शाहजहाँपुर – शहर को सुरक्षित बनाने के नाम पर नगर निगम ने स्मार्ट सिटी योजना के तहत करीब छह करोड़ रुपये खर्च कर हजारों सीसीटीवी कैमरे लगवाए। दावा था कि अपराध पर नजर रहेगी और घटनाओं का खुलासा आसान होगा। लेकिन हकीकत यह है कि जरूरत पड़ने पर कैमरे ही जवाब दे देते हैं।
ताजा मामला डेयरी संचालक अंकुर यादव की सड़क हादसे में मौत का है। पुलिस को घटना के साक्ष्य जुटाने के लिए आसपास लगे कई सीसीटीवी कैमरों की जांच करनी पड़ी, लेकिन अधिकांश कैमरे खराब मिले। कई कैमरे बंद थे तो कुछ नीचे लटक रहे थे। नतीजा यह रहा कि साक्ष्य जुटाने में पुलिस को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। पंखी चौराहा, खिरनीबाग, बहादुरगंज समेत शहर के कई प्रमुख स्थानों पर बड़ी संख्या में सीसीटीवी कैमरे खराब मिले। वहीं, शहर के कई चौराहों पर लगा आईटीएमएस (इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम) भी पूरी क्षमता से काम नहीं कर रहा है।वर्ष 2023 में ऑपरेशन दृष्टि अभियान के तहत शहर में छह हजार से अधिक स्थानों पर 24 हजार से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। नगर निगम ने स्मार्ट सिटी परियोजना में भी करोड़ों रुपये खर्च किए, लेकिन रखरखाव के अभाव में कई कैमरे निष्प्रभावी हो चुके हैं।नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि खराब कैमरों की मरम्मत जल्द कराई जाएगी। हालांकि सवाल यह है कि जब कैमरों की सबसे अधिक जरूरत होती है, तभी वे बंद क्यों मिलते हैं? करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी यदि सुरक्षा व्यवस्था सबूत जुटाने में मदद न कर सके, तो ऐसे कैमरे केवल खंभों की शोभा बढ़ाने तक ही सीमित रह जाते हैं।
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