी से उपलब्ध रासायनिक पदार्थों से इसे तैयार करने की जानकारी भी शामिल थी. दस्तावेज में IED को दूर से सक्रिय करने वाले रिमोट-कंट्रोल मैकेनिज्म से संबंधित जानकारी भी दी गई थी. यह मैनुअल आरोपियों के कथित आतंकी मॉड्यूल की तैयारी और विस्फोटक बनाने की गतिविधियों में महत्वपूर्ण संदर्भ सामग्री के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था.
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