सेवा में, माननीय श्री अमित शाह जी, गृह मंत्री, भारत सरकार, नई दिल्ली। विषय : डॉ. अंबेडकर महासभा, हजरतगंज, लखनऊ में स्थापित भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की अस्थि कलश, हस्तलिखित भारतीय संविधान, तथागत गौतम बुद्ध एवं बाबा साहेब की प्रतिमाओं को यथास्थान सुरक्षित रखने तथा ऐतिहासिक धरो


सेवा में,
माननीय श्री अमित शाह जी,
गृह मंत्री, भारत सरकार,
नई दिल्ली।
विषय : डॉ. अंबेडकर महासभा, हजरतगंज, लखनऊ में स्थापित भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की अस्थि कलश, हस्तलिखित भारतीय संविधान, तथागत गौतम बुद्ध एवं बाबा साहेब की प्रतिमाओं को यथास्थान सुरक्षित रखने तथा ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण हेतु हस्तक्षेप किए जाने के संबंध में।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि डॉ. अंबेडकर महासभा, हजरतगंज, लखनऊ देश के करोड़ों दलित, शोषित, वंचित, पिछड़े, अल्पसंख्यक एवं बहुजन समाज की आस्था, श्रद्धा एवं प्रेरणा का प्रमुख केंद्र है। इस ऐतिहासिक स्थल पर भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की पवित्र अस्थि कलश, हस्तलिखित भारतीय संविधान, उनकी भव्य प्रतिमा, तथागत गौतम बुद्ध की प्रतिमा तथा ऐतिहासिक बौद्ध वृक्ष स्थापित हैं। यह स्थल सामाजिक न्याय, समानता, बंधुत्व एवं भारतीय संविधान की मूल भावना का प्रतीक माना जाता है।
देशभर से लाखों श्रद्धालु एवं अंबेडकर अनुयायी इस पवित्र स्थल पर पहुंचकर बाबा साहेब को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। यह भी सर्वविदित है कि बाबा साहेब की धर्मपत्नी माता डॉ. सविता अंबेडकर द्वारा यहां अस्थि कलश स्थापित किया गया था, जिससे इस स्थल का ऐतिहासिक एवं भावनात्मक महत्व और अधिक बढ़ जाता है।
वर्तमान समय में समाज में यह चर्चा व्यापक रूप से फैल रही है कि डॉ. अंबेडकर महासभा, हजरतगंज से बाबा साहेब की अस्थि कलश, हस्तलिखित भारतीय संविधान तथा अन्य ऐतिहासिक धरोहरों को स्थानांतरित कर अन्यत्र स्थापित किया जा सकता है। इस प्रकार की चर्चाओं से बहुजन समाज, अंबेडकर अनुयायियों एवं बौद्ध समाज में गहरी चिंता एवं असंतोष व्याप्त है।
हमारा मानना है कि जिस स्थान पर दशकों से बाबा साहेब की अस्थि कलश, प्रतिमाएं एवं बौद्ध वृक्ष स्थापित हैं, वह करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसी धरोहरों का स्थानांतरण जनभावनाओं को आहत कर सकता है तथा सामाजिक तनाव की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।
अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि गृह मंत्रालय के स्तर से आवश्यक हस्तक्षेप करते हुए निम्न मांगों पर विचार करने का कष्ट करें—
बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की अस्थि कलश को उसके वर्तमान स्थान से स्थानांतरित न किया जाए।
हस्तलिखित भारतीय संविधान को डॉ. अंबेडकर महासभा परिसर में ही सुरक्षित रखा जाए।
तथागत गौतम बुद्ध एवं बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की स्थापित प्रतिमाओं को यथास्थान बनाए रखा जाए।
डॉ. अंबेडकर महासभा परिसर एवं वहां स्थापित ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा हेतु विशेष व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
परिसर को राष्ट्रीय महत्व की ऐतिहासिक एवं सामाजिक धरोहर के रूप में संरक्षित किए जाने हेतु आवश्यक कदम उठाए जाएं।
करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़े इस विषय पर कोई भी निर्णय लेने से पूर्व समाज के प्रतिनिधियों एवं संबंधित पक्षों से व्यापक संवाद किया जाए।
महोदय, हमें पूर्ण विश्वास है कि आप देश की सामाजिक सद्भावना, संवैधानिक मूल्यों एवं करोड़ों लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुए इस विषय में आवश्यक हस्तक्षेप करेंगे तथा बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर से जुड़ी इन अमूल्य धरोहरों को उनके मूल स्थान पर सुरक्षित रखने हेतु उचित कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।
आपके सकारात्मक हस्तक्षेप से देशभर के अंबेडकर अनुयायियों, बौद्ध समाज एवं बहुजन समाज में विश्वास और सम्मान की भावना और अधिक मजबूत होगी।
भवदीय
राजेश कुमार सिद्धार्थ
राष्ट्रीय अध्यक्ष
डॉ. अंबेडकर संवैधानिक महासंघ
मोबाइल : 94543 25236

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