नीट पेपर लीक मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया गया है. पहले दिन की सुनवाई में सीबीआई के वकील नहीं पहुंचे, जिससे कई सवाल खड़े हो गए हैं. इस स्पेशल स्टोरी में जानिए 4 बड़े सवाल और उनके जवाब.


नीट पेपर लीक मामले अगस्त 2025 में पेपर लीक के मामले में सीबीआई चार्जशीट दाखिल नहीं कर पाई थी, जिसके कारण बिहार में पेपर लीक के आरोपी संजीव मुखिया को जमानत मिल गई थी. इतना ही नहीं, हाल के दिनों में सीबीआई संजीव मुखिया के खिलाफ सबूत नहीं निकाल पाई, जिसके कारण मुखिया को क्लीनचिट मिल गई. 2024 के पेपर लीक मामले में संजीव मुखिया को शुरुआत में सरगना बताया गया था.

में गठित दिल्ली की फास्ट ट्रैक कोर्ट में पहले दिन सुनवाई नहीं हो सकी. यह सुनवाई पेपर लीक के आरोपी दिनेश और विकास बिवाल की जमानत याचिका पर होनी थी. दोनों को सीबीआई ने पेपर लीक मामले में गिरफ्तार किया था. सुनवाई टलने का मुख्य कारण 

का समय पर कोर्ट नहीं पहुंचना था मामला सामने आने के बाद मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार और सीबीआई की गंभीरता पर सवाल उठाए हैं.

सवाल यह भी है कि क्या सीबीआई की लापरवाही का फायपहला सवाल: सीबीआई के वकील क्यों नहीं पहुंच पाए?

स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्पेशल जज अनु ग्रोवर बलीगा को NEET UG 2026 पेपर लीक मामले में गिरफ्तार किए गए दिनेश बिवाल और विकास बिवाल की ज़मानत याचिकाओं पर सुनवाई करनी थी. कोर्ट का पहला दिन था. जज समय पर आईं, आरोपियों के वकील एपी सिंह भी कोर्ट में मौजूद थे, लेकिन कोर्ट को बताया गया कि CBI के वकील अभी मौजूद नहीं हैं.

संभवतः अभी CBI ने फास्ट ट्रैक कोर्ट के लिए पब्लिक प्रोसिक्यूटर की नियुक्ति नहीं की है, क्योंकि कोर्ट ने डायरेक्टर प्रॉसिक्यूशन को NEET पेपर लीक केस के लिए पब्लिक प्रोसिक्यूटर की नियुक्ति करने के लिए कहा.

दूसरा सवाल: आगे केस की सुनवाई पर इसका कोई असर होगा?

आज की सुनवाई करने से कानूनी रूप से केस की जांच, मेरिट या आरोपियों की जमानत पर कोई असर नहीं पड़ेगा. बस फास्ट ट्रैक कोर्ट को लेकर CBI की गंभीरता को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं.

मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने इसको लेकर सवाल उठाया है. कांग्रेस का कहना है कि फास्ट ट्रैक कोर्ट को लेकर सरकार गंभीर नहीं है.

तीसरा सवाल: फास्ट ट्रैक कोर्ट में किस मामले में सुनवाई होनी थी?

नीट पेपर लीक मामले की जांच कर रही CBI के मुताबिक आरोपी दिनेश बिवाल और विकास बिवाल उन 13 लोगों में शामिल हैं जिन्हें एग्जाम से पहले NEET UG पेपर लीक करने के मामले में गिरफ्तार किया गया था.

CBI का आरोप है कि मांगीलाल बिवाल ने अपने बेटे विकास बिवाल के लिए लीक पेपर हासिल करने के लिए शुभम खैरनार से संपर्क किया था. मांगीलाल को यश यादव से 10 लाख रुपये में लीक पेपर मिला था.

इसके बाद आरोपियों ने मिलकर एक बड़े नेटवर्क के जरिए पेपर को दूसरे उम्मीदवारों को 12 लाख रुपये में बेचा. CBI का दावा है कि मांगीलाल के फोन से पेपर बरामद हुए थे.

दिनेश बिवाल और विकास बिवाल दोनों आरोपी फिलहाल 6 अगस्त तक न्यायिक हिरासत में जेल में हैं. दोनों ने जमानत पाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट में याचिका दाखिल की थी.

चौथा सवाल: मामले में आरोपी के वकील ने क्या कहा है?

मीडिया से बात करते हुए आरोपी बिवाल भाइयों के वकील एपी सिंह ने कहा कि फास्ट ट्रैक कोर्ट गठन का फैसला जल्दबाजी में लिया गया है. हम जमानत के हकदार हैं. हमने जांच में सहयोग किया है और अब हमारी कोशिश जमानत पाने की है. हम अपना पक्ष कोर्ट में रखेंगे.

एपी सिंह के मुताबिक न्याय में जमानत को जरूरी माना गया है. कोर्ट में जो चीजें नहीं हो पा रही हैं, उसके लिए हम जिम्मेदार नहीं हैं. हमें फ्री एंड फेयर ट्रायल की उम्मीद है.दा पेपर लीक के आरोपी दिनेश बिवाल और उसके भाई को मिल सकता है? क्योंकि, पहले भी कई मामलों में ऐसा देखा जा चुका है.

 

 

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