सिधौली में खाद वितरण पर गंभीर सवाल, सचिव की मनमानी से किसान परेशान
तीन दिनों से चक्कर काट रहे बुजुर्ग और दिव्यांग किसान, परिचितों को प्राथमिकता देने का आरोप
सिधौली, सीतापुर। तहसील सिधौली क्षेत्र के बीवियां पुर चौराहा स्थित महमूदाबाद रोड के खाद वितरण केंद्र पर अव्यवस्थाओं को लेकर किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। किसानों ने खाद वितरण में कथित अनियमितता, परिचितों को प्राथमिकता देने और कालाबाजारी की आशंका जताते हुए संबंधित अधिकारियों से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।
किसानों का आरोप है कि केंद्र पर तैनात सचिव अमित यादव के आने का कोई निश्चित समय नहीं है। कभी वह सुबह 11 बजे तो कभी 12 बजे तक केंद्र पहुंचते हैं। मंगलवार, 3 नवंबर को भी सुबह 10:15 बजे तक सचिव केंद्र पर नहीं पहुंचे, जबकि प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच चुके थे। किसानों के मुताबिक, 2 नवंबर को भी उपजिलाधिकारी के निरीक्षण के दौरान सचिव अनुपस्थित मिले थे।
किसानों ने आरोप लगाया कि सचिव की अनुपस्थिति में केंद्र पर मौजूद कुछ कर्मचारी अपने परिचितों और रिश्तेदारों को प्राथमिकता देते हैं। उन्हें इशारे से बुलाकर अंदर से हस्ताक्षर और टोकन के माध्यम से खाद उपलब्ध कराई जाती है, जबकि आम किसान घंटों लाइन में खड़े रहकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं। इससे खाद वितरण की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
सबसे अधिक परेशानी बुजुर्ग और दिव्यांग किसानों को उठानी पड़ रही है। किसानों का कहना है कि कई जरूरतमंद लोग तीन दिनों से खाद के लिए केंद्र के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें बार-बार वापस लौटना पड़ रहा है। वहीं, कुछ लोगों को आसानी से खाद उपलब्ध हो जाने की शिकायत सामने आई है।
सचिव के समय पर नहीं पहुंचने को लेकर कर्मचारियों से सवाल करने पर कभी वाहन खराब होने तो कभी अन्य कारण बताए जाने की बात भी किसानों ने कही। किसानों का सवाल है कि जब खाद वितरण जैसी जरूरी व्यवस्था की जिम्मेदारी विभाग की है, तो फिर किसानों को कर्मचारियों की अनुपस्थिति और अव्यवस्थाओं का खामियाजा क्यों भुगतना पड़ रहा है?
किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि खाद वितरण केंद्र पर सचिव की उपस्थिति का समय निर्धारित किया जाए। सचिव अमित यादव की कार्यशैली और खाद वितरण प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही टोकन व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जाए तथा बुजुर्ग और दिव्यांग किसानों को प्राथमिकता के आधार पर खाद उपलब्ध कराई जाए।
किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो खेती-किसानी प्रभावित होगी। अब देखना यह है कि किसानों की शिकायतों पर जिला प्रशासन कब संज्ञान लेता है और खाद वितरण व्यवस्था में सुधार के लिए क्या कदम उठाता है।
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