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अब तक न्याय नीरज कश्यप तहसील रिपोर्टर
राकेश पांडे ब्यूरो चीफ गोरखपुर। बॉलीवुड के गॉड फादर हैं हरिशंकर तिवारी के रिश्तेदार
पंडित हरिशंकर तिवारी का माफियायों का पितामह कहा जाता है लेकिन क्या आपको पता है कि उनके रिश्तेदार मुंबइया सिनेमा यानि की बॉलीवुड़ के भी गॉडफादर हैं..हरिशंकर तिवारी की बेटी कामिनी दुबे देश की बड़ी फिल्मकार हैं जिनकी कंपनी बॉम्बे टॉकीज फिल्म प्रोडक्शन की नर्सरी मानी जाती है..भारतीय सिनेमा में बॉम्बे टॉकीज को पिलर कहा जाता है..ये कंपनी की मालिकिन हरिशंकर तिवारी की बेटी कामिनी दुबे हैं..
बॉम्बे टॉकीज की स्थापना इंडियन सिनेमा के पिलर र राजनारायण दुबे ने स्थापित की थी.. राजनारायण दुबे कामिनी दुबे के ससुर और हरिशंकर तिवारी के समधी थे..1934 से 1955 तक बॉम्बे टॉकीज फिल्म निर्माण टॉप पर रही.. इसने अछूत कन्या, महल, कंगन, झूला, किस्मत जैसी 115 एवरग्रीन फिल्में प्रोड्यूस कीं.., अशोक कुमार, दिलीप कुमार, राज कपूर, मधुबाला, लता मंगेशकर, सत्यजीत रे, बिमल रॉय, किशोर कुमार जैसे 280 से ज़्यादा लेजेंड्स इस कंपनी ने लॉन्च किए तो 700 से ज़्यादा फिल्मों को फाइनेंस किया.. कंपनी ने पूरे देश में 400 सिनेमा हॉल बनाए . सिनेमाई कला की पूरी ग्रोथ और शान के लिए बॉम्बे टॉकीज़ के अलावा बाहर के प्रोड्यूसर्स की बनाई कई फिल्मों को प्रमोट किया.
राजनारायण दुबे ने मशहूर फिल्म कंपनी, द बॉम्बे टॉकीज़ स्टूडियोज़, अपनी एसोसिएट कंपनियों बॉम्बे टॉकीज़ लैबोरेटरीज और बॉम्बे टॉकीज़ पिक्चर्स के साथ मिलकर इंडिविजुअल प्रोप्राइटरशिप कंपनियों के तौर पर शुरू की.. उसी समय, और लोगों को जोड़ने के लिए उन्होंने जून 1934 में भारत की पहली पब्लिक लिमिटेड फिल्म कंपनी, द बॉम्बे टॉकीज़ लिमिटेड (ltd.) शुरू की, हालांकि सभी कंपनियों को आमतौर पर बॉम्बे टॉकीज़ के नाम से जाना जाता था...द बॉम्बे टॉकीज़ स्टूडियोज़ ने अपनी फिल्मों के अलावा दूसरे प्रोड्यूसर्स और बैनर्स की फिल्मों को भी सफलतापूर्वक डिस्ट्रीब्यूट, प्रोसेस और प्रमोट किया सभी फिल्मों को राजनारायण दुबे ने अपनी प्रोप्राइटरशिप फाइनेंस कंपनी दुबे इंडस्ट्रीज एस्ट्ड 1929 के मालिक के तौर पर अपनी पर्सनल हैसियत से फाइनेंस किया था..राजनारायण दुबे का इंडियन सिनेमा के लिए एक बड़ा विज़न था.. वह चाहते थे कि इंडियन फिल्म मेकिंग एक इज्ज़तदार प्रोफेशन बने इसलिए उन्होंने तय किया कि बॉम्बे टॉकीज़ सिर्फ़ ग्रेजुएट्स को ही हायर करेगी.. उन्हें उम्मीद थी कि इस कदम से तीस और चालीस के दशक की इंडियन फिल्म इंडस्ट्री को लेजिटिमेटाइज़ किया जाएगा, और ऐसा ज़रूर हुआ.. इसके अलावा, राजनारायण दुबे यह भी चाहते थे कि इंडियन फिल्म इंडस्ट्री में सभी राज्यों और जीवन के सभी सेक्टर के इंडियन शामिल हों भले ही मूवी कंपनी यूरोपियन टेक्नीशियन के साथ काम करती थी, लेकिन राजनारायण दुबे इंडियन टेक्नीशियन को लाते थे और यह पक्का करते थे कि वे मूवी मेकिंग की कला सीखें..उन्होंने बहुत सारे इंडियन राइटर को भी साथ लिया ताकि फिल्मों में इंडियन कल्चरल सेंसिटिविटी हो और वे ज़्यादा लोगों को पसंद आ सकें.. इस कदम से एक बिल्कुल नया इंडियन प्रोफेशन, मूवी मेकिंग, शुरू हुआ।
राजनारायण दुबे ने अकेले ही पूरी इंडस्ट्री का बिज़नेस एंगल तैयार किया, जो अभी आना बाकी था उन्होंने कई नए थिएटर्स को सपोर्ट किया, जैसे कि कोलकाता में BN सरकार के न्यू थिएटर्स, वी शांताराम की प्रभात पिक्चर्स, होमी वाडिया की वाडिया मूवीटोन, सोहराब मोदी की मिनर्वा मूवीटोन, LV प्रसाद की प्रसाद लैब्स एंड पिक्चर्स (प्रसाद बॉम्बे टॉकीज़ के एक्स-टेक्नीशियन थे), SM वासन की जेमिनी पिक्चर्स और महबूब खान के थिएटर्स, ताराचंद बड़जात्या के राजश्री प्रोडक्शंस ...(बड़जात्या ने सात साल तक बॉम्बे टॉकीज़ के लिए डिस्ट्रीब्यूशन मैनेजर के तौर पर काम किया)
राजनारायण दुबे ने इन नई कंपनियों को फाइनेंस किया और उन्हें मजबूत बनाया..,उन्होंने देश में पूरा मूवी इकोसिस्टम बनाया.. राजनारायण दुबे दुबे ने जिस किसी को भी सपोर्ट किया, उसने इंडस्ट्री में अपना नाम बनाया..कई फिल्म-मेकर्स ने राजनारायण दुबे को अपनी किस्मत मानकर फॉलो किया, जैसे प्रकाश मेहरा, जो इंडिया के लेजेंडरी फिल्म मेकर्स में से एक थे, जिन्हें पहली बार शशि कपूर स्टारर हसीना मान जाएगी नाम की फिल्म डायरेक्ट करने का मौका मिला था.. बजट की कमी की वजह से फिल्म अटक गई। बाद में, पॉपुलर एक्टर शशि कपूर ने उन्हें मिस्टर राजनारायण दुबे से जान-पहचान करने की सलाह दी; "वही वो इंसान हैं जो आपके टैलेंट की तारीफ करेंगे और आपको मुश्किल से निकालने में मदद करेंगे"। राजनारायण दुबे ने उन्हें हाँ कह दिया और फिल्म शानदार चली. ऐसा ही कुछ प्रकाश मेहरा के साथ फिल्म समाधि में हुआ जिसमें धर्मेंद्र थे.. राजनारायण दुबे ने उनकी मदद की और उन्हें बहुत तारीफ मिली.. ऐसी घटनाओं की वजह से, प्रकाश मेहरा ने राजनारायण दुबे को भगवान की तरह माना और वह हमेशा उनके शुक्रगुजार रहे.. फिर उन्होंने राजनारायण दुबे की मदद से जंजीर, खून पसीना, हीरा फेरी जैसी बैक टू बैक हिट फिल्में दीं.. अपनी कंपनी शुरू करने के बाद उन्हें … बाद उन्हें पैसे की कोई दिक्कत नहीं हुई, लेकिन फिर भी वे अपनी बाद की हिट फ़िल्मों जैसे मुकद्दर का सिकंदर, लावारिस, जादूगर और कई दूसरी फ़िल्मों के लिए राजनारायण दुबे से गुडविल के तौर पर 101 रुपये लेते थे..
राजनारायण दुबे के पिता सेठ बद्रीप्रसाद दुबे इंडियन बिज़नेस टाइकून कहे जाते थे..उन्होंने 1931 में इंडिया की पहली टॉकी मूवी, आलम आरा को फाइनेंस किया था.. राजनारायण दुबे दुबे के दादा ब्रह्मदेव दुबे उस ज़माने के जाने-माने पहलवान थे और सबसे बड़े क्रांतिकारी चापेकर ब्रदर्स के सबसे करीबी साथी थे..ये परिवार मूलतः भदोही के सुरियावां का रहने वाला था..
दुबे फैमिली का भारतीय सिनेमा को आगे बढ़ाने में कितना बड़ा योगदान है.. इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एक इवेंट में, इंडियन सिनेमा के जनक दादा साहेब फाल्के के पोते चंद्र शेखर पुसालकर फाल्के ने कहा, “बॉम्बे टॉकीज़ की स्थापना और वर्क कल्चर के साथ, राजनारायण दुबे ने इंडियन फिल्म इंडस्ट्री को आगे बढ़ाने और डेवलप करने में एक बड़ी ऐतिहासिक भूमिका निभाई है.. उन्होंने इसे एक ऑर्गनाइज़्ड इंडस्ट्री का रूप दिया और इसे सभ्य समाज में कला के एक सम्मानजनक रूप के रूप में स्वीकार करवाया.. चंद्र शेखर पुसालकर फाल्के देकर कहा, अगर मिस्टर राजनारायण दुबे नहीं होते, तो न हिमांशु राय होते, न देविका रानी और न ही बॉम्बे टॉकीज़ होता..राजनारायण दुबे की विरासत को बाद में उनके बेटे पंडित घनश्याम दुबे ने संभाला..घनश्याम दुबे मुंबई की बड़ी राजनीतिक हस्ती रहे,,वो शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे के अति करीबियों में एक रहे..महाराष्ट्र से वो एएएलसी भी रहे.मुंबई और महाराष्ट्र की राजनीति उनका एक बड़ा कद था.दुबे फैमिली की फिल्मोद्योग की विरासत को अब घनश्याम दुबे की बहु और हरिशंकर तिवारी की बेटी कामिनी दुबे संभाल रही हैं जो भारतीय फिल्म जगत की एक जानी-मानी महिला निर्माता हैं.. उन्होंने प्रसिद्ध फिल्म राष्ट्रपुत्र और विश्व की पहली मुख्यधारा की संस्कृत फिल्म अहम ब्रह्मास्मि का निर्माण किया है..संस्कृत भाषा और सनातन संस्कृति के संरक्षण व प्रचार-प्रसार के लिए उन्हें संस्कृत भूषण, संस्कृत रत्न और संस्कृत भारती जैसी प्रतिष्ठित उपाधियों से सम्मानित किया जा चुका है..
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