सहजनवा पाली (गोरखपुर


सहजनवा पाली (गोरखपुर)। विकासखंड पाली की ग्राम पंचायत नरौली में मनरेगा के तहत कराए जा रहे कार्यों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि जिस बंजरहा पोखरे की खुदाई और सौंदर्यीकरण पर वर्ष 2022-23 में लाखों रुपये खर्च किए जा चुके हैं, उसी पोखरे को महज तीन वर्ष बाद दोबारा योजना में शामिल कर इस बार और अधिक बजट स्वीकृत कराया गया है। मामले को लेकर ग्रामीणों ने जिला पंचायत राज अधिकारी को शिकायती पत्र सौंपते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 2022-23 में बंजरहा पोखरे की खुदाई एवं सौंदर्यीकरण कार्य पर लगभग 3.91 लाख रुपये खर्च किए गए थे, जबकि अब उसी संपत्ति पर करीब 6.74 लाख रुपये का नया बजट स्वीकृत किया गया है। इससे सरकारी धन के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितता की आशंका गहरा गई है।

5 वर्ष से पहले दोबारा कार्य कैसे? ग्रामीणों ने उठाए बड़े सवाल
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि शासन की गाइडलाइन के अनुसार किसी भी सार्वजनिक संपत्ति के मरम्मत, रखरखाव, नवीनीकरण या पुनर्वास कार्य के लिए सामान्य परिस्थितियों में निर्माण या पूर्व कार्य की तिथि से 5 से 10 वर्ष का अंतराल होना चाहिए। केवल प्राकृतिक आपदा अथवा आकस्मिक क्षति की स्थिति में ही इससे पहले कार्य कराया जा सकता है, जिसके लिए कारणों का स्पष्ट अभिलेख होना आवश्यक है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से सवाल किया है कि यदि बंजरहा पोखरे पर पांच वर्ष पूरे होने से पहले दोबारा खुदाई कराई जा रही है तो क्या यह किसी प्राकृतिक आपदा के कारण हुआ है? यदि हां, तो उसका प्रमाण सार्वजनिक किया जाए।

क्या जलकुंभी आपदा की श्रेणी में आती है?

ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि पोखरे में जलकुंभी या सामान्य गाद जमा होने को आधार बनाकर पुनः खुदाई कराई जा रही है तो क्या इसे प्राकृतिक आपदा माना जा सकता है? शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इस बिंदु पर प्रशासन को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

फर्जी मस्टर रोल और ऑनलाइन हाजिरी पर भी सवाल

मामले में सबसे गंभीर आरोप मनरेगा की ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली को लेकर लगाए गए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि अलग-अलग मस्टर रोल में कार्यरत मजदूरों की जगह कई बार एक ही व्यक्तियों की तस्वीरें अपलोड की गई हैं। इतना ही नहीं, जिन लोगों की तस्वीरें अपलोड हुई हैं, वे मौके पर वास्तविक कार्य करते हुए भी दिखाई नहीं देते।

ग्रामीणों का आरोप है कि कार्य करने वाले वास्तविक मजदूरों के बजाय केवल फोटो खिंचवाने के लिए कुछ लोगों को पोखरे के किनारे खड़ा कर तस्वीरें अपलोड की गईं, जबकि वास्तविक श्रमिकों का रिकॉर्ड ऑनलाइन उपस्थिति में दिखाई नहीं देता। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इसका साक्ष्य मनरेगा पोर्टल पर उपलब्ध ऑनलाइन हाजिरी में देखा जा सकता है।

पांच वर्षों में किन-किन पोखरों पर कितना खर्च हुआ?

ग्रामीणों ने मांग की है कि ग्राम पंचायत नरौली में पिछले पांच वर्षों के दौरान सभी पोखरों की खुदाई, सौंदर्यीकरण एवं पुनर्वास कार्यों का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए। इसमें यह बताया जाए कि किस पोखरे पर कब कार्य हुआ, कितना बजट स्वीकृत हुआ, कार्य का आधार क्या था और दो कार्यों के बीच कितना समय अंतराल रहा।
जांच पूरी होने तक कार्य रोकने की मांग

शिकायतकर्ता रिपुसूदन गुप्ता और काशी यादव ने प्रशासन से मांग की है कि बंजरहा पोखरे पर चल रहे कार्य को तत्काल प्रभाव से रोका जाए तथा पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।

अधिकारी का पक्ष नहीं मिल सका
मामले में प्रशासनिक पक्ष जानने के लिए खंड विकास अधिकारी से दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हो सका। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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