राकेश पांडे ब्यूरो चीफ गोरखपुर। गोरखपुर जिला जेल से मुलाकात की व्यवस्था में सेंधमारी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ पॉक्सो एक्ट के तहत बंद कैदी अपने माता-पिता से मिलने के निर्धारित कोटे का इस्तेमाल चालाकी से अपनी प्रेमिकाओं को बुलाने के लिए कर रहे हैं। इस ‘खेल’ का खुलासा तब हुआ जब दूर-दराज से आए माता-पिता अपने बेटों से मिले बिना ही रोते हुए वापस लौटने लगे। कुछ पीड़ितों की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए जेल प्रशासन ने अब मुलाकात के नियमों को बेहद सख्त कर दिया है और माता-पिता के लिए आधार कार्ड का भौतिक सत्यापन व छायाप्रति जमा करना अनिवार्य कर दिया है।
जेल के नियमों के मुताबिक, किसी भी मुलाकाती को सीधे कैदी से मिलने नहीं दिया जाता। पहले कैदी से पूछा जाता है कि क्या वह अमुक व्यक्ति से मिलना चाहता है। कैदी की सहमति मिलने पर ही मुलाक़ात पर्ची कटती है।
इसी नियम की आड़ लेकर पॉक्सो के कुछ बंदी माता-पिता के तय कोटे वाले दिन अपनी प्रेमिकाओं को जेल बुला लेते थे। कैदी की सहमति होने के कारण प्रेमिकाएं पहले ही मिलकर चली जाती थीं। इसके बाद जब बूढ़े माता-पिता अपने लाडले से मिलने जेल के गेट पर पहुंचते, तो उन्हें पता चलता कि उनके बेटे का ‘मुलाकात कोटा’ आज का खत्म हो चुका है।
इन 3 मामलों ने खोली व्यवस्था की पोल-
* केस 1 (गोला थाना क्षेत्र): पॉक्सो एक्ट में बंद एक कैदी से मिलने उसके माता-पिता जेल पहुंचे। गेट पर पता चला कि उनके आने से पहले ही एक लड़की उनके बेटे से मिलकर जा चुकी है। थक-हारकर माता-पिता को मायूस लौटना पड़ा।
* केस 2 (झंगहा थाना क्षेत्र): यहाँ भी बुजुर्ग माता-पिता जब जेल पहुंचे, तो उन्हें अधिकारियों ने दो टूक कह दिया—“आपके बेटे की अनुमति से उसकी गर्लफ्रेंड मिलकर जा चुकी है, इस बार का कोटा पूरा हो गया, अब अगली बार आना।”
* केस 3 (हरपुर बुदहट थाना क्षेत्र): इस मामले ने तो हद ही कर दी। माता-पिता जेल के बाहर कतार में खड़े ही थे कि तभी कैदी की प्रेमिका भी वहां आ धमकी। कैदी ने चालाकी दिखाते हुए अंदर से प्रेमिका के नाम पर सहमति दे दी और बेचारे माता-पिता बाहर ही खड़े रह गए।
जेल अधीक्षक, गोरखपुर डीके पांडेय का कहना है की ऐसी गंभीर शिकायतों को बेहद संज्ञान में लिया गया है। इस फर्जीवाड़े और अव्यवस्था पर तुरंत अंकुश लगाने के लिए अब पॉक्सो एक्ट के बंदियों से मिलने आने वाले माता-पिता के लिए आधार कार्ड की फोटोकॉपी देना और मूल कार्ड दिखाना अनिवार्य कर दिया गया है। पहचान का कड़ाई से सत्यापन किया जा रहा है ताकि व्यवस्था पारदर्शी रहे और वास्तविक परिजनों को कोई परेशानी न हो।
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