आमोद कुमार


आमोद कुमार 
बांदा। केन नदी के पावन तट पर गंगा समग्र एवं विश्व हिंदू महासंघ गौ रक्षा समिति के तत्वावधान में वैदिक मंत्रोच्चार और सैकड़ों दीपों की आभा के बीच केन माता की महाआरती संपन्न हुई। श्रद्धा और आस्था के इस आयोजन में नदी संरक्षण का संकल्प तो लिया गया, लेकिन आरती के बाद उठे एक सवाल ने प्रशासनिक दावों पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए।
समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि जिला प्रशासन ने जनपद में 64 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य पूरा होने का दावा किया है, लेकिन धरातल पर उसकी तस्वीर इन दावों से मेल नहीं खाती। उनका आरोप है कि यदि इतने पौधे वास्तव में लगाए गए होते तो बांदा की तस्वीर कहीं अधिक हरित दिखाई देती। ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक है कि पौधे जमीन पर हैं या केवल सरकारी फाइलों और आंकड़ों में?जिला अध्यक्ष महेश कुमार प्रजापति ने कहा कि "केन माता और गौमाता दोनों प्रकृति और जीवन की आधारशिला हैं। पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी अभियान का विषय नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व का प्रश्न है। यदि 64 लाख पौधे लगाए गए हैं तो वे जनता को दिखाई भी देने चाहिए। कागजी पौधारोपण न पर्यावरण बचा सकता है और न ही बढ़ते तापमान को रोक सकता है।"उन्होंने मांग की कि लगाए गए सभी पौधों का जियो-टैगिंग के माध्यम से सत्यापन कराया जाए, उनकी नियमित देखभाल सुनिश्चित की जाए और पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। समिति ने चेतावनी दी कि यदि 15 दिनों के भीतर प्रशासन ने ठोस पहल नहीं की तो संगठन स्वयं पूरे जनपद में ग्राम पंचायतवार सत्यापन अभियान चलाकर यह पता लगाएगा कि किस क्षेत्र में कितने पौधे लगाए गए और उनकी वास्तविक स्थिति क्या है।समिति ने यह भी कहा कि पौधारोपण केवल फोटो खिंचवाने या लक्ष्य पूरा करने का माध्यम नहीं होना चाहिए। यदि लगाए गए पौधे कुछ ही महीनों में सूख जाएं तो करोड़ों रुपये खर्च करने वाले अभियान का उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है। पर्यावरण की रक्षा भाषणों और प्रेस विज्ञप्तियों से नहीं, बल्कि जीवित और सुरक्षित वृक्षों से होती है।कार्यक्रम में अधिवक्ता प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष दीपक शुक्ला, जिला सह प्रभारी आलोक कुमार निगम, लोहा सिंह, महेश प्रजापति, सौरभ सैनी, कृष्ण कुमार धुरिया सहित संगठन के अनेक पदाधिकारी, कार्यकर्ता, गंगा भक्त, गौ सेवक, युवा एवं मातृशक्ति उपस्थित रही। सभी ने एक स्वर में संकल्प लिया—"नदी बचाओ, पेड़ लगाओ और लगाए गए हर पौधे को जीवित रखो।"

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