रक्षा संपदा विभाग की भूमियों के लिए दिल्ली से आई टीम ड्रोन कैमरे के माध्यम से सर्वे कर रही


रक्षा संपदा विभाग की भूमियों के लिए दिल्ली से आई टीम ड्रोन कैमरे के माध्यम से सर्वे कर रही

महू कैंट क्षेत्र में पिछले कई दिनों से ड्रोन कैमरे के माध्यम से सर्वे चल रहा है। सर्व का काम दिल्ली से आई विटटेक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की कंपनी कर रही है। कैंट बोर्ड के सिटी इंजिनियर एचएस कोलाय ने बताया कि भारत सरकार द्वारा रक्षा संपदा विभाग भूमियों की निगरानी के लिए ड्रोन कैमरे के माध्यम से सर्वे किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से सर्वे को लेकर आदेश प्राप्त हुए है। जबकि महू कैंट ही नही भारत के 62 कैन्टोनमेंट में इसी तरह का सर्वे सरकार रक्षा मंत्रालय द्वारा करवाया जा रहा है। हालांकि उन्ही भूमियों का सर्वे चल रहा है,जो रक्षा संपदा विभाग के अधीनस्थ है। सर्वे करने का काम  आई विटटेक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की कंपनी को सौंपा गया है,और पांच किलो मीटर के दायरे में ड्रोन कैमरा चलाया जा रहा है। दरअसल सर्वे होने की जानकारी लोगो को लगी तो शहर में अवैध अतिक्रमण‌ या नगर पालिका बनने की चर्चा जोरशोर से चलने लगी। जब इस संबंध में श्री कोलाय से जानना चाहा तो उन्होंने कहा कि नगर पालिका या अवैध अतिक्रमण के मुद्दे से इस सर्वे से कुछ लेनादेना नही है। बल्कि सर्वे का काम अलग है। जबकि कैंट बोर्ड क्षेत्र में ड्रोन सर्वे से डिजिटली रिकॉर्ड के लिए देश की 62 कैंट बोर्ड क्षेत्र की संपत्ति और क्षेत्र का ड्रोन के माध्यम से सर्वे किया जा रहा है। रक्षा मंत्रालय द्वारा देशभर की 62 कैंट बोर्ड द्वारा संपत्ति और क्षेत्र का ड्रोन सर्वे करा रही है। ताकि सभी तरह का रिकार्ड डिजिटली तरीके से तैयार हो सके। कुछ परिषद में पहले ही सर्वे कार्य पूरा हो चुका है। लेकिन महू छावनी परिषद में जुलाई महीने की शरुआत में ड्रोन सर्वे होना था। लेकिन बारिश के कारण और मौसम की खराबी के चलते सर्वे नही हो पाया था। अब मौसम भी साफ हो चुका है। दरअसल बीच में भी सर्वे हुआ था।परंतु किसी टेक्निकल दिक्कत के कारण दोबारा शुरू किया गया। अब बारिश रुकते ही  दोबारा सर्वे किया जा रहा है। छावनी परिषद के इंजीनियर कलोया ने बताया कि इस सर्वे का क्षेत्र में हो रहे। स्थानीय अतिक्रमण से कोई लेना देना नहीं है। सर्वे के बाद किसी प्रकार की कोई कार्यवाही भी नहीं होगी। सर्वे में सेना की एवन और ए टू लैंड छोड़कर रक्षा संपदा और परिषद की 300 एकड़ जमीन को शामिल किया गया है। जो सर्वे के बाद ही स्पष्ट हो जाएगा और इसकी रिपोर्ट केंद्र सरकार को बनाकर सौंप दी जायेगी।

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