बांदा -आज श्रावण मास के अंतिम दिन इस पावन पर्व को बड़े हर्षोल्लास के साथ विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी मनाया गया। 


बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया भाई बहन के प्रेम का प्रतीक माने जाने वाला त्यौहार रक्षाबंधन

बांदा -आज श्रावण मास के अंतिम दिन इस पावन पर्व को बड़े हर्षोल्लास के साथ विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी मनाया गया। 

सैकड़ों की तादाद में माताऐं बहने अपने-अपने घरों से सज धज कर हाथ में कजलियां लेकर गुट के गुट बनाकर गाजे बाजे के साथ 
मव ई बुजुर्ग गांव के गोसाई तालाब में जाकर कजलियों को विसर्जित किया गया।    
कजली खोटने, के बाद सभी बहनों ने अपने अपने घर पहुंचकर अपने छोटे बड़े भाईयो को रक्षासूत्र राखी बाधंती है तो वहीं भाई भी अपनी बहनो की रक्षा करने का संकल्प लिया, व भाईयो ने अपने बहनों को विभिन्न प्रकार के उपहार गिफ्ट भी दिया है 

इस त्यौहार को लेकर माताओं बहनों तथा बड़े बुजुर्गों का मानना है कि इस त्यौहार की शुरुआत द्वापर युग में हुई थी खेल खेल में भगवान श्री कृष्ण के हाथ से रक्त बहने लगा तो द्रोपदी ने अपने दुपट्टे का कुछ हिस्सा फाड़ कर भगवान श्री कृष्ण के हाथ में बांधा तब से इस प्रथा को भाई और बहन के पावन प्रेम के अटूट बंधन के रूप में प्रतिवर्ष मनाया जाता है।

वही माताओं बहनों ने बताया कि प्रातः काल से लेकर मध्यकाल तक कजलियों को लेकर विसर्जित किया जाता है तत्पश्चात सभी बहने अपने अपने भाइयों के मस्तक में हल्दी चावल का तिलक कर तथा मिठाई खिलाकर भाइयों की कलाई में पवित्र रक्षा सूत्र बांधतीं हैं और भाई अपनी अपनी बहनों को आजीवन रक्षा करने का वचन देते हैं साथ ही साथ उपहार भी भेंट करते हैं

मामला शहर मुख्यालय से सटे हुए गांव मवई बुजुर्ग का है

नवीनतम न्यूज़ अपडेट्स के लिए Facebook, Instagram, Twitter पर हमें फॉलो करें और लेटेस्ट वीडियोज़ के लिए हमारे YouTube चैनल को भी सब्सक्राइब करें।


Leave a Comment:

महत्वपूर्ण सूचना -

भारत सरकार की नई आईटी पॉलिसी के तहत किसी भी विषय/ व्यक्ति विशेष, समुदाय, धर्म तथा देश के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी दंडनीय अपराध है। इस प्रकार की टिप्पणी पर कानूनी कार्रवाई (सजा या अर्थदंड अथवा दोनों) का प्रावधान है। अत: इस फोरम में भेजे गए किसी भी टिप्पणी की जिम्मेदारी पूर्णत: लेखक की होगी।