25 जून की रात से ही देश भर में विपक्षी नेताओं-कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी का दौर शुरू हो गया


बाराबंकी। आपातकाल एक ऐसी व्यवस्था थी जो लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान पर कुठाराघात करती थी। यही आपातकाल शासनतंत्र के लिए सबक साबित हुई। आपातकाल के 21 महीने बाद जब चुनाव हुए तो जनता ने अपने मताधिकार के जरिए इस तानाशाही शासन के खिलाफ शांतिपूर्ण ढंग से बगावत की और देश को आपातकाल के अभिशाप से मुक्त कराया। तब जाकर हिन्दुस्तान में लोकतंत्र की बहाली हुई।

उक्त विचार गांधी भवन में आपातकाल दिवस की 47वीं वर्षगांठ पर गांधी जयन्ती समारोह ट्रस्ट द्वारा आयोजित संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे आपातकाल बंदी एवं लोकतंत्र रक्षक सेनानी राजनाथ शर्मा ने व्यक्त किए।

श्री शर्मा ने बताया कि 25 जून की रात से ही देश भर में विपक्षी नेताओं-कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी का दौर शुरू हो गया। जयप्रकाश नारायण, मोरारजी देसाई, चौधरी चरण सिंह, मधु लिमए, अटल बिहारी वाजपेयी, बीजू पटनायक, लालकृष्ण आडवाणी, मधु दंडवते, जार्ज फर्नांडिस सरीखे देश के तमाम नेताओं व कार्यकर्ताओं को मीसा यानी आंतरिक सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। जो लोग पुलिस से बचकर भूमिगत हो गए, उन्होने भूमिगत रहते हुए आपातकाल का विरोध किया।

श्री शर्मा ने कहा कि आपातकाल के बाद लोकतांत्रिक व्यवस्था तो बहाल हुई, लेकिन सरकारों की जनविरोधी नीतियों के प्रतिरोध में उठने वाली आवाज का दमन करने की प्रवृत्ति अभी भी कायम है। ऐसे में काला अध्याय बन चुके आपातकाल का पुनः भारत में अभिउदय न हो इसके लिये जनता, सरकार और जन प्रतिनिधियों को पूरी तरह से संकल्पित होना चाहिए।

कार्यक्रम का संचालन पाटेश्वरी प्रसाद ने किया। संगोष्ठी में प्रमुख रूप से समाजसेवी अशोक शुक्ला, प्रसपा नेता धनंजय शर्मा, विनय कुमार सिंह, हुमायूं नईम खान, मृत्युंजय शर्मा, वासिक रफीक वारसी, नीरज दूबे, अशोक जायसवाल, शिवा शर्मा, मनीष सिंह, सत्यवान वर्मा, रंजय शर्मा, राजेश यादव, साकेत मौर्य, अनिल यादव सहित कई लोग उपस्थित हुए।

जारी कर्ता
पाटेश्वरी प्रसाद

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Rajesh Kumar Siddharth

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राजेश कुमार सिद्धार्थ अबतक मीडिया ग्रुप के संपादक-इन-चीफ हैं, जिन्हें 25 वर्षों से अधिक का पत्रकारिता जगत में अनुभव प्राप्त है, और जो अपनी कुशल नेतृत्व क्षमता से अबतक मीडिया ग्रुप

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