धार (नईदुनिया प्रतिनिधि)। सामाजिक परंपरा में पैसे के लेनदेन के विवाद में की गई हत्या के मामले में न्यायालय ने पांच दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही अर्थदंड भी लगाया है। यह मामला इसलिए पेचीदा हो गया था क्योंकि मुख्य गवाह भी अपने बयान से पलट गई थी। न्यायालय ने डाक्टर की रिपोर


धार (नईदुनिया प्रतिनिधि)। सामाजिक परंपरा में पैसे के लेनदेन के विवाद में की गई हत्या के मामले में न्यायालय ने पांच दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही अर्थदंड भी लगाया है। यह मामला इसलिए पेचीदा हो गया था क्योंकि मुख्य गवाह भी अपने बयान से पलट गई थी। न्यायालय ने डाक्टर की रिपोर्ट और मौके की परिस्थिति के मद्देनजर पांच आरोपितों को दोषी माना। उसके आधार पर आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

गौरतलब है कि 27 व 28 दिसंबर 2017 की मध्य रात्रि करीब 12 बजे जामंदा रोड फोरलेन के पास आरोपित राकेश दिलीप, रूपेश दिलीप, अजय मांगीलाल, गणेश मांगीलाल, काला राजू निवासी धार ने जयराम के साथ बस स्टैंड पर कालू की शराब की दुकान पर बैठकर शराब पी थी। वहां से आरोपित अपनी बाइक से जयराम व उसकी बहन दुर्गीबाई को लेकर मोटरसाइकिल पर फोरलेन पर ग्राम जेतपुरा तरफ निकले। रात्रि करीब 12 बजे जामंदा फाटे पर राजा सेठ के खेत पर आरोपितों ने जयराम को पकड़ लिया। आरोपित गणेश ने जयराम के सिर पर पत्थर मारा, अज्जु ने दुर्गीबाई को पकड़ रखा था। दुर्गीबाई चिल्लाई तो आरोपितों ने कहा कि तुमने कुछ बोला तो तुझे जान से मार देंगे। जयराम को मारने के बाद दुर्गीबाई को मोटरसाइकिल पर बैठाकर धार लाए। आरोपित राकेश ने दुर्गीबाई को अपनी पत्नी बनाकर रख लिया था। समाज की प्रथा के अनुसार जयराम आरोपित राकेश से झगड़े के रुपये की मांग कर रहा था। इसलिए आरोपितों ने मिलकर जयराम की हत्या कर दी। घटना के दूसरे दिन सुबह चौकीदार राधेश्याम ने जयराम की लाश को पडा हुआ देखा तो पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने हत्या का प्रकरण कायम किया। तत्कालीन अनुसंधानकर्ता भंवर सिंह वसुनिया थाना प्रभारी द्वारा प्रकरण की जांच कर अभियोजन साक्षियों के कथन के बाद आरोपितों के विरुद्ध प्रकरण चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश सुरेन्द्रसिंह गुर्जर के न्यायालय में विचारण के लिए प्रस्तुत किया गया। अभियोजन की ओर से प्रकरण मे 11 गवाहों के कथन न्यायालय में कराए गए। प्रकरण में गवाहों ने पुलिस कहानी का समर्थन नहीं किया। मौके की प्रमुख साक्षी दुर्गीबाई ने न्यायालय में उपस्थित होकर मुख्य परीक्षण में पुलिस कहानी व घटना का समर्थन किया। आगामी पेशी पर वह मुख्य परीक्षण से पलटते हुए प्रतिपरीक्षण में घटना का समर्थन नहीं किया। न्यायालय द्वारा दुर्गीबाई के कथन को मौके की परिस्थिति व डाक्टर एचके गिरवाल के पोस्टमार्टम रिपोर्ट के कथन को विश्वसनीय माना। दोषियों को आजीवन कारावास एवं 5000-5000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया। आरोपितों को जेल भेजा गया। प्रकरण में अभियोजन की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक शरद कुमार पुरोहित द्वारा पैरवी की गई ।

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Rajesh Kumar Siddharth

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राजेश कुमार सिद्धार्थ अबतक मीडिया ग्रुप के संपादक-इन-चीफ हैं, जिन्हें 25 वर्षों से अधिक का पत्रकारिता जगत में अनुभव प्राप्त है, और जो अपनी कुशल नेतृत्व क्षमता से अबतक मीडिया ग्रुप

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