ऐतिहासिक जनआंदोलन, राजेश कुमार सिद्धार्थ ने किया जनआह्वान


ऐतिहासिक जनआंदोलन, राजेश कुमार सिद्धार्थ ने किया जनआह्वान
सिधौली (सीतापुर)। बहुजन समाज के स्वाभिमान, सम्मान, सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए आगामी 30 जून 2026 को सिधौली क्षेत्र में एक विशाल जनआंदोलन एवं पदयात्रा आयोजित की जाएगी। इस आंदोलन का नेतृत्व डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं किसान कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ करेंगे। आंदोलन को लेकर क्षेत्र में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया जा रहा है तथा गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने बहुजन समाज के लोगों, सामाजिक संगठनों, युवाओं, महिलाओं, किसानों, मजदूरों तथा संविधान और सामाजिक न्याय में विश्वास रखने वाले सभी नागरिकों से आह्वान किया है कि वे 30 जून को प्रातः 10 बजे डॉ. अंबेडकर पार्क, बहादुरपुर (सिधौली) पहुंचकर इस जनआंदोलन को ऐतिहासिक बनाने में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें।
उन्होंने कहा कि भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर, तथागत गौतम बुद्ध तथा बहुजन समाज में जन्मे महापुरुषों ने अपना संपूर्ण जीवन समाज के वंचित, शोषित और कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित किया। उनके संघर्षों और त्याग के परिणामस्वरूप देश को एक ऐसा संविधान मिला जिसने सभी नागरिकों को समान अधिकार, सम्मान और न्याय का मार्ग प्रदान किया। लेकिन आज भी कई स्थानों पर संविधान की मूल भावना के विपरीत कार्य किए जा रहे हैं और महापुरुषों के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली घटनाएं सामने आ रही हैं।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि जब भी संविधान, सामाजिक न्याय और महापुरुषों के सम्मान पर आघात होगा, तब बहुजन समाज चुप नहीं बैठेगा। समाज को संगठित होकर अपने अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि अन्याय, भेदभाव, शोषण और सामाजिक असमानता के खिलाफ लोकतांत्रिक संघर्ष का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने देश को संविधान देकर समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व का संदेश दिया था। तथागत गौतम बुद्ध ने करुणा, मानवता और अहिंसा का मार्ग दिखाया था। वहीं बहुजन समाज में जन्मे अनेक महापुरुषों ने सामाजिक परिवर्तन और मानवाधिकारों की लड़ाई लड़ी। आज आवश्यकता है कि उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाया जाए और नई पीढ़ी को उनके संघर्षों से परिचित कराया जाए।
आंदोलन की तैयारियों को लेकर आयोजित बैठकों में वक्ताओं ने कहा कि बहुजन समाज की एकता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। यदि समाज संगठित रहेगा तो किसी भी प्रकार के अन्याय और भेदभाव का मजबूती से मुकाबला किया जा सकता है। आंदोलन के माध्यम से लोगों को संविधान में प्रदत्त अधिकारों, सामाजिक न्याय, शिक्षा, रोजगार और सम्मान के मुद्दों पर भी जागरूक किया जाएगा।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि वर्तमान समय में संविधान की मूल भावना को मजबूत करने की आवश्यकता है। सामाजिक समरसता, भाईचारा और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा तभी संभव है जब समाज का प्रत्येक वर्ग जागरूक होकर अपने अधिकारों और कर्तव्यों को समझे। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं है बल्कि सामाजिक चेतना और जनजागरण का अभियान है।
उन्होंने कहा कि बहुजन समाज के महापुरुषों के विचारों को दबाने या उनके योगदान को कमतर आंकने के किसी भी प्रयास को समाज स्वीकार नहीं करेगा। संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे आंदोलन में शामिल होकर सामाजिक न्याय और समानता के इस अभियान को नई ऊर्जा प्रदान करें।
कार्यक्रम के तहत 30 जून को डॉ. अंबेडकर पार्क बहादुरपुर में विशाल जनसभा आयोजित की जाएगी, जिसमें विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, बुद्धिजीवी, युवा, किसान, मजदूर और बहुजन समाज के हजारों लोग शामिल होंगे। सभा के उपरांत पदयात्रा निकाली जाएगी, जिसके माध्यम से सामाजिक न्याय, संवैधानिक अधिकारों और महापुरुषों के सम्मान का संदेश जन-जन तक पहुंचाया जाएगा।
आंदोलन के आयोजकों का कहना है कि यह कार्यक्रम लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए समर्पित होगा। कार्यक्रम में संविधान की प्रस्तावना का वाचन, महापुरुषों के विचारों पर चर्चा तथा सामाजिक जागरूकता से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श भी किया जाएगा।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि यह समय इतिहास से प्रेरणा लेने और भविष्य को सुरक्षित करने का है। स…

ऐतिहासिक जनआंदोलन, राजेश कुमार सिद्धार्थ ने किया जनआह्वान
सिधौली (सीतापुर)। बहुजन समाज के स्वाभिमान, सम्मान, सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए आगामी 30 जून 2026 को सिधौली क्षेत्र में एक विशाल जनआंदोलन एवं पदयात्रा आयोजित की जाएगी। इस आंदोलन का नेतृत्व डॉ. आंबेडकर संवैधानिक महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं किसान कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ करेंगे। आंदोलन को लेकर क्षेत्र में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया जा रहा है तथा गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने बहुजन समाज के लोगों, सामाजिक संगठनों, युवाओं, महिलाओं, किसानों, मजदूरों तथा संविधान और सामाजिक न्याय में विश्वास रखने वाले सभी नागरिकों से आह्वान किया है कि वे 30 जून को प्रातः 10 बजे डॉ. अंबेडकर पार्क, बहादुरपुर (सिधौली) पहुंचकर इस जनआंदोलन को ऐतिहासिक बनाने में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें।
उन्होंने कहा कि भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर, तथागत गौतम बुद्ध तथा बहुजन समाज में जन्मे महापुरुषों ने अपना संपूर्ण जीवन समाज के वंचित, शोषित और कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित किया। उनके संघर्षों और त्याग के परिणामस्वरूप देश को एक ऐसा संविधान मिला जिसने सभी नागरिकों को समान अधिकार, सम्मान और न्याय का मार्ग प्रदान किया। लेकिन आज भी कई स्थानों पर संविधान की मूल भावना के विपरीत कार्य किए जा रहे हैं और महापुरुषों के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली घटनाएं सामने आ रही हैं।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि जब भी संविधान, सामाजिक न्याय और महापुरुषों के सम्मान पर आघात होगा, तब बहुजन समाज चुप नहीं बैठेगा। समाज को संगठित होकर अपने अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि अन्याय, भेदभाव, शोषण और सामाजिक असमानता के खिलाफ लोकतांत्रिक संघर्ष का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने देश को संविधान देकर समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व का संदेश दिया था। तथागत गौतम बुद्ध ने करुणा, मानवता और अहिंसा का मार्ग दिखाया था। वहीं बहुजन समाज में जन्मे अनेक महापुरुषों ने सामाजिक परिवर्तन और मानवाधिकारों की लड़ाई लड़ी। आज आवश्यकता है कि उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाया जाए और नई पीढ़ी को उनके संघर्षों से परिचित कराया जाए।
आंदोलन की तैयारियों को लेकर आयोजित बैठकों में वक्ताओं ने कहा कि बहुजन समाज की एकता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। यदि समाज संगठित रहेगा तो किसी भी प्रकार के अन्याय और भेदभाव का मजबूती से मुकाबला किया जा सकता है। आंदोलन के माध्यम से लोगों को संविधान में प्रदत्त अधिकारों, सामाजिक न्याय, शिक्षा, रोजगार और सम्मान के मुद्दों पर भी जागरूक किया जाएगा।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि वर्तमान समय में संविधान की मूल भावना को मजबूत करने की आवश्यकता है। सामाजिक समरसता, भाईचारा और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा तभी संभव है जब समाज का प्रत्येक वर्ग जागरूक होकर अपने अधिकारों और कर्तव्यों को समझे। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं है बल्कि सामाजिक चेतना और जनजागरण का अभियान है।
उन्होंने कहा कि बहुजन समाज के महापुरुषों के विचारों को दबाने या उनके योगदान को कमतर आंकने के किसी भी प्रयास को समाज स्वीकार नहीं करेगा। संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे आंदोलन में शामिल होकर सामाजिक न्याय और समानता के इस अभियान को नई ऊर्जा प्रदान करें।
कार्यक्रम के तहत 30 जून को डॉ. अंबेडकर पार्क बहादुरपुर में विशाल जनसभा आयोजित की जाएगी, जिसमें विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, बुद्धिजीवी, युवा, किसान, मजदूर और बहुजन समाज के हजारों लोग शामिल होंगे। सभा के उपरांत पदयात्रा निकाली जाएगी, जिसके माध्यम से सामाजिक न्याय, संवैधानिक अधिकारों और महापुरुषों के सम्मान का संदेश जन-जन तक पहुंचाया जाएगा।
आंदोलन के आयोजकों का कहना है कि यह कार्यक्रम लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए समर्पित होगा। कार्यक्रम में संविधान की प्रस्तावना का वाचन, महापुरुषों के विचारों पर चर्चा तथा सामाजिक जागरूकता से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श भी किया जाएगा।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि यह समय इतिहास से प्रेरणा लेने और भविष्य को सुरक्षित करने का है। समाज के सभी वर्गों को मिलकर संविधान की रक्षा, सामाजिक न्याय की स्थापना और महापुरुषों के सम्मान के लिए आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि बहुजन समाज का संघर्ष सम्मान, अधिकार और न्याय के लिए है तथा यह संघर्ष लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में रहकर निरंतर जारी रहेगा।
उन्होंने पुनः सभी लोगों से अपील करते हुए कहा कि 30 जून 2026 को प्रातः 10 बजे डॉ. अंबेडकर पार्क बहादुरपुर, सिधौली पहुंचकर इस जनआंदोलन और पदयात्रा को सफल बनाएं तथा सामाजिक न्याय, समानता, भाईचारे और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने का संकल्प लें।
अंत में उपस्थित लोगों ने एक स्वर में नारा लगाया—
"याचना नहीं, अब रण होगा, संघर्ष बड़ा भीषण होगा"
"जय भीम! जय संविधान!"

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