मद्रास हाई कोर्ट ने मुख्यमंत्री विजय के उस आदेश को रद्द कर दिया है जिसमें करूर भगदड़ पीड़ितों के परिवारों को सरकारी नौकरी देने की बात कही गई थी. AIADMK ने इस कदम को नियमों की अनदेखी और अन्य सरकारी नौकरी के उम्मीदवारों के साथ अन्याय बताया था.


मद्रास हाई कोर्ट के मदुरै बेंचने करूर भगदड़ पीड़ितों को नौकरी देने का मुख्यमंत्री विजय का आदेश खारिज कर दिया. इस महीने की शुरुआत में, मुख्यमंत्री विजय ने करूर का दौरा किया और सरकार और पार्टी के कई प्रोग्राम में हिस्सा लिया, जिसमें करूर भगदड़ में मारे गए लोगों के परिवारों को सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया था. ANI न्यूज के अनुसार मद्रास हाई कोर्ट ने सोमवार को विजय की TVK सरकार के उस फैसले को खारिज कर दिया, जिसमें करूर भगदड़ में मारे गए लोगों के परिवारों को सरकारी नौकरी देने का फैसला किया गया था.

पिछले साल 27 सितंबर को तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के चीफ और एक्टर विजय की एक रैली के दौरान हुई थी, जिसमें 41 लोग मारे गए थे और कई घायल हो गए थे.इस याचिका की सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों ने कड़े सवाल उठाए. इसमें सरकार का यह कहना अस्वीकार्य है कि वह सामान्य रूप से रोजगार प्रदान कर रही है., सामान्य रोजगार वह होता है जिससे किसी व्यक्ति के परिवार का भरण-पोषण हो सके. यदि सरकार करूर भगदड़ में मारे गए लोगों के परिवारों को रोजगार दे रही है, तो क्या वह सरकारी बस दुर्घटनाओं में मारे गए लोगों के परिवारों को रोजगार दे सकती है? इसी प्रकार, शिवकाशी में सड़क दुर्घटनाएं अक्सर होती रहती हैं. अगर हम उनसे सरकारी रोजगार देने को कहें तो क्या करना चाहिए?

सीएम विजय ने पीड़ितों को नौकरी देने का दिया था आदेश

अक्टूबर 2025 में, सुप्रीम कोर्ट ने एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की जरूरत पर जोर देते हुए जांच को राज्य-लेवल की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) से सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को ट्रांसफर कर दिया था. जांच में रैली के कई पहलुओं की जांच की जा रही है, जिसमें भीड़-मैनेजमेंट के इंतजाम, विजय के आने का टाइमलाइन और पार्टी ऑर्गनाइजर और लोकल अधिकारियों के बीच तालमेल शामिल है.

इस महीने की शुरुआत में, मुख्यमंत्री ने करूर भगदड़ में जान गंवाने वाले पीड़ितों के 32 कानूनी वारिसों को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के आदेश दिए थे. ये अनुकंपा के आधार पर नियुक्तियां राज्य सरकार के राहत और पुनर्वास के उपायों का हिस्सा हैं, जिनका मकसद दुखी परिवारों को वित्तीय सुरक्षा देना है.

AIADMK के वरिष्ठ नेता आरबी उदयकुमार ने इस कदम पर मुख्यमंत्री की कड़ी आलोचना की थी. और इसे “धोखा” बताया था. उन्होंने कहा था कि यह कदम आम परिवारों के लाखों युवाओं की रोजी-रोटी पर हमला है, जो सालों से सरकारी नौकरी पाने का इंतजार करते हैं.

AIADMK ने सरकार के फैसले पर उठाया था सवाल

AIADMK नेता ने आरोप लगाया कि स्टैंडर्ड कानूनी प्रक्रियाओं को दरकिनार करके अस्थायी सरकारी नौकरियां दी गईं. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तमिलनाडु में सभी सरकारी भर्तियां सख्ती से तमिलनाडु पब्लिक सर्विस कमीशन (TNPSC) के जरिए ही होनी चाहिए.

उदयकुमार ने कहा था, “राजनीतिक कारणों से नियमों को तोड़कर मुआवजे के तौर पर सरकारी नौकरी देना एक गलत तरीका है,” और कहा कि यह राज्य के युवाओं के लिए एक चौंकाने वाली और गलत मिसाल कायम करता है.

नवीनतम न्यूज़ अपडेट्स के लिए Facebook, Instagram, Twitter पर हमें फॉलो करें और लेटेस्ट वीडियोज़ के लिए हमारे YouTube चैनल को भी सब्सक्राइब करें।


Leave a Comment:

महत्वपूर्ण सूचना -

भारत सरकार की नई आईटी पॉलिसी के तहत किसी भी विषय/ व्यक्ति विशेष, समुदाय, धर्म तथा देश के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी दंडनीय अपराध है। इस प्रकार की टिप्पणी पर कानूनी कार्रवाई (सजा या अर्थदंड अथवा दोनों) का प्रावधान है। अत: इस फोरम में भेजे गए किसी भी टिप्पणी की जिम्मेदारी पूर्णत: लेखक की होगी।