सिधौली (सीतापुर)। डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता राजेश कुमार सिद्धार्थ ने उपजिलाधिकारी (एसडीएम) सिधौली पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि 15 जून 2026 को हजारों लोगों की उपस्थिति में प्रशासन द्वारा किए गए वादों को अब तक पूरा नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन को स्थगित कराने के लिए प्रशासन ने विभिन्न मामलों में शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन समय बीतने के बावजूद धरातल पर कोई प्रभावी परिणाम दिखाई नहीं दे रहा है। इसी कारण संगठन ने पुनः आंदोलन का रास्ता अपनाने का निर्णय लिया है और 30 जून 2026 को डॉ. आंबेडकर पार्क बहादुरपुर, सिधौली से मुख्यमंत्री आवास लखनऊ तक विशाल पदयात्रा निकालने की घोषणा की है।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने बताया कि 15 जून को डॉ. आंबेडकर पार्क बहादुरपुर में आयोजित विशाल धरना-प्रदर्शन एवं जनसभा में क्षेत्र के हजारों लोग शामिल हुए थे। कार्यक्रम के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों और आंदोलनकारियों के बीच वार्ता हुई थी। उस समय उपजिलाधिकारी सिधौली ने विभिन्न समस्याओं और मांगों पर शीघ्र कार्रवाई का भरोसा दिया था। प्रशासन के अनुरोध पर ही मुख्यमंत्री आवास तक प्रस्तावित पदयात्रा को स्थगित किया गया था।
उन्होंने कहा कि संगठन ने लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रशासनिक व्यवस्था पर विश्वास करते हुए आंदोलन को रोका था, लेकिन अब तक किसी भी प्रमुख मांग पर संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई। इससे संगठन के कार्यकर्ताओं और समाज के लोगों में गहरा असंतोष व्याप्त है।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने आरोप लगाया कि ग्राम तेजनापुरवा मजरा कठवां तथा ग्राम अहेवा में भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा स्थापना के संबंध में प्रशासन द्वारा सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया गया था। अधिकारियों ने कहा था कि प्रतिमा स्थापना के लिए आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर अनुमति प्रदान की जाएगी, जिससे समाज के लोग अपने महापुरुषों का सम्मान कर सकें। लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
उन्होंने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर केवल एक महान व्यक्ति नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और संविधान के प्रतीक हैं। उनकी प्रतिमा स्थापना की मांग किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं बल्कि समाज के सम्मान और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा विषय है। यदि प्रशासन इस मांग को गंभीरता से नहीं लेता है तो इससे समाज में गलत संदेश जाएगा।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने ग्राम लहूरिवान के मामले को भी गंभीर बताते हुए कहा कि वहां वर्षों से तथागत गौतम बुद्ध की पूजा-अर्चना और बौद्ध परंपराओं का निर्वहन भंते मैकू उर्फ कमलशील द्वारा किया जाता रहा है। बौद्ध वृक्ष के नीचे नियमित रूप से धार्मिक कार्यक्रम और पूजा-अर्चना संपन्न होती रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अराजक तत्वों द्वारा धार्मिक गतिविधियों में बाधा उत्पन्न की गई तथा भंते मैकू को पूजा-अर्चना से रोकने का प्रयास किया गया।
उन्होंने कहा कि इस मामले को प्रशासन के समक्ष उठाया गया था, जिस पर अधिकारियों ने तत्काल पूजा-अर्चना सुनिश्चित कराने तथा धार्मिक स्वतंत्रता में बाधा डालने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का आश्वासन दिया था। लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म और आस्था के अनुसार पूजा-अर्चना करने का अधिकार देता है और किसी भी व्यक्ति को इस अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।
संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने गरीब महिला अमीना खातून के मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अमीना खातून की भूमि पर कथित रूप से भू-माफियाओं द्वारा अवैध कब्जा किए जाने की शिकायत प्रशासन से की गई थी। अधिकारियों ने दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने और पीड़िता को न्याय दिलाने का भरोसा दिया था। लेकिन आज तक न तो प्रभावी कार्रवाई हुई और न ही पीड़ित परिवार को राहत मिल सकी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन लगातार मामलों को टालने का काम कर रहा है। कभी आज, कभी कल और कभी परसों कहकर लोगों को आश्वासन दिया जाता है, लेकिन वास्तविक कार्रवाई नहीं होती। इससे जनता का विश्वास प्रशासनिक व्यवस्था से कमजोर हो रहा है।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा हजारों लोगों के सामने किए गए वादों का सम्मान होना चाहिए। यदि अधिकारी सार्वजनिक रूप से दिए गए आश्वासनों को पूरा नहीं करते हैं तो जनता का भरोसा शासन और प्रशासन दोनों से उठ सकता है। लोकतंत्र में जनता और प्रशासन के बीच विश्वास सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होती है।
इन्हीं मुद्दों पर विचार करने के लिए डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ की एक आपात बैठक आयोजित की गई। बैठक में उपस्थित पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि यदि प्रशासन शीघ्र कार्रवाई नहीं करता है तो 30 जून 2026 को विशाल पदयात्रा निकाली जाएगी। यह पदयात्रा डॉ. आंबेडकर पार्क बहादुरपुर, सिधौली से शुरू होकर मुख्यमंत्री आवास लखनऊ तक जाएगी।
उन्होंने कहा कि इस आंदोलन का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष या अधिकारी का विरोध करना नहीं है, बल्कि पीड़ितों को न्याय दिलाना, बहुजन महापुरुषों के सम्मान की रक्षा करना और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करना है। संगठन लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीकों से अपनी आवाज उठाता रहा है और आगे भी इसी मार्ग पर चलेगा।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने आरोप लगाया कि कुछ प्रभावशाली लोगों और राजनीतिक दबाव के कारण प्रशासन निष्पक्ष निर्णय लेने से बच रहा है। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन वास्तव में निष्पक्ष है तो उसे सभी मामलों में बिना किसी भेदभाव के समान कानून लागू करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बहुजन समाज अपने महापुरुषों के सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं करेगा। यदि समाज के सम्मान और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए बड़ा जनआंदोलन खड़ा करना पड़ा तो संगठन उससे पीछे नहीं हटेगा।
उन्होंने सभी सामाजिक संगठनों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, युवाओं, महिलाओं, बुद्धिजीवियों तथा संविधान में आस्था रखने वाले नागरिकों से अपील की कि वे 30 जून को प्रस्तावित पदयात्रा में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए अपनी आवाज बुलंद करें।
बैठक में उपस्थित लोगों ने एक स्वर में कहा कि यदि प्रशासन ने समय रहते उचित कार्रवाई नहीं की तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। संगठन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष न्याय, समानता, सम्मान और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए है।
अंत में राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार प्रदान करता है। यदि उन अधिकारों की रक्षा नहीं की जाएगी तो समाज लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से संघर्ष करने के लिए बाध्य होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार और प्रशासन जनता की भावनाओं को समझते हुए शीघ्र उचित निर्णय लेगा, अन्यथा 30 जून की पदयात्रा क्षेत्र के इतिहास में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक जनआंदोलन के रूप में दर्ज होगी
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