ओडिशा सरकार ने जन्म के समय लिंगानुपात सुधारने के लिए 5 कमजोर जिलों की पहचान कर वहां निगरानी और जागरूकता अभियान तेज करने का फैसला किया है. इसका मकसद कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाना है.


ओडिशा सरकार ने जन्म के समय लिंगानुपात (सेक्स रेशियो एट बर्थ) में सुधार लाने और भ्रूण लिंग जांच पर रोक को प्रभावी बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है.सरकार ने जन्म के समय लिंगानुपात (सेक्स रेशियो एट बर्थ) में सुधार के लिए पांच सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाले जिलों की पहचान की है.

 

सरकार ने प्रति 1,000 पुरुष जन्मों पर महिला जन्मों की संख्या में निम्न स्थान पर रहने वाले पांच जिलों में निरीक्षण तेज करने, सभी दस्तावेज का सत्यापन सुनिश्चित करने और जन्म के समय लिंग अनुपात में सुधार के लिए गहन जागरूकता अभियान चलाने को कहा है. गर्भाधान पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (पीसी-पीएनडीटी) अधिनियम के तहत गठित राज्य पर्यवेक्षण बोर्ड की बैठक में यह फैसला लिया गया.

इन पांच जिलों की हुई पहचान

सोमवार को भुवनेश्वर में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मुकेश महालिंग की अध्यक्षता में बैठक हुई. इस बैठक में नयागढ़, अंगुल, ढेंकानाल, गंजाम और खुर्दा को जन्म के समय लिंगानुपात के मामले में सबसे कमजोर जिले बताया गया. इन 5 जिलों में लड़कों के मुकाबले लड़कियों की संख्या काफी कम है. वहीं जाजपुर इस सूची में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला जिला रहा.

 

अल्ट्रासाउंड क्लीनिकों की निगरानी

बैठक की अध्यक्षता करते हुए महालिंग ने खराब लिंग अनुपात वाले जिलों में हस्तक्षेपों की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने कहा कि जिला स्तरीय समितियों को मजबूत किया जाएगा, अल्ट्रासाउंड क्लीनिकों का कड़ा निरीक्षण और निगरानी की जाएगी. उन्होंने राज्य में जन्म के समय लिंग अनुपात में सुधार के लिए जन जागरूकता पर अधिक जोर दिया जाएगा. बोर्ड ने पाया कि पीसी-पीएनडीटी अधिनियम के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए कानूनी प्रावधानों का कड़ाई से पालन, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और समुदाय की सक्रिय भागीदारी जरूरी है.

सेक्स रेशियो सुधारने के लिए विशेष अभियान

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि इन जिलों ( नयागढ़, अंगुल, ढेंकानाल, गंजाम और खुर्दा ) में सेक्स रेशियो सुधारने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा. जिला प्रशासन को अल्ट्रासाउंड केंद्रों की जांच तेज करने, सभी रिकॉर्ड का सत्यापन सुनिश्चित करने और व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं. उन्होंने कहा कि जिला स्तरीय निगरानी समितियों को और मजबूत बनाया जाएगा एवं ज्यादा से ज्यादा अल्ट्रासाउंड केंद्रों का नियमित निरीक्षण किया जाएगा.

पीसी-पीएनडीटी कानून का होगा सख्ती से पालन

मंत्री ने स्पष्ट किया कि भ्रूण के लिंग की अवैध जांच और उससे जुड़े मामलों पर पूरी सख्ती बरती जाएगी. उन्होंने अधिकारियों से पीसी-पीएनडीटी अधिनियम का कड़ाई से पालन कराने और किसी भी तरह की लापरवाही पर तुरंत कार्रवाई करने को कहा. सरकार का मकसद कन्या भ्रूण हत्या जैसी अवैध गतिविधियों पर रोक लगाना और बेटियों के जन्म को बढ़ावा देना है. सरकार ने स्पष्ट किया कि अवैध अल्ट्रासाउंड केंद्र, गैरकानूनी भ्रूण लिंग जांच या लिंग चयन जैसी गतिविधियों की जानकारी देने वालों को पहले की तरह 25 हजार रुपये का प्रोत्साहन दिया जाएगा.

649 निरीक्षण, छह अवैध केंद्र सील

अधिकारियों ने बताया 2024 और 2026 के बीच, जिला अधिकारियों ने 649 निरीक्षण किए और राज्य अधिकारियों ने 11 निरीक्षण किए. इस दौरान छह अवैध अल्ट्रासाउंड केंद्रों को सील कर दिया गया.वहीं कई अल्ट्रासाउंड मशीनें जब्त की गईं और सरकारी डॉक्टरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई.

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