आमोद कुमार



बांदा। साहित्य भाषाओं की सीमाओं में नहीं बंधता, बल्कि संवेदनाओं का वह सेतु है जो संस्कृतियों और विचारों को जोड़ता है। इसी भावना को साकार करते हुए भोपाल के हिंदी भवन में आयोजित दो दिवसीय साहित्यिक समारोह में बांदा की वरिष्ठ लेखिका, समाजसेविका एवं चिराग फाउंडेशन की प्रणेता डॉ. सबीहा रहमानी को उनके साहित्यिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
1 और 2 अगस्त को हिंदी भवन के महादेवी वर्मा कक्ष एवं नरेश मेहता सभागार में आकार लिटरेरी एंड कल्चरल सोसाइटी के तत्वावधान में वरिष्ठ साहित्यकार संतोष श्रीवास्तव की उर्दू में अनूदित पुस्तक ‘आसमानी आँखों का मौसम’ (कथा संग्रह) का लोकार्पण एवं उस पर परिचर्चा आयोजित की गई। इस कृति का उर्दू अनुवाद डॉ. सबीहा रहमानी ने किया है, जो विशेष रूप से इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बांदा से भोपाल पहुंचीं।
समारोह में अंतरराष्ट्रीय विश्व मैत्रेयी मंच एवं आकार लिटरेरी एंड कल्चरल सोसाइटी के संस्थापक अध्यक्ष इकबाल मसूद, वरिष्ठ साहित्यकार मुज़फ्फर इकबाल सिद्दीकी तथा संस्था की टीम ने डॉ. सबीहा रहमानी को शॉल, स्मृति चिन्ह और प्रशस्ति-पत्र भेंट कर सम्मानित किया।कार्यक्रम में देशभर से आए हिंदी और उर्दू के अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकारों ने सहभागिता की। इस अवसर पर मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी, भोपाल के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. मोहम्मद अहसन, डॉ. नीलिमा रंजन और महमूद मलिक की उपस्थिति रही, जबकि कार्यक्रम का प्रभावी संचालन वरिष्ठ साहित्यकार मुज़फ्फर इकबाल सिद्दीकी ने किया।
अंतरराष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच, मध्य प्रदेश इकाई की मंत्री जया केतकी, उपाध्यक्ष डॉ. नीलिमा रंजन, सचिव डॉ. विनीता राहूरिकर एवं मीडिया प्रभारी रानी सुमिता ने भी डॉ. सबीहा रहमानी का शॉल, पुष्पगुच्छ और माल्यार्पण कर सम्मान किया।साहित्य, भाषा और संस्कृति के इस संगम ने आयोजन को यादगार बना दिया। वक्ताओं ने कहा कि अनुवाद केवल शब्दों का रूपांतरण नहीं, बल्कि विचारों और संवेदनाओं को नई भाषा में नया जीवन देने की सृजनात्मक प्रक्रिया है। डॉ. सबीहा रहमानी का यह कार्य हिंदी और उर्दू साहित्य के बीच संवाद को और अधिक समृद्ध बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान है।

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