सपा नेता आजम खान ने ईडी की गिरफ्तारी को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. 31 अक्टूबर को रामपुर जेल से रिहाई के 40 मिनट बाद हुई गिरफ्तारी और 14 दिन की न्यायिक हिरासत के आदेश को रद्द करने की मांग की है.


समाजवादी पार्टी के सीनियर नेता और पूर्व मंत्री आजम खान ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की गिरफ्तारी को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. आजम खान की याचिका पर इसी हफ्ते सुनवाई हो सकती है. उनके वकील निजाम पाशा ने सोमवार को मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने मामला रखा और जल्द सुनवाई की मांग की. इस पर CJI ने याचिका को इसी हफ्ते सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई.

 

आजम खान ने अपनी याचिका में 29 अक्टूबर को दोहरे पैन कार्ड मामले में जमानत मिलने के बाद 31 अक्टूबर को रामपुर जेल से रिहाई के महज 40 मिनट बाद ED की ओर से की गई गिरफ्तारी को चुनौती दी है. उनका कहना है कि रिहाई के तुरंत बाद हुई इस कार्रवाई को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. इसके साथ ही आजम खान ने गाजियाबाद की विशेष PMLA अदालत की ओर से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश को भी रद्द करने की मांग की है.

क्या है पूरा मामला?

आजम खान को ईडी ने मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी, रामपुर के निर्माण में सरकारी धन के कथित दुरुपयोग और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ्तार किया है. यह मामला मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से जुड़ा है, जिसके संस्थापक आजम खान हैं. ईडी का आरोप है कि सरकारी निर्माण कार्यों के ठेके पाने वाले ठेकेदारों ने ठेके की रकम का एक हिस्सा यूनिवर्सिटी के निर्माण में लगाया. इसके बाद ट्रस्ट को दान के रूप में पैसा दिया गया.

 

ईडी के मुताबिक, सरकारी धन से यूनिवर्सिटी के निजी परिसर में निर्माण कार्य कराए गए. इसमें विधायक/विधान परिषद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास निधि से किए गए करीब 6.60 करोड़ रुपये के काम भी शामिल हैं. रामपुर के अजीमनगर थाने में दर्ज 26 FIR में किसानों की कृषि भूमि कथित तौर पर जबरन यूनिवर्सिटी के लिए लेने के आरोप हैं. इसके अलावा 34 एकड़ की 45 शत्रु संपत्ति के भूखंडों पर अवैध कब्जे का आरोप भी ED ने अपनी जांच में शामिल किया है

ईडी ने यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों में से 426.46 करोड़ रुपये को कथित अपराध से अर्जित संपत्ति माना है. इन संपत्तियों का मौजूदा बाजार मूल्य करीब 1,170 करोड़ रुपये आंका गया है. एजेंसी ने 28 अक्टूबर को इन्हें अस्थायी रूप से अटैच किया था. 13 अक्टूबर को रामपुर जेल में आजम खान से पूछताछ भी की गई थी. इसके बाद 31 अक्टूबर को जेल से रिहा होने के कुछ ही समय बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया.

जेल से बाहर आते ही हुई थी गिरफ्तारी

आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को दोहरे पैन कार्ड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत मिली थी. 29 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने दोनों की सजा निलंबित करते हुए जमानत मंजूर की थी. इसके बाद 31 अक्टूबर को आजम खान रामपुर जेल से बाहर आए, लेकिन जेल से निकलने के करीब 40 मिनट बाद ही ईडी ने उन्हें जौहर यूनिवर्सिटी और मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार कर लिया.

इसके बाद एक नवंबर को ईडी ने आजम खान को गाजियाबाद की विशेष PMLA अदालत में पेश किया. अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया. अब आजम खान ने ED की गिरफ्तारी से लेकर न्यायिक हिरासत के आदेश तक को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई में आजम खान की गिरफ्तारी की वैधता और न्यायिक हिरासत के आदेश को चुनौती देने वाली उनकी दलीलों पर विचार होगा.

348 दिन तक जेल में रहने के बाद आजम की हुई थी रिहाई

आजम खान और अब्दुल्ला आजम खान को दो पैन कार्ड मामले में 17 नवंबर 2025 को 7-7 साल की सजा सुनाई गई थी. सजा सुनाए जाने के बाद दोनों को उसी दिन हिरासत में लेकर रामपुर जिला जेल भेज दिया गया था. करीब 11 महीने 12 दिन यानी 348 दिन से दोनों जेल में रहे. इस फैसले के खिलाफ दोनों ने सेशन कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. 20 अप्रैल 2026 को अपील खारिज हुई और सजा बरकरार रही. फिर दोनों ने हाई कोर्ट का रूख किया. 29 अक्टूबर को हाई कोर्ट ने आजम और उनके बेटे अब्दुल्ला को जमानत दे दी थी.

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