खुशियाँ कम और अरमान बहुत है, जिसे भी देखो परेशान बहुत हैं, करीब से देखा तो निकला रेत का घर, मगर दूर से इसकी शान बहुत हैं.


 चाहे फेरे ले लो या कहो कबूल हैं, अगर दिल में प्यार नहीं तो सब फ़िजूल हैं.

हम जिस चेहरे के साथ पैदा होते है वो हमारा चयन नहीं होता, मगर जिस चरित्र के साथ हम मरते हैं उस फसल के हम ख़ुद जिम्मेदार होते हैं. वह हमारे शब्दों, विचारों और कार्यों का दर्पण होता हैं.

 किसी की भूल पर नाराज होने से पहले, अपनी दस भूलों को भी गिल लो… वो कब और किन परिस्थितियों में हुई थी.

डोर लम्बी हो इसका मतलब यह नही की पतंग बहुत ऊपर तक जायेगी… उड़ाने का तरीका आना चाहिए. दौलत ज्यादा का मतलब सफ़ल जीवन नहीं… जीने का सलीका आना चाहिए.

एक दिन शिकायत तुम्हें ‘वक्त’ और जमाने से नहीं खुद से होगी… कि जिन्दगी सामने थी और तुम दुनिया में उलझे रहें.

औरत खुद एक बहुत बड़ी ताकत है. इतनी बड़ी कि “मर्द” पैदा करती हैं.

नादान लोग ही जीवन का आनन्द लेते है, हमने ज्यादा समझदारो को मुश्किल में ही देखा हैं.

जिन्दगी में दो लोगों का होना बहुत जरूरी है… एक कृष्ण जो ना लड़े फिर भी जीत पक्की कर दे, दूसरा कर्ण जो हार सामने हो फिर भी साथ ना छोड़े.

जब तक तुम दूसरों को प्रभावित करना चाहते हो… समझो अहंकार में हो.उसने मुझे दी कठिनाईयाँ,
हिम्मत बढ़ाने के लिए.

मैंने भगवान से मांगी बुद्धि,
उसने दी उलझने
सुलझाने के लिए.

मैंने भगवान से मांगी समृद्धि,
उसने दी मुझे समझ,
काम करने के लिए.

 

मैंने भगवान से माँगा प्यार,
उसने दिए मुझे दुःखी लोग,
मदद करने के लिए.

मैंने भगवान से मांगी हिम्मत,
उसने दी परेशानियां,
हिम्मत बढ़ाने के लिए.

मैंने भगवान से माँगा वरदान,
उसने दिए मुझे अवसर,
उन्हें पाने के लिए.

 

वो मुझे नहीं मिला जो मैंने माँगा था,
मुझे वो मिल गया जो मुझे चाहिए था.


गरीब मीलों चलता है
भोजन पाने के लिए,
अमीर मीलों चलता है
उसे पचाने के लिए.

किसी के पास खाने के लिए
एक वक्त की रोटी नहीं,
किसी के पास एक रोटी
खाने के लिए वक्त नहीं.

 

कोई अपनों के लिए
अपनी रोटी छोड़ देता हैं,
कोई रोटी के लिए
अपनों को छोड़ देता हैं.

कोई दौलत के लिए
सेहत खो देता हैं,
कोई सेहत पाने के लिए
दौलत खो देता है.

कोई ऐसे जीता है जिसे कभी मरेगा नहीं,
और कोई ऐसे मर जाता है जैसे कभी जिया ही नहीं.

दुखी होने के 10 रास्तें | Sundar Vichar

देरी से सोना और देरी से उठना,
लेन-देन का हिसाब न रखना,
किसी के लिए कुछ ना करना,
हमेशा स्वयं कल इए ही सोचना,
स्वयं की बात को ही सत्य बताना,
किसी का विश्वास न करना,
बिना कारण झूठ बोलना,
कोई भी काम समय से न करना,
बिना मांगें सलाह देना,
भूतकाल के सुख को याद करना.

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