रिपोर्ट सुधीर वर्मा अब तक न्याय


रिपोर्ट सुधीर वर्मा अब तक न्याय

महमूदाबाद, सीतापुर।
महमूदाबाद विकासखंड की ग्राम पंचायत इनायतपुर के अंतर्गत आने वाले ग्राम पिपरी चांद में सार्वजनिक उपयोग के लिए दर्ज खलिहान की भूमि इन दिनों ग्रामीणों के लिए परेशानी और खतरे का सबब बनी हुई है। गांव के पश्चिम दिशा में स्थित गाटा संख्या 128, जिसका कुल क्षेत्रफल 0.7210 हेक्टेयर है, लंबे समय से साफ-सफाई और समुचित देखरेख के अभाव में घनी झाड़ियों, जंगली वनस्पतियों और लंबी घास से घिरा हुआ है। स्थिति यह है कि खलिहान का अधिकांश हिस्सा अब किसी घने जंगल जैसा दिखाई देने लगा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि सार्वजनिक उपयोग की इस महत्वपूर्ण भूमि की लंबे समय से सफाई और समतलीकरण नहीं कराया गया है। घनी झाड़ियों और ऊंची घास के कारण यहां जहरीले सांप, बिच्छू तथा अन्य विषैले कीड़े-मकोड़ों के पनपने की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों को डर है कि झाड़ियों में छिपे जहरीले जीव कभी भी किसी अप्रिय घटना का कारण बन सकते हैं।

बच्चों और ग्रामीणों की सुरक्षा पर मंडरा रहा खतरा
ग्रामीणों के मुताबिक खलिहान के आसपास सार्वजनिक गतिविधियां होने के कारण यहां लोगों का आवागमन बना रहता है। विशेष रूप से आसपास के बच्चों और ग्रामीणों को इस झाड़ीदार क्षेत्र से होकर गुजरना पड़ता है। ऐसे में किसी जहरीले जीव के अचानक सामने आने से हादसा होने की आशंका से लोग चिंतित हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस भूमि की सफाई नहीं कराई गई तो बरसात के मौसम में समस्या और गंभीर हो सकती है। बारिश के दौरान झाड़ियों और घास में जहरीले जीवों के छिपने की संभावना बढ़ जाती है, जिससे आसपास रहने वाले लोगों के लिए खतरा और बढ़ सकता है।

आंगनवाड़ी केंद्र और देवस्थान भी प्रभावित
ग्रामीणों ने बताया कि गाटा संख्या 128 के आसपास आंगनवाड़ी केंद्र, देवस्थान तथा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र भी स्थित हैं। ऐसे में सार्वजनिक भूमि पर फैली गंदगी और घनी झाड़ियों का असर इन महत्वपूर्ण स्थानों पर भी पड़ रहा है।

आंगनवाड़ी केंद्र के आसपास बच्चों की आवाजाही को देखते हुए ग्रामीण विशेष रूप से चिंतित हैं। उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए केंद्र के आसपास स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण होना बेहद जरूरी है, लेकिन मौजूदा स्थिति इसके विपरीत है।

वहीं, देवस्थान के आसपास भी झाड़ियों और घास के फैलाव से श्रद्धालुओं तथा ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र के आसपास भी समुचित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने की आवश्यकता जताई गई है।

सार्वजनिक भूमि की उपयोगिता पर भी उठे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि जिस भूमि का उपयोग गांव के सामुदायिक कार्यों के लिए होना चाहिए, वह वर्तमान में झाड़ियों और जंगली घास से ढकी पड़ी है। यदि भूमि की नियमित सफाई, झाड़ियों की कटाई और समतलीकरण करा दिया जाए तो इसका बेहतर ढंग से सार्वजनिक उपयोग किया जा सकता है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बार-बार ध्यान दिलाए जाने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। इससे लोगों में संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रति नाराजगी भी बढ़ रही है।

प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग
ग्रामवासियों ने प्रशासन और संबंधित विभागीय अधिकारियों से गाटा संख्या 128 की तत्काल स्थलीय जांच कराने की मांग की है। साथ ही खलिहान की भूमि से झाड़ियों और जंगली घास की सफाई, भूमि का समुचित समतलीकरण, आसपास स्वच्छता व्यवस्था तथा भविष्य में नियमित देखरेख की व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने की मांग उठाई है।

ग्रामीणों का कहना है कि यह मामला केवल साफ-सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे ग्रामीणों, बच्चों और सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा भी जुड़ी हुई है। इसलिए किसी अप्रिय घटना का इंतजार किए बिना प्रशासन को तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करनी चाहिए।

ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि संबंधित अधिकारी मामले का संज्ञान लेकर मौके का निरीक्षण करेंगे और आवश्यक कार्रवाई कराकर खलिहान की भूमि को झाड़ियों एवं जहरीले जीव-जंतुओं के संभावित खतरे से मुक्त कराएंगे।
संदर्भ संख्या : 40015426070760 | दिनांक : 07 अगस्त 2026

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