इलाहाबाद हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद प्रशासन ने लिया बड़ा फैसला
मथुरा / माट। यमुना एक्सप्रेस-वे पर किसी भी प्रकार के धरना-प्रदर्शन, चक्का जाम या विरोध-प्रदर्शन पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सख्त आदेशों का अनुपालन करते हुए जिला मजिस्ट्रेट चन्द्र प्रकाश सिंह ने यमुना एक्सप्रेस-वे के बड़े हिस्से को नो-प्रोटेस्ट जोन घोषित कर दिया है।
यह कार्रवाई इलाहाबाद उच्च न्यायालय की रिट याचिका संख्या 44461/2025 में 22 मई 2026 को पारित आदेश के तहत हुई है। कोर्ट ने कानून-व्यवस्था को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए आगरा, मथुरा और हाथरस के पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को गौतमबुद्धनगर की तर्ज पर आदेश पारित करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने चेतावनी दी थी कि अगली सुनवाई 22 जुलाई 2026 तक आदेश का अनुपालन नहीं हुआ तो न्यायालय इसे अत्यंत गंभीरता से लेगा।
उल्लंघन करने पर सीधे जेल, दर्ज होगा मुकदमा
प्रशासन ने सभी यात्रियों और संगठनों को सचेत किया है। यदि कोई व्यक्ति या समूह एक्सप्रेस-वे पर एकत्र होकर यातायात बाधित करता है या प्रदर्शन करता है, तो पुलिस बिना वारंट तुरंत गिरफ्तार कर सकती है। दोषियों पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत मुकदमा दर्ज होगा।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत बड़ी कार्रवाई
मथुरा में शांति बनाए रखने के लिए डीएम ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत शक्तियों का प्रयोग कर आदेश जारी किया है। एक्सप्रेस-वे पर प्रदर्शनकारियों को पहले से चिह्नित करना संभव न होने से परिस्थितियों की गंभीरता देखते हुए इसे तुरंत लागू किया गया है।
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