दिनांक 11सितम्बर 2022 को कैंडल मार्च जो डॉक्टर अम्बेडकर मूर्ति हज़रत गंज चौराहा पर सायं 6 बजे इन्द्र मेघवाल के हत्यारे और बिलकिस बानो के बलात्कारियों को फांसी दिलाने के लिए प्रस्तावित है के उपलक्ष में राष्ट्रपति के नाम संबोधित............


दिनांक 11सितम्बर 2022 को कैंडल मार्च जो डॉक्टर अम्बेडकर मूर्ति हज़रत गंज चौराहा पर सायं 6 बजे इन्द्र मेघवाल के हत्यारे और बिलकिस बानो के बलात्कारियों को फांसी दिलाने के लिए प्रस्तावित है के उपलक्ष में राष्ट्रपति के नाम संबोधित............
                            ज्ञापन
प्रतिष्ठा में,
            विदुषी श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी,
                 महामहिम राष्ट्रपति,
             भारत गणराज्य, नई दिल्ली।
विषय: भारत में फैले जातिवादी आतंकवाद व दुर्दांत   बलात्कारियों की सज़ा मुआफ करने के सन्दर्भ मे।
माध्यम: पुलिस आयुक्त लखनऊ
महामहिम जी,
              हम भी उसी भारत गणराज्य के नागरिक हैं जिसकी आप प्रथम नागरिक और मुखिया हैं। देश की आज़ादी के 75 वर्ष और संविधान को आत्मर्पित किये हुए 73 वर्ष से अधिक समय व्यतीत हो चुका है। संविधान के अनुच्छेद 14 में देश के प्रत्येक नागरिक को समानता का अधिकार प्राप्त है। संविधान का अनुच्छेद 17 बयान करता है कि अस्पृश्यता का अन्त किया जाता है और उसका किसी भी रूप में आचरण निषिद्ध किया जाता है।"अस्पृश्यता से उपजी किसी निर्योग्यता को लागू करना अपराध होगा जो विधि के अनुसार दंडनीय है"।
     इतने वर्षों के उपरान्त भी किसी अशिक्षित नही बल्कि एक शिक्षक द्वारा अस्पृश्यता के कारण एक शिशु इन्द्र मेघवाल को घड़ा छूने से निर्योग्य घोषित किया गया। उद्घोषणा के संज्ञान के अभाव में इन्द्र ने घड़ा छूने की गलती की ऐसा माना एक जातिवादी आतंकवादी मानसिकता के शिक्षक ने। आतंकवादी का धर्म ही है आतंक पैदा करना। जालौर के शिक्षक ने गुरू की भूमिका विस्मृत कर ध्यान में रखा आतंक के धर्म को। दहशत फैलाने की मंशा से क्रूर आतंकी ने एक होनहार छात्र की बेरहमी से हत्या कर दी।
         देश के सजग नागरिक आपसे दर्ज़ प्रकरण मे हस्तक्षेप करने की याचना करते हैं कि आतंकी जिसे गलती से हमने शिक्षक मान लिया था को देशद्रोही घोषित करने की प्रक्रिया प्रारम्भ कराएं। देश में दहशत पैदा करने वाले देशद्रोही को अविलम्ब फांसी हो, संस्थाओं को निर्देशित करना चाहें। इन्द्र मेघवाल एक होनहार छात्र था। उसके परिवार का भविष्य उसकी मेधा पर ही टिका था लिहाजा राजस्थान या केन्द्र सरकार से उसके परिवार को मुआवजे के रूप में ₹5करोड़ की अनुग्रह राशि दिलाने की व्यस्था करें। साथ ही इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति न हो संघीय सरकारों को हिदायत देना चाहें।
      महामहिम जी! देश ही नही दुनिया के दिल को दहला देने वाली घटना को भी आपके संज्ञान में पूरी विनम्रता से लाना चाहता हूं। एक पीड़िता है जिसका नाम है बिलकिस बानो। यह इतिहास के पन्नों में स्याह अक्षरों में दर्ज़ गुजरात घटना की एक पीड़ित महिला है। काश! यह भी अपने परिवार की अन्य सदस्यों की भांति दरिंदो द्वारा मार दी जाती तब दिन में इसे रोज़ तिल तिल कर मरना तो नही पड़ता! आप बेहतर जानती हैं कोई स्वतः अपने लिए या स्वजनों के लिए यूं ही मौत के लिए नही गिड़गिड़ाता। जब ज़िन्दगी से हार चुका हो, देश की न्यायायिक व्यवस्था से विश्वास उठ गया हो तभी लाचार होकर मौत की याचना करता है।
       महामहिम जी, कितनी मुश्किलों के बाद एक लाचार महिला उन दरिंदों को सज़ा दिला पाई होगी, जिन्होंने उसकी आंखों के सामने खुलेआम उसकी मां और तीन बहनों के साथ सामूहिक बलात्कार किया फिर सभी की क्रूरतम हत्या की हो। तदोपरांत उस 21वर्षीय महिला के साथ खुलेआम सामूहिक बलात्कार किया हो जो कि 5 महीने के गर्भ से थी और उसकी साढ़े तीन साल की बच्ची की हत्या की हो ऐसे दुर्दांत बलात्कारियों को संस्कारिक घोषित कर सज़ा माफ़ करना कैसे उचित हो सकता है? जब से यह 11 वहशी दरिंदे जेल से बाहर निकले हैं तभी से इन्हें इतना महिमामंडित किया जा रहा जैसे यह हत्यारे और बलात्कारी न होकर एक योद्धा हैं और पाकिस्तान के लाहौर में भारतीय झण्डा गाड़ दिए हों। प्रतीत होता है इस गणराज्य को कुछ उद्दंड जंगल बनाना चाहते हैं जहां नरभक्षियों का एक छत्र राज स्थापित करना चाहते हैं। पीड़ित महिला है कोई जानवर नही जिसकी अपनी कोई संवेदना अभिव्यक्ति के बिना ही दबी रह जाए। वह लाचार  किस भय के इस माहौल में जी रही होगी कल्पना से परे है।
        आप इस गणराज्य की मुखियां हैं। उपर्युक्त वर्णित घटनाएं कहीं से भी न्यायायिक चरित्र प्रदर्शित करती हैं? यदि नही तो अविलंब इनकी सज़ा कम करने वाले पक्षपाती भारतीय गणराज्य के संस्थाओं में बैठे कारकूनों की घिनौनी हरकत को सुधारते हुए इन वहशी दरिंदों को अविलंब जेल भेजने का आदेश करना चाहें। इनकी सज़ा सिर्फ़ जेल ही नही है अपितु इन्हें सामूहिक फांसी दी चाहिए ताकि नरभक्षी बने दो पैर के जानवरों को मुकम्मल सज़ा मिल सके। सभ्य समाज में इनके लिए कोई स्थान नही है। व्यस्था देना चाहें और देश के सजग व जीवन्त नागरिकों को अनुग्रहित होने का अवसर प्रदान करें।
      भवनिष्ठ: गौतम राणे सागर,
                   राष्ट्रीय संयोजक,
              संविधान संरक्षण मंच।

नवीनतम न्यूज़ अपडेट्स के लिए Facebook, Instagram, Twitter पर हमें फॉलो करें और लेटेस्ट वीडियोज़ के लिए हमारे YouTube चैनल को भी सब्सक्राइब करें।


Leave a Comment:

महत्वपूर्ण सूचना -

भारत सरकार की नई आईटी पॉलिसी के तहत किसी भी विषय/ व्यक्ति विशेष, समुदाय, धर्म तथा देश के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी दंडनीय अपराध है। इस प्रकार की टिप्पणी पर कानूनी कार्रवाई (सजा या अर्थदंड अथवा दोनों) का प्रावधान है। अत: इस फोरम में भेजे गए किसी भी टिप्पणी की जिम्मेदारी पूर्णत: लेखक की होगी।