आमोद कुमार


आमोद कुमार

बांदा, 3 अगस्त। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से जारी तुलनात्मक अपराध आंकड़ों के अनुसार जनपद बांदा में वर्ष 2012–2017 और 2017–2022 के बीच कई प्रमुख अपराधों में कमी दर्ज की गई है। सरकार ने इसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति, अपराधियों के विरुद्ध चलाए गए सख्त अभियान तथा कानून-व्यवस्था को मजबूत करने की रणनीति का परिणाम बताया है।जारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2012–2017 के दौरान जनपद में डकैती के 2 मामले दर्ज हुए थे, जबकि वर्ष 2017–2022 की अवधि में यह संख्या शून्य रही। बलवा (दंगा) के मामले 285 से घटकर 113, लूट के मामले 76 से घटकर 57 तथा गृहभेदन के मामले 283 से घटकर 254 दर्ज किए गए। सरकार का दावा है कि माफिया और पेशेवर अपराधियों के विरुद्ध लगातार की गई कठोर कार्रवाई का असर अपराधों पर नियंत्रण के रूप में सामने आया है।
महिलाओं की सुरक्षा के क्षेत्र में भी सुधार का दावा किया गया है। सरकार के अनुसार मिशन शक्ति और एंटी रोमियो स्क्वाड जैसे अभियानों के परिणामस्वरूप बलात्कार के मामले 216 से घटकर 163 हो गए। फिरौती के लिए अपहरण के मामले 5 से घटकर 2 तथा अन्य अपहरण के मामले 452 से घटकर 424 दर्ज किए गए।
हत्या सहित अन्य गंभीर अपराधों में भी गिरावट दर्ज होने का दावा किया गया है। आंकड़ों के अनुसार हत्या के मामले 197 से घटकर 171, हत्या के प्रयास (धारा 307) के मामले 177 से घटकर 142 तथा धारा 304 के मामले 90 से घटकर 70 रह गए। गंभीर चोट पहुंचाने के मामलों में उल्लेखनीय कमी दर्ज करते हुए इनकी संख्या 196 से घटकर 90 बताई गई है। वहीं चोरी के मामलों में भी गिरावट दर्ज की गई है और इनकी संख्या 997 से घटकर 789 रह गई।सरकार का कहना है कि अपराधियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई, प्रभावी पुलिसिंग, त्वरित विवेचना तथा न्यायिक प्रक्रिया को गति मिलने से जनपद में कानून-व्यवस्था मजबूत हुई है और लोगों में सुरक्षा की भावना बढ़ी है। हालांकि, इन आंकड़ों की राजनीतिक दल अपनी-अपनी दृष्टि से अलग-अलग व्याख्या कर सकते हैं। साथ ही विशेषज्ञों का मानना है कि कानून-व्यवस्था का समग्र आकलन केवल दर्ज मुकदमों की संख्या के आधार पर नहीं, बल्कि अपराध पंजीकरण, विवेचना, दोषसिद्धि दर और नागरिकों की सुरक्षा की अनुभूति जैसे अन्य मानकों के आधार पर भी किया जाना चाहिए।

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