जहाँ बादल झुक कर सलाम करें
जहाँ चाँदनी भी आकर आराम करें
इन पहाड़ों की गोद में
जहाँ तारे ज़मीन के इतने पास हों
जहाँ मैं आकाश को छू सकूँ
जहाँ हर साँस ठंडी हवा में डूब जाए
जहाँ पानी का झरना गीत सुनाए
नदियाँ हमसे कुछ बातें करती हैं
जहाँ हर फूल मुस्कुराए
जहाँ दिल की धड़कनें संगीत बनाएँ
जहाँ सुबह का कोहरा चादर ओढ़े आए
और शाम सूरज को गले लगाए
जहाँ खामोशी कुछ इतना कह जाए
कि शब्द की ज़रूरत ना आए
बस वहीं, उन्हीं वादियों में
बस एक उम्र गुज़ारनी है हमें
— रचना • गौरव • सिद्धार्थ
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